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राष्ट्रीय लोक अदालत में 11602 वाद निस्तारित
ब्यूरो, अमर उजाला, आजमगढ़
Updated Sat, 11 Feb 2017 11:07 PM IST
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दीवानी न्यायालय के जस्टिस हाल में लोक अदालत का दीप प्रज्जवलित कर शुभारंभ करते उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति अनिल कुमार।
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दीवानी न्यायालय परिसर में शनिवार को द्वि मासिक राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया गया। इसमें सुलह-समझौते और आपसी स्वीकारोक्ति के आधार पर कुल 11602 वादों का निस्तारण किया गया। राष्ट्रीय लोक अदालत का उद्घाटन न्यायालय के हाल आफ जस्टिस में उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति अनिल कुमार ने मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण और दीप प्रज्ज्वलित कर किया। उन्होंने न्यायिक पीठासीन अधिकारियों से सुलह-समझौते के आधार पर अधिक से अधिक मुकदमों के निस्तारण किए जाने पर बल दिया। कहा कि इन लोक अदालतों का उद्देश्य कम समय में ज्यादा से ज्यादा मुकदमों का निस्तारण करना है। उन्होंने कहा कि उच्च न्यायालय मिडिएशन के द्वारा भी सुलह-समझौता कराने के लिए भी प्रयासरत है। जनपद न्यायाधीश राजेंद्र कुमार ने लोक अदालत की महत्ता पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि इस तरह की अदालतों से मुकदमे तो समाप्त होते ही है।
आपस में प्रेम और समरसता की भावना पैदा होती है, साथ ही वादकारी के अनावश्यक व्यय होने वाला धन बच जाता है। अन्य वक्ताओं में दीवानी न्यायालय अभिभाषक संघ के अध्यक्ष ओम प्रकाश मिश्र, यूनियन बैंक आफ इंडिया के डीजीएम शैलेश कुमार सिंह, काशी गोमती संयुत ग्रामीण बैंक के रिजनल मैनेजर अरविंद कुमार श्रीवास्तव ने भी विचार व्यक्त किया। इस दौरान जिला विधिक सेवा के सचिव चंद्रशेखर ने अब तक के आयोजित लोक अदालत में निस्तारित हुए मुकदमों के बारे में जानकारी दी। कार्यक्रम का संचालन अपर जिला जज यूपी सिंह ने किया।
अदालत के पीठासीन अधिकारी लक्ष्य के सापेक्ष मुकदमों के निस्तारण में जुट गए। लोक अदालत के माध्यम से निस्तारित हुए मुकदमों के संबंध में विधिक सेवा के सचिव चंद्रशेखर ने बताया कि आयोजित लोक अदालत में फौजदारी के 5696 वाद, मोटर दुर्घटना क्लेम वाद 52 निस्तारित हुए। जिसमें 1,93,21,286 रुपया दुर्घटना प्रतिकर दिए जाने का आदेश दिया गया।
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पारिवारिक वाद 243, जिसमें 36,82,000 रुपये पीड़ित महिलाओं को भरण पोषण भत्ता के रुप में दिए जाने का आदेश हुआ। श्रम वाद के 233, सर्विस मैटर के पांच, रेवेन्यू के 4459 वाद, दीवानी के 250 वाद एवं अन्य 264 वादों का निस्तारण किया गया। जिसमें कुल अर्थदंड की धनराशि 2,79,970 रुपये वसूल किए गए। इसी क्रम में बैंकों से संबंधित प्री लिटिगेशन के 232 मुकदमों का सुलह-समझौते के अनुसार एक करोड आठ लाख रुपये का समझौता हुआ। इस दौरान जनपद न्यायाधीश राजेंद्र कुमार, पारिवारिक न्यायाधीश अनिल कुमार, अपर जिला जज शकीलुर्रहमान, यूपी सिंह, मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट संजीव कुमार सिंह, वरिष्ठ सिविल जज अगस्त कुमार तिवारी, एसीजेएम अशद अहमद आजमी, एसीजेएम कोर्ट नंबर 12 अवधेश कुमार सिंह समेत विभिन्न कोर्ट के न्यायाधीश कार्यरत रहे।
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आपस में प्रेम और समरसता की भावना पैदा होती है, साथ ही वादकारी के अनावश्यक व्यय होने वाला धन बच जाता है। अन्य वक्ताओं में दीवानी न्यायालय अभिभाषक संघ के अध्यक्ष ओम प्रकाश मिश्र, यूनियन बैंक आफ इंडिया के डीजीएम शैलेश कुमार सिंह, काशी गोमती संयुत ग्रामीण बैंक के रिजनल मैनेजर अरविंद कुमार श्रीवास्तव ने भी विचार व्यक्त किया। इस दौरान जिला विधिक सेवा के सचिव चंद्रशेखर ने अब तक के आयोजित लोक अदालत में निस्तारित हुए मुकदमों के बारे में जानकारी दी। कार्यक्रम का संचालन अपर जिला जज यूपी सिंह ने किया।
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अदालत के पीठासीन अधिकारी लक्ष्य के सापेक्ष मुकदमों के निस्तारण में जुट गए। लोक अदालत के माध्यम से निस्तारित हुए मुकदमों के संबंध में विधिक सेवा के सचिव चंद्रशेखर ने बताया कि आयोजित लोक अदालत में फौजदारी के 5696 वाद, मोटर दुर्घटना क्लेम वाद 52 निस्तारित हुए। जिसमें 1,93,21,286 रुपया दुर्घटना प्रतिकर दिए जाने का आदेश दिया गया।
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पारिवारिक वाद 243, जिसमें 36,82,000 रुपये पीड़ित महिलाओं को भरण पोषण भत्ता के रुप में दिए जाने का आदेश हुआ। श्रम वाद के 233, सर्विस मैटर के पांच, रेवेन्यू के 4459 वाद, दीवानी के 250 वाद एवं अन्य 264 वादों का निस्तारण किया गया। जिसमें कुल अर्थदंड की धनराशि 2,79,970 रुपये वसूल किए गए। इसी क्रम में बैंकों से संबंधित प्री लिटिगेशन के 232 मुकदमों का सुलह-समझौते के अनुसार एक करोड आठ लाख रुपये का समझौता हुआ। इस दौरान जनपद न्यायाधीश राजेंद्र कुमार, पारिवारिक न्यायाधीश अनिल कुमार, अपर जिला जज शकीलुर्रहमान, यूपी सिंह, मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट संजीव कुमार सिंह, वरिष्ठ सिविल जज अगस्त कुमार तिवारी, एसीजेएम अशद अहमद आजमी, एसीजेएम कोर्ट नंबर 12 अवधेश कुमार सिंह समेत विभिन्न कोर्ट के न्यायाधीश कार्यरत रहे।