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कभी होती थी रेशम की धुलाई, आज लड़ रहा अस्तित्व की जंग
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नगर से सटे कोडर अजमतपुर ग्राम सभा में ऐतिहासिक अटलस का पोखरा है। जिसके नाम पर आज पूरा क्षेत्र जाना जाता है। एक समय था जब इस पोखरे में रेशम की धुलाई होती थी लेकिन आज यह पोखरा अपना अस्तित्व बचाने के लिए जंग लड़ रहा है। प्रशासन ने इस पोखरे के लेकर कई योजनाएं बनाई लेकिन उन योजनाओं पर आज तक अमल नहीं हो सका।
जल संरक्षण के लिए संरक्षण के लिए सरकार की ओर से तालाबों के संरक्षण का आदेश जारी किया जा रहा है। इनके संरक्षण को लेकर उसके द्वारा करोड़ों रुपये धनराशि भी खर्च की जा रही है। लेकिन सरकार के सारे प्रयास प्रशासनिक उदसीनता के कारण फलीभूत नहीं हो रहे हैं। नगर क्षेत्र में पहले जहां कई पोखरे थे उनका अस्तित्व समाप्त हो चुका है। चाहे वह दलसिंगार मोहल्ले का पोखरा हो या कोट किला की पोखरी, या फिर अठवरिया मैदान का पोखरा या फिर हर्रा की चुंगी का पोखरा या कोइरी पोखरा। हर पोखरा अतिक्रमण के चलते गायब हो चुका है। जो पोखरे बचे हैं वह अपने अस्तित्व की जंग लड़ रहे हैं। इन्हीं पोखरों में से एक है नगर से सटे कोडर अजमतपुर ग्राम स्थित अटलस का पोखरा। एक समय था जब देश में अंग्रेजी हुकूमत थी। अंग्रेजों द्वारा इस पोखरे में रेशम की धुलाई कराई जाती थी। उनके द्वारा रेशम की धुलाई के लिए इस पोखरे को पानी को सबसे अच्छा माना जाता था। लेकिन आज यह पोखरा धीरे-धीरे सिकुड़ता जा रहा है। अगल बगल के रहने वाले लोगों ने इस पर काफी दिनों से कब्जा करना शुरू कर दिया है। हालांकि प्रशासन की ओर से कई बार इस पोखरे का सुंदरीकरण कराकर इसे पिकनिक स्पाट के रूप में विकसित करने की योजना बनी। योजना तो कई बार बनी लेकिन उस पर अमल नहीं किया जा सका। जिसका परिणाम है कि आज यह पोखरा अपने अस्तित्व की जंग लड़ रहा है।
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जल संरक्षण के लिए संरक्षण के लिए सरकार की ओर से तालाबों के संरक्षण का आदेश जारी किया जा रहा है। इनके संरक्षण को लेकर उसके द्वारा करोड़ों रुपये धनराशि भी खर्च की जा रही है। लेकिन सरकार के सारे प्रयास प्रशासनिक उदसीनता के कारण फलीभूत नहीं हो रहे हैं। नगर क्षेत्र में पहले जहां कई पोखरे थे उनका अस्तित्व समाप्त हो चुका है। चाहे वह दलसिंगार मोहल्ले का पोखरा हो या कोट किला की पोखरी, या फिर अठवरिया मैदान का पोखरा या फिर हर्रा की चुंगी का पोखरा या कोइरी पोखरा। हर पोखरा अतिक्रमण के चलते गायब हो चुका है। जो पोखरे बचे हैं वह अपने अस्तित्व की जंग लड़ रहे हैं। इन्हीं पोखरों में से एक है नगर से सटे कोडर अजमतपुर ग्राम स्थित अटलस का पोखरा। एक समय था जब देश में अंग्रेजी हुकूमत थी। अंग्रेजों द्वारा इस पोखरे में रेशम की धुलाई कराई जाती थी। उनके द्वारा रेशम की धुलाई के लिए इस पोखरे को पानी को सबसे अच्छा माना जाता था। लेकिन आज यह पोखरा धीरे-धीरे सिकुड़ता जा रहा है। अगल बगल के रहने वाले लोगों ने इस पर काफी दिनों से कब्जा करना शुरू कर दिया है। हालांकि प्रशासन की ओर से कई बार इस पोखरे का सुंदरीकरण कराकर इसे पिकनिक स्पाट के रूप में विकसित करने की योजना बनी। योजना तो कई बार बनी लेकिन उस पर अमल नहीं किया जा सका। जिसका परिणाम है कि आज यह पोखरा अपने अस्तित्व की जंग लड़ रहा है।
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