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'इतिहास के बोध के बिना साहित्य सृजन पूरा नहीं'

Mon, 08 Feb 2016 12:05 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, आजमगढ़
ब्यूरो/अमर उजाला, आजमगढ़ Updated Mon, 08 Feb 2016 12:05 AM IST
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No creation without knowledge of literature and history
शिब्ली नेशनल इंटर कालेज में एक फरवरी से शुरु हुए पुस्तक मेला का देर शाम समापन हुआ। इस अवसर पर वन मंत्री दुर्गा प्रसाद यादव ने कहा कि मेले में एक सप्ताह के दौरान दस हजार लोगों की भागीदारी साहित्य के प्रति लोगों की ललक को प्रदर्शित करता है।
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उन्होंने विधायक निधि से एक लाख का सहयोग शिब्ली एकेडमी को देने का वादा किया। सपा जिलाध्यक्ष हवलदार यादव ने कहा कि किताबंे बुला रही हैं अभियान का नाम आजमगढ़ पुस्तक मेला है। इतिहासकार डाॅ. जावेद ने कहा कि इतिहास के बोध के बिना साहित्य सृजन नहीं किया जा सकता।
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विधायक आलम बदी ने कहा कि किताबंे सामाजिक जड़ता को तोड़ती हंै और सन्नाटे में भी उम्मीद पैदा करती हंै। अध्यक्षता करते हुए शिब्ली एकेडमी के निदेशक डाॅ. इश्तियाक अहमद जिल्ली ने कहा कि मां समाज की पहली शिक्षक है, मां शब्द नहीं संस्था है। मां सृजन का दूसरा नाम है।
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उन्होंने कहा कि पुस्तक मेले में बेटियों की बड़ी तादाद में उपस्थिति आजमगढ़ के सुखद भविष्य का आश्वासन है। मेले के समनव्यक राजीव रंजन ने कहा कि मेले में प्रतिदिन रचनात्मक कार्यशालाओं में पुरस्कृत बाल कहानीकार, बाल कवि, बाल चित्रकार, राहुल, कैफी और अल्लामा शिब्ली के सही अर्थो में वारिस हैं। मौलाना उमैर सिद्दीकी, पूर्व प्रधानाचार्य अबु मोहम्मद, साहित्यकार कन्हैया लाल, प्रधानाचार्य सुहैल अहमद आदि ने संबोधित किया।

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