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अवैध नियुक्ति में कार्रवाई न करना पड़ा भारी, नोटिस
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आजमगढ़। समाज कल्याण से संचालित हरिजन बाल विद्या मंदिर सैदपुर में अवैध नियुक्तियों के मामले में जांच रिपोर्ट मिलने के बाद भी रिकवरी और एफआईआर आदि की कार्रवाई न करना अधिकारियों को भारी पड़ गया। मुख्य विकास अधिकारी ने प्रकरण में जिला समाज कल्याण अधिकारी को नोटिस जारी करने के साथ ही समाज कल्याण अधिकारी विकास से स्पष्टीकरण मांगा है। शिकंजा कसने से मामले में जल्द ही कार्रवाई के आसार बनने लगे हैं।
हरिजन बाल विद्या मंदिर में अवैध प्रशिक्षण मुक्ति प्रमाण-पत्र से पांच शिक्षकों के नौकरी करने, दो शिक्षकों की अवैध नियुक्ति आदि की शिकायत हुई था। प्रकरण में जांच अधिकारियों की ओर से अपनी रिपोर्ट समाज कल्याण अधिकारी को सौंप दी गई थी। उक्त आरोप पुष्ट होने के साथ ही इस फ्राड में विद्यालय प्रबंधन के मिलीभगत की पुष्टी हुई थी। इसके बाद भी विभाग से इन लोगों पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। न ही वेतन की रिकवरी हुई और न ही विधिक कार्रवाई हुई। इस पर शिकायतकर्ता ने जिलाधिकारी एनपी सिंह से शिकायत कर प्रबंधन को भंग कर कंट्रोलर तैनात करने की मांग की थी। डीएम ने आरोपों की जांच के लिए सीडीओ आनंद कुमार शुक्ला को नामित किया था। सीडीओ ने परियोजना निदेशक डीआरडीए को इसकी जांच सौंपी थी। परियोजना निदेशक ने सीडीओ को सौंपी अपनी जांच में कहा कि अरोप पुष्ट होने और शासकीय अधिवक्ता से विधिक परामर्श नहीं लेने के बाद भी मामले में कोई कार्रवाई विभाग की ओर से नहीं की गई है। इससे नाराज जिलाधिकारी के निर्देश के क्रम में सीडीओ ने जिला समाज कल्याण अधिकारी राजेश कुमार यादव को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। साथ ही समाज कल्याण अधिकारी विकास से भी स्पष्टीकरण मांगा है। समाज कल्याण विभाग के अधिकारियों पर शिकंजा कसने से उक्त शिक्षकों पर भी कार्रवाई के आसार बनने लगे हैं। प्रकरण में हुई जांच में विद्यालयों के पांच शिक्षकों का प्रशिक्षण मुक्ति प्रमाण-पत्र फर्जी मिला था। इसमें कई रिटायर भी हो चुके हैं। वहीं, दो शिक्षकों की नियुक्ति गलत मिली थी।
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हरिजन बाल विद्या मंदिर में अवैध प्रशिक्षण मुक्ति प्रमाण-पत्र से पांच शिक्षकों के नौकरी करने, दो शिक्षकों की अवैध नियुक्ति आदि की शिकायत हुई था। प्रकरण में जांच अधिकारियों की ओर से अपनी रिपोर्ट समाज कल्याण अधिकारी को सौंप दी गई थी। उक्त आरोप पुष्ट होने के साथ ही इस फ्राड में विद्यालय प्रबंधन के मिलीभगत की पुष्टी हुई थी। इसके बाद भी विभाग से इन लोगों पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। न ही वेतन की रिकवरी हुई और न ही विधिक कार्रवाई हुई। इस पर शिकायतकर्ता ने जिलाधिकारी एनपी सिंह से शिकायत कर प्रबंधन को भंग कर कंट्रोलर तैनात करने की मांग की थी। डीएम ने आरोपों की जांच के लिए सीडीओ आनंद कुमार शुक्ला को नामित किया था। सीडीओ ने परियोजना निदेशक डीआरडीए को इसकी जांच सौंपी थी। परियोजना निदेशक ने सीडीओ को सौंपी अपनी जांच में कहा कि अरोप पुष्ट होने और शासकीय अधिवक्ता से विधिक परामर्श नहीं लेने के बाद भी मामले में कोई कार्रवाई विभाग की ओर से नहीं की गई है। इससे नाराज जिलाधिकारी के निर्देश के क्रम में सीडीओ ने जिला समाज कल्याण अधिकारी राजेश कुमार यादव को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। साथ ही समाज कल्याण अधिकारी विकास से भी स्पष्टीकरण मांगा है। समाज कल्याण विभाग के अधिकारियों पर शिकंजा कसने से उक्त शिक्षकों पर भी कार्रवाई के आसार बनने लगे हैं। प्रकरण में हुई जांच में विद्यालयों के पांच शिक्षकों का प्रशिक्षण मुक्ति प्रमाण-पत्र फर्जी मिला था। इसमें कई रिटायर भी हो चुके हैं। वहीं, दो शिक्षकों की नियुक्ति गलत मिली थी।
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