{"_id":"f9058cfee18519460d9fa8769d0b825d","slug":"mustafa-advice-in-jalsa-pagame-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"जलसा पैगामे मुस्तफा में नसीहत ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
जलसा पैगामे मुस्तफा में नसीहत
ब्यूरो/अमर उजाला, आजमगढ़
Updated Wed, 28 Oct 2015 01:09 AM IST
विज्ञापन
मदरसा गरीब नवाज कादरिया, मदियापार में सालाना जलसा पैगामे मुस्तफा का आयोजन किया गया। जिसमें उलेमा ने मुसलमानों से नमाज न छोड़ने की नसीहत की। कहा कि यह सबसे बड़ा गुनाह है।
सोमवार की देर रात हुए जलसे का आगाज हाफिज कारी मोहम्मद नाजिम ने तिलावते कलामे पाक से किया। मौलाना मेराज आलम मिसबाही ने रसूल के बताए हुए रास्ते पर चलने की नसीहत दी।
कहा कि ईमाम हुसैन ने अपना सिर कटाकर इस्लाम को बचाया लेकिन जालिम यजीद की गुलामी को कबूल नहीं किया। मौलाना शाह शकील अहमद ने कहा कि सभी इबादतों से बेहतर इबादत नमाज है।
विज्ञापन
नमाज पढऩे से हुजूर की आंखों को ठंडक मिलती है। कहा कि हर मुसलमान को चाहिए कि आजान की आवाज सुन कर नमाज पढऩे के लिए मस्जिद की तरफ चल पड़े। नमाज छोडऩा बहुत बड़ा गुनाह है।
मौलाना अब्दुल बारी ने कहा कि इल्मेदीन इस्लाम का खंभा है। इस लिए इसे कायम रखना हर मुसलमान मर्द, औरत का हक होता है।
नातिया शायर आलमगीर ने अपने कलाम के जरिए कर्बला के शहीदों का बयान किया। ताबिस कोयलसवी ने हुसैन द्वारा यजीद को कर्बला में शिकस्त देने के मंजर का बयान किया।
मदरसे के प्रधानाध्यापक मौलाना रियाज अहमद ने शुक्रिया अदा किया। सदारत मौलाना शाह शकील अहमद बरकाती और निजामत मौलाना मोहम्मद शरीफुलहक सुबहानी ने की।
जलसे में मौलाना अब्दुलबारी, मौलाना फखरे आलम मिसबाही, मौलाना शराफत अली, मास्टर नियाज अहमद, मुनीम अहमद, मास्टर अंसार आदि मौजूद रहे।
विज्ञापन
सोमवार की देर रात हुए जलसे का आगाज हाफिज कारी मोहम्मद नाजिम ने तिलावते कलामे पाक से किया। मौलाना मेराज आलम मिसबाही ने रसूल के बताए हुए रास्ते पर चलने की नसीहत दी।
विज्ञापन
कहा कि ईमाम हुसैन ने अपना सिर कटाकर इस्लाम को बचाया लेकिन जालिम यजीद की गुलामी को कबूल नहीं किया। मौलाना शाह शकील अहमद ने कहा कि सभी इबादतों से बेहतर इबादत नमाज है।
विज्ञापन
नमाज पढऩे से हुजूर की आंखों को ठंडक मिलती है। कहा कि हर मुसलमान को चाहिए कि आजान की आवाज सुन कर नमाज पढऩे के लिए मस्जिद की तरफ चल पड़े। नमाज छोडऩा बहुत बड़ा गुनाह है।
मौलाना अब्दुल बारी ने कहा कि इल्मेदीन इस्लाम का खंभा है। इस लिए इसे कायम रखना हर मुसलमान मर्द, औरत का हक होता है।
नातिया शायर आलमगीर ने अपने कलाम के जरिए कर्बला के शहीदों का बयान किया। ताबिस कोयलसवी ने हुसैन द्वारा यजीद को कर्बला में शिकस्त देने के मंजर का बयान किया।
मदरसे के प्रधानाध्यापक मौलाना रियाज अहमद ने शुक्रिया अदा किया। सदारत मौलाना शाह शकील अहमद बरकाती और निजामत मौलाना मोहम्मद शरीफुलहक सुबहानी ने की।
जलसे में मौलाना अब्दुलबारी, मौलाना फखरे आलम मिसबाही, मौलाना शराफत अली, मास्टर नियाज अहमद, मुनीम अहमद, मास्टर अंसार आदि मौजूद रहे।