फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Azamgarh News ›   No place found in hospital, real brothers break their lives, no male member left in the family 

अस्पताल में नहीं मिली जगह, सगे भाइयों ने तोड़ा दम, परिवार में नहीं बचा कोई पुरुष सदस्य 

Fri, 23 Apr 2021 08:26 PM IST
गीतार्जुन गौतम अमर उजाला नेटवर्क, आजमगढ़
अमर उजाला नेटवर्क, आजमगढ़ Published by: गीतार्जुन गौतम Updated Fri, 23 Apr 2021 08:26 PM IST
सार

एक महिला व दो बेटियां फोन कर लगाती रहीं गुहार लेकिन शव उठाने नहीं आया कोई 
 

विज्ञापन
No place found in hospital, real brothers break their lives, no male member left in the family 
सांकेतिक तस्वीर

विस्तार

आजमगढ़ के खत्री टोला मुहल्ला निवासी दो सगे भाइयों की बृहस्पतिवार की रात इलाज के अभाव में मौत हो गई। उन्हें न तो निजी अस्पताल में बेड मिला और न ही मेडिकल कालेज में। दौड़भाग करने के बाद परिजन उन्हें लेकर घर लौट आए और दोनों ने घर पर ही दम तोड़ दिया। दोनों भाई कोरोना से पीड़त थे।

विज्ञापन


परिवार में कोई पुरुष सदस्य कोई नहीं था। एक महिला व दो बेटियां फोन कर गुहार लगाती रहीं लेकिन शव उठाने भी कोई नहीं आया। शुक्रवार की सुबह 10 बजे स्वास्थ्य विभाग की एंबुलेंस ने राजघाट ले जाकर अंतिम संस्कार कराया। खत्री टोला मुहल्ला निवासी 65 और 55 साल के दो भाइयों को कई दिनों से बुखार था और सांस भी फूल रही थी। दोनों भाई कोरोना से पीड़त थे। बड़े भाई की एक बेटी है, जिसकी शादी हो चुकी है। छोटे भाई की भी दो बेटियां हैं। बृहस्पतिवार हालत बिगड़ने लगी तो दोनों बेटियां उन्हें लेकर लाइफ लाइन हास्पिटल पहुंचीं।
विज्ञापन


वहां से उन्हें मेडिकल कालेज रेफर कर दिया गया। मेडिकल कालेज पहुंचने पर वहां डॉक्टर ने बेड न होने की बात कहते हुए वापस कर दिया। इसके बाद दोनों पिता व ताऊ को लेकर घर आ गईं। सीएमओ आदि कई अधिकारियों को फोन कर बेटियों ने इलाज की व्यवस्था करने की गुहार लगाई लेकिन कहीं सुनवाई नहीं हुई। रात में पहले बड़े भाई ने दम तोड़ दिया। इसकी जानकारी छोटे भाई को हुई तो डेढ़ दो घंटे बाद उनकी भी मौत हो गई। 

विज्ञापन
विज्ञापन

दोनों बेटियां व उनकी मां दरवाजे पर खड़े होकर मदद की गुहार लगाती रहीं लेकिन कोरोना के डर से कोई भी उनके घर नहीं पहुंचा। शवों को घाट तक पहुंचाने के लिए भी कोई तैयार नहीं था। बार-बार फोन करने पर स्वास्थ्य विभाग ने कुछ पीपीई किट व एंबुलेंस की व्यवस्था कराई। इसके बाद वाराणसी से आए मृतक के साले के पुत्र व साथ काम करने वाले दो लोगों ने मिल कर दोनों मृतकों के बॉडी को थ्री लेयर पॉलिथीन में पैक किया और फिर एंबुलेंस में लादकर शवों को राजघाट ले गए। वहां उनका अंतिम संस्कार किया गया।

उनकी मौत कोरोना से हुई इसकी पुष्टि नहीं हो पाई, दोनों ने जांच भी नहीं कराई थी। लक्षण के आधार पर ही उनकी मौत का कारण कोरोना माना जा रहा है। उनकी मौत के बाद सभासद विशाल श्रीवास्तव व मुहल्ले के अन्य लोगों के हो-हल्ला मचाने पर नगर पालिका की टीम से पूरे मुहल्ले के साथ ही मृतकों के घर में सैनिटाइजेशन कराया गया।

पत्नी व बेटियों की जांच को नहीं पहुंची टीम
आजमगढ़। स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही का आलम यह है कि एक ही परिवार में दो-दो लोगों की मौत के बाद भी स्वास्थ्य विभाग की टीम अब तक मृतकों के परिजनों की जांच को नहीं पहुंची है। सभासद विशाल श्रीवास्तव का कहना है कि सीएमओ साहब ने तो साफ-साफ कह दिया कि टीम खाली नहीं है। जबकि नियमानुसार परिवार के सदस्यों की जांच कराई जानी चाहिए। पिता व ताऊ की मौत के बाद दोनों बेटियों व उनकी मां का काफी बुरा हाल है।  

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed