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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Azamgarh News ›   Operation Kayakalp 50 percent work is complete in azamgarh 50 percent schools do not have furniture

Azamgarh News: कायाकल्प के 50 प्रतिशत काम पूरे, फिर भी 50 प्रतिशत स्कूलों में फर्नीचर नहीं; जमीन पर बच्चे

Sat, 03 May 2025 05:10 AM IST
अमन विश्वकर्मा अमर उजाला नेटवर्क, आजमगढ़।
अमर उजाला नेटवर्क, आजमगढ़। Published by: अमन विश्वकर्मा Updated Sat, 03 May 2025 05:10 AM IST
सार

यूपी के आजमगढ़ में परिषदीय स्कूलों का हाल बेहाल है। यहां अधिकत स्कूलाें में बच्चे जमीन पर बैठकर शिक्षा हासिल कर रहे हैं। सरकार की योजना ऑपरेशन कायाकल्प के तहत यहां काम तो किए जा रहे हैं लेकिन उसकी सच्चाई कुछ और ही है।

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Operation Kayakalp 50 percent work is complete in azamgarh 50 percent schools do not have furniture
इंग्लिश मीडिया प्राथमिक विद्यालय में टाट पट्टी पर बैठे बच्चे। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

Operation Kayakalp in UP: बेसिक शिक्षा विभाग परिषदीय विद्यालयों को स्मार्ट बनाने में जुटा हुआ है। बिजली, कंप्यूटर, प्रोजेक्टर, शुल्क पेयजल के लिए आरओ, सबमर्सिबल सहित अन्य सुविधाओं से विद्यालयों को लैस किए जा रहे हैं। जिले में 50 प्रतिशत से अधिक विद्यालयों में फर्नीचर की व्यवस्था नहीं है। ऐसे में बच्चे जमीन पर बैठ ककहरा सीख रहे। वहीं, विद्यालयों का कायाकल्प करने का दावा किया जा रहा है।

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जिले में 2706 परिषदीय स्कूल संचालित हैं। इसमें 1724 प्राथमिक, 458 उच्च प्राथमिक व 524 कंपोजिट विद्यालय हैं। इन विद्यालयों में तीन लाख से अधिक बच्चे पंजीकृत हैं। शासन से इन स्कूलों में ऑपरेशन कायाकल्प का संचालन किया जा रहा है। इसके तहत बच्चों के लिए सभी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जानी है। 
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इनमें बच्चों के लिए कुर्सी-मेज की भी व्यवस्था शामिल है। ऑपरेशन कायाकल्प के तहत शहरी स्कूलों में सुविधाएं उपलब्ध नहीं हो पा रही हैं। शहरी क्षेत्र के अधिकतर स्कूल ऐसे हैं, जिनमें बच्चों के लिए फर्नीचर की व्यवस्था नहीं हो सकी है। विभागीय अधिकारियों का ध्यान इस ओर नहीं है। 
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बेसिक शिक्षा विभाग से मिले आंकड़ों के अनुसार, 19 पैरामीटर पर कुल 94.96 फीसदी काम हुआ है। बाकी काम या तो चल रहा है या पूर्ण होने की स्थिति में है। सबसे खराब स्थिति फर्नीचर की है। अभी तक मात्र 49.50 प्रतिशत विद्यालयों में ही काम हो सके हैं।

कायाकल्प के तहत हो रहे यह कार्य
शुद्ध सुरक्षित पेयजल, विद्यालय में नल-जल की आपूर्ति, बालक इज्जत घर, बालिका इज्जत घर, बालक यूरिनल, बालिका यूरिनल, यूरिनल में जलापूर्ति, इज्जतघर का टाइलीकरण, दिव्यांग सुलभ शौचालय, मल्टीपल हैंड वाशिंग यूनिट, आधुनिक रसोईघर, कक्षा की फर्श पर टाइलीकरण, श्यामपट विद्यालय की रंगाई-पुताई, दिव्यांग सुलभ रैंप व रेलिंग, कक्षा कक्ष में वायरिंग व विद्युत उपकरण, विद्यालय का विद्युत संयोजन, बच्चों के लिए डेस्क व बेंच, विद्यालय की चाहरदीवारी।

Operation Kayakalp 50 percent work is complete in azamgarh 50 percent schools do not have furniture
प्राथमिक विद्यालय प्रथम सरायमीर में टाट पट्टी पर बैठे बच्चे। - फोटो : अमर उजाला

सीन-1 : अमर उजाला की टीम ने स्कूलों में फर्नीचर की व्यवस्था को लेकर पड़ताल किया। टीम शिक्षा क्षेत्र पवई के इंग्लिश मीडियम प्राथमिक विद्यालय बेलवाई में पहुंची। यहां पर बच्चे टाट पट्टी पर बैठकर पढ़ाई करते हुए मिले।

प्रधानाध्यापक विनय सिंह ने बताया गया कि विद्यालय में कुल 126 बच्चों का नामांकन है। कक्षा तीन से पांच तक के बच्चों को बैठने के लिए डेस्क बेंच की व्यवस्था व्यक्तिगत रूप से की गई है। जबकि कक्षा एक और दो के बच्चों को टाटपट्टी पर ही बैठाया जाता है। ऐसे में बच्चों को जूते पहनकर टाटपट्टी पर बैठना असुविधाजन है, लेकिन इस दिशा में बेसिक शिक्षा विभाग की उदासीनता आश्चर्यजनक है।

सीन -2 : प्राथमिक विद्यालय प्रथम सरायमीर में अभी तक बैंच, डैक्स नहीं आई है। बच्चे टाट-पट्टी पर बैठकर पढ़ाई करते हैं। इतना ही नहीं यहां तो स्वच्छ भारत मिशन की भी धज्जियां उड़ाई जा रही है। शौचालय गंदगी से पटा पड़ा है। पानी सप्लाई नहीं है। बड़ी दिक्कत होती है। पानी पीने के लिए टंकी में सप्लाई नहीं है। गर्मी बढ़ने काफी दिक्कत है। धानाध्यापक नीता कुमारी ने बताया कि कई बार बेंच और डेस्क की मांग की गई लेकिन कुछ नहीं हुआ।

बोले अधिकारी
कायाकल्प के तहत स्कूलों में कार्य कराए जा रहे हैं। फर्नीचर की भी व्यवस्था की जा रही है। जिन विद्यालयों में फर्नीचर की सुविधा नहीं है, उन्हें भी देने का प्रयास हो रहा है। - राजीव पाठक, बीएसए

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