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14 साल बाद बिटिया को देख छलक पड़ीं आंखें

Thu, 04 Feb 2016 11:36 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, आजमगढ़
ब्यूरो/अमर उजाला, आजमगढ़ Updated Thu, 04 Feb 2016 11:36 PM IST
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My daughter had to spill 14 years later Eyes
जिस बेटी के घर आने की उम्मीद मां-बाप छोड़ चुके थे, जब उसने चौदह साल बाद बात की तो घरवालों को सहसा विश्वास ही नहीं हुआ। गला रूंध गया, आंखें भर आईं। मामला दीदारगंज थाना क्षेत्र के आदम मऊ गांव का है। मां की मार के डर से सात साल की उम्र में घर से भागी अंजू कोलकाता में रह रही थी।
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अंजू को घर की याद आती थी, लेकिन गांव और पोस्ट के अलावा उसे कुछ पता नहीं था। लेकिन इंटरनेट के जरिए इन्हीं दो जगहाें के नामों से घर का पता चला। पुलिस की मदद से उसने अपनों से बात की और घरवाले उसे पहली फरवरी को कोलकाता से ले आए।
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अंजू आदम मऊ गांव के जयराम चौहान की पुत्री है। 2002 में वह घरवालों को बताए बिना मुबारकपुर थानाक्षेत्र के चिवटही गांव स्थित नाना के घर चली गई। अंजू के ननिहाल वाले भी हैरान रह गए। घरवालों को इस बात की सूचना दी। इस पर उसकी मां मनौता चौहान उसे लेने के लिए घर से निकली। इसकी जानकारी जब अंजू को हुई तो वह भयभीत हो गई कि उसकी मां पिटाई करेगी।
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अंजू बिना किसी को बताए सठियांव रेलवे स्टेशन पर पहुंची और वहां किसी ट्रेन में बैठ गई। अंजू के अनुसार वह कोलकाता में थी। स्टेशन के बाहर निकलने पर अनजान स्थान पर वह रोने लगी। यह देख एक पान के दूकानदार ने उसे पास बैठा लिया। दूकानदार ओडिसा का रहने वाला था। उसका घर कोलकाता में ही है।


वह बच्ची को अपने घर ले गया। तीन माह तक रखकर उसके घर का पता किया। सफलता न मिलने पर उसने अंजू को सनलैप स्नेहा सेंटर हाउस नामक अनाथालय को सुपुर्द कर दिया। अनाथालय में पली-बढ़ी अंजू को शिक्षा भी मिली। वह सीता कुंड विध्याटन विद्यालय से हाईस्कूल की पढ़ाई भी कर रही है। अंजू ने बताया उसे हमेशा घर की याद आती रहती थी। इस दौरान उसने एक साइबर कैफे में अपने गांव तथा पोस्ट आफिस का नाम बताया।


थाना तथा जिला नहीं बता पा रही थी। इंटरनेट के माध्यम से थाना, जिला और प्रदेश का पता चला। इस पर अंजू ने दीदारगंज थाने के नंबर पर थानाध्यक्ष राजेश सिंह से बात की। थाने के सिपाही सुदर्शन पाल तथा देवी प्रसाद मिश्र आदम मऊ पहुंचे और घरवालों से बात की तो पता चला कि अंजू खोई हुई है।



पुलिसवालों ने बताया कि अंजू कोलकाता में है और बात करना चाहती है। इस पर एसओ राजेश सिंह ने परिवारवालों से अंजू की बात कराई। इसके बाद माता-पिता अंजू को लेने कोलकाता गए। पहली फरवरी को बेटी को लेकर घर लौटे। अंजू से मिलने के लिए परिवार, गांव के साथ रिश्तेदारों का हुजूम उमड़ पड़ा था। अंजू चार भाई बहनों में तीसरे नंबर पर है। बड़ी बहन मंजू की शादी हो चुकी है। अंजू से बड़े और छोटे भाई क्रमश: रंजीत तथा अमरजीत हैं।
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