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दावे से नहीं सदमे के साक्ष्य पर मुआवजा

Mon, 20 Apr 2015 11:35 PM IST
आशीष तिवारी , आजमगढ़
आशीष तिवारी , आजमगढ़ Updated Mon, 20 Apr 2015 11:35 PM IST
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Not claim compensation on the evidence of shock
बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि से बर्बाद फसल को देख भले ही किसान की मौत हुई हो लेकिन जिला प्रशासन सभी को सरकारी सहायता पाने वाले की श्रेणी में नहीं रख रहा। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में सदमा या दुर्घटना साबित होने और मुआवजा पाने की श्रेणी में आने वाले किसानों को आर्थिक सहायता दी जाएगी।
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कुछ किसान की मौत सदमे से बताई जा रही है लेकिन घरवाले पीएम कराए बिना ही अंतिम संस्कार कर दे रहे हैं। ऐसे में उन्हें मुआवजा नहीं मिलेगा। किसान दुर्घटना बीमा के तहत किसानों को पांच लाख रुपये दिए जाने हैं, जिनकी मौत किसी दुर्घटना या सदमे से हुई है। दैवी आपदा और मुख्यमंत्री विवेकाधीन कोष के तहत भी उसे सात लाख रुपये दिए जाने का प्रावधान है।
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इस प्रकार नियम के तहत मरने वाले किसान के परिवार को कुल 12 लाख रुपये सरकारी सहायता दी जाएगी। जिले में 15 अप्रैल की शाम कप्तानगंज थाने के जफरामऊ गांव निवासी राजबली राजभर की मौत ही इस दायरे में आती है क्योंकि राजबली की मौत के समय ओलावृष्टि और आकाशीय बिजली की चपेट में आने से हुई थी।
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क्षेत्र में जो कोई मर रहा है, लोग उसे फसल की बर्बादी का सदमा से हुई मौत बता रहे हैं। डाक्टरों को सख्त हिदायत दी गई है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में कुछ भी गलत न होने पाए। ओलावृष्टि के समय उनके क्षेत्र में सिर्फ एक किसान मरा था। उसके घरवालों को आर्थिक सहायता के लिए कार्यवाही जारी है। - रामगोपाल सिंह, एसडीएम बूढ़नपुर

आपदाग्रस्त किसानों की सहायता केे लिए शासन से मिले 48 लाख रुपये बांट दिए गए। अब यदि और कोई किसान इस श्रेणी के तहत आएगा तो उसे सहायता राशि उपलब्ध कराने के लिए शासन को रिपोर्ट भेजकर बजट मांगा जाएगा।  - बृजेश कुमार, एडीएम वित्त/राजस्व

बगैर रिपोर्ट लगाए लौटे ः अहरौला थाना के बनकट गांव में खेत में मड़ाई के लिए ट्रैक्टर का इंतजार कर रहे किसान बरतू राम की हुई सदमे से मौत के बाद सोमवार को कानूनगो जगन्नाथ सिंह और क्षेत्रीय लेखपाल ऋषिदेव गौंड पहुंचे। शव का पीएम न कराने की वजह से राजस्वकर्मी बगैर कोई रिपोर्ट लगाए ही वापस लौट गए। कानूनगो ने बताया कि बरतू की मौत सदमे से हुई है लेकिन बगैर पीएम कराए घरवालों को कोई सहायता प्रदान नहीं की जाएगी।


पीएम में सदमा नहीं ः मौसम की बेरुखी का परिणाम है कि जिले में करीब एक सप्ताह के भीतर एक दर्जन से अधिक किसानों की मौत हो चुकी है। इसमें कई थानों की पुलिस ने मौत के बाद किसानों के लाश का पोस्टमार्टम भी कराई लेकिन इन किसानों के मौत की रिपोर्ट में मौत का कारण दुर्घटना या सदमा नहीं साबित हो सकी है।
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