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खेल दिवसः आजमगढ़ के ओलंपियन तीरंदाज सत्यदेव ने मेहनत और लगन से पाया बड़ा मुकाम, 2018 में मिला ध्यानचंद पुरस्कार

Sun, 29 Aug 2021 08:31 AM IST
उत्पल कांत अमर उजाला नेटवर्क, आजमगढ़
अमर उजाला नेटवर्क, आजमगढ़ Published by: उत्पल कांत Updated Sun, 29 Aug 2021 08:31 AM IST
सार

सत्यदेव ने पहली बार 1994 में जूनियर राष्ट्रीय तीरंदाजी प्रतियोगिता में चैंपियन बने, 1998 में एशियन गेम्स में पदक प्राप्त किया।   एथेंस ओलंपिक 2004 में हिस्सा लेते हुए कुछ ही प्वाइंट के अंतर से कांस्य पदक पाने से चूके। 

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National Sports Day 2021 azamgarh Olympian Archer satyadev baranwal achieved many things with hard work and dedication received Dhyanchand Award in 2018
ओलंपियन तीरंदाज सत्यदेव राष्ट्रपति के साथ - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

ब्लैक पॉटरी के लिए मशहूर यूपी के आजमगढ़ जिले के निजामाबाद कस्बे के सत्यदेव बरनवाल ने तीरंदाजी की दुनिया में जो मुकाम हासिल किया है। उसका सपना हर खिलाड़ी देखता रहता है। 2004 के ओलंपियन सत्यदेव बरनवाल को लक्ष्मण पुरस्कार के साथ ही ध्यानचंद पुरस्कार से भी नवाजा जा चुका है।
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सत्यदेव के माता-पिता ने सत्यदेव को 11 वर्ष की आयु में मेरठ जिले के भोलझाल के समीप गुरुकुल आश्रम में वर्ष 1991 में अध्ययन के लिए भर्ती कराया। शिक्षा प्राप्त करते हुए लकड़ी के तीर-धनुष से वर्ष 1993 से आश्रम के संचालक स्वामी विवेकानंद सरस्वती की निगरानी में तीरंदाजी का प्रशिक्षण लेना शुरू कर दिया। अपनी मेहनत और लगन से सत्यदेव अपनी मंजिल की तरफ बढ़ने लगे।
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सत्यदेव ने राष्ट्रीय एवं अंतररष्ट्रीय तीरंदाजी प्रतिस्पर्धाओं में कई मेडल जीते। पहली बार 1994 में जूनियर राष्ट्रीय तीरंदाजी प्रतियोगिता में चैंपियन बने, 1998 में बैंकांक में एशियन गेम्स में पदक प्राप्त किया। पेरिस में 1999 में आयोजित तीरंदाजी विश्वकप में भाग लेकर उत्कृष्ट प्रदर्शन किए। एथेंस ओलंपिक 2004 में हिस्सा लेते हुए कुछ ही प्वाइंट के अंतर से कांस्य पदक पाने से चूके। 2005 में सत्यदेव को लक्ष्मण पुरस्कार मिला। इसके बाद 2018 में ध्यानचंद पुरस्कार से नवाजे गए।
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सत्यदेव बरनवाल अगर खेलों का विकास करना है, अपने बच्चों का भविष्य बनाना है और अपनी आने वाली नस्ल को बचाना है तो उसके लिए हमें (माता पिता ) अपनी सोच पहले बदलनी होगी। इंजीनियर बनाने के लिए सरकार क्या मदद देती है, डॉक्टर बनाने के लिए सरकार क्या देती है? लेकिन खेल में कुछ करना है तो सरकार से उम्मीद लगाते हैं।

हम खुद आगे नहीं आना चाहते। जब तक हम आगे नहीं आएंगे तब तक कुछ नहीं हो सकता है। सत्यदेव के कोच विवेक चिकारा ने कहा कि  सत्यदेव बहुत ही होनहार खिलाड़ी है। वह ऐसे अकेले खिलाड़ी हैं जिन्होंने पैरा एशियन चैंपियनशिप में गोल्ड जीता है। भारतीय ट्रायल में वर्ल्ड रिकार्ड तोड़ा है।  

आजमगढ़ः बैडमिंटन कोच नहीं, फिर भी पैदा हुए अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी

आजमगढ़ का एकमात्र सुखदेव पहलवान स्पोर्ट्स स्टेडियम अपनी एक अलग पहचान रखता है। इस स्टेडियम ने कई अंतर्राष्ट्रीय खिलाड़ियों को तराशा है। लेकिन कोरोना के कारण विगत दो सालों से कोच की तैनाती न होने से खिलाड़ी का भविष्य अधर में है। क्योंकि खिलाड़ियों को प्रशिक्षित करने वाला कोई नहीं है।

जनपद से निकलकर देश और विदेश में अपना और जनपद का नाम रोशन करने वाले खिलाड़ियों की पूरी फौज है। सुविधाओं के अभाव में भी यह खिलाड़ी सुखदेव पहलवान स्पोर्ट्स स्टेडियम में निखर कर सबको अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाते हैं। लेकिन आज अधिकारियों की उपेक्षा के कारण यह स्टेडियम उजड़ सा गया है। स्टेडियम की आउटफील्ड हल्की बारिश में ही तालाब में तब्दील हो जाती है।जिसके कारण फुटबाल, हॉकी, हैंडबाल, क्रिकेट आदि खेल नहीं हो पाते हैं।
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