{"_id":"60806a8c8ebc3ec197028288","slug":"mother-siddhidatri-worshiped-on-navami-azamgarh-news-vns5861466133","type":"story","status":"publish","title_hn":"नवमी पर हुई मां सिद्धिदात्री की पूजा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
नवमी पर हुई मां सिद्धिदात्री की पूजा
विज्ञापन
पुरानी सब्जी-चौक मार्ग पर स्थित शीतला माता मंदिर में पूजन अर्चन करते श्रद्धालु।
- फोटो : AZAMGARH
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
आजमगढ़। नवरात्र के अंतिम दिन बुधवार को भी मंदिरों में श्रद्धालुओं की भीड़ जुटी। अंतिम दिन बुधवार को मां सिद्धिदात्री की पूजा-अर्चना की गई। इस दौरान धूप, अगियारी व जयकारे से मां के मंदिर गूंजते रहे। अष्टमी का व्रत रखने वाली महिलाओं और पुरुषों ने घर में पूजा पाठ के बाद मंदिरों में पहुंच मां के दर्शन किए। उधर, चौक स्थित देवी मंदिर में सुबह पांच बजे से ही श्रद्धालुओं का रेला उमड़ा तो शाम तक भीड़ लगी रही।
देवी भगवती का नौवां स्वरूप सिद्धिदात्री का है। मार्कंडेय पुराण के अनुसार आठ प्रकर की सिद्धियां कही गई हैं। जिस साधक ने इनको प्राप्त कर लिया, वह सुख समृद्धि का प्रतीक हो गया। अर्थ पाना कठिन नहीं है, अर्थ को सिद्ध करना बड़ा अर्थ रखता है। यह महालक्ष्मी जी का ही स्वरूप है। इनकी आराधना के साथ ही नवरात्र व्रत का परायण होता है। सिद्धिदात्री देवी पूजन के साथ कन्या भोग और यज्ञ का विशेष फल मिलता है। नवमी पर चौक स्थित दक्षिणमुखी देवी मंदिर पर पूजन-अर्चन करने वाले श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। दिन निकलते-निकलते पूरा मंदिर परिसर श्रद्धालुओं से भर गया। धूप, अगियारी व अगरबत्ती जलाकर लोगों ने मां की पूजा-अर्चना की तथा मत्था टेका। इसके अलावा निजामाबाद के मां शीतला धाम और पल्हना धाम स्थित मां पाल्हमेश्वरी देवी पर सुबह से ही हलुआ पूड़ी चढ़ाने का क्रम शुरू हुआ तो दिनभर चलता रहा।
आधी रात के बाद कलश स्थापित कर की बसियौरा पूजा
आजमगढ़। सर्व मंगल की कामना लिए महिलाओं ने रात भर जागकर पकवान बनाए और आधी रात के बाद कलश स्थापना के साथ बसियौरा पूजन किया। पुष्प माला के साथ नए अन्न से बने पकवान और चुनरी चढ़ाकर देवी मां से परिवार के मंगलमय जीवन की कामना की। बुधवार को दिन निकलने के साथ घर के बाहर महिलाओं ने बाट पूजन किया और उसके बाद देवी मंदिरों में पहुंचकर मां के पकवान चढ़ाए और शीश झुकाकर मन्नतें मांगीं। शहर के मुख्य चौक स्थित दक्षिणमुखी देवी, गौरीशंकर घाट स्थित शीतला माता मंदिर, निजामाबाद स्थित शीतला धाम, पल्हना स्थित पाल्हमेश्वरी धाम, टाड़ी स्थित परमज्योति, बड़ादेव स्थित दुर्गा मंदिर, कोलघाट स्थित दुर्गा, शिव, राधे-कृष्ण और साईं मंदिर, रैदोपुर स्थित काली मंदिर सहित जिले के कई देवी मंदिरों में भक्तों का सैलाब उमड़ पड़ा। भक्तों ने देवी मां को चुनरी, नारियल आदि चढ़ाया। घंटा-घड़ियाल की ध्वनि से पूरा क्षेत्र भक्तिमय हो गया था।
विज्ञापन
इनसेट...............
दुर्गा स्वरूप कन्याओं को कराया भोजन
आजमगढ़। बालक भगवान का रूप होते हैं, तो छोटी बच्चियों को देवी का रूप माना जाता है। पहले से चली आ रही परंपरा को नवरात्र के अंतिम दिन लोगों ने निभाया। श्रीरामनवमी को कई स्थानों पर दुर्गा स्वरूप कुंवारी कन्याओं को आमंत्रित किया गया। एक साथ बैठाकर सभी कन्याओं के माथे पर तिलक लगाने के बाद भोजन परोसा गया। अंबारी प्रतिनिधि के अनुसार नवरात्रि के अंतिम शक्ति स्वरूपा कन्या का पूजन करके भोजन कराया गया। फूलपुर के माहुल नगर सहित अंबारी, खंजहापुर, पलिया, पल्थी, दीदारगंज, पुष्पनगर आदि इलाकों में शक्ति स्वरूपा मां दुर्गा का पूजन-अर्चन एवं हवन किया गया। श्रद्धालु ने नौ कन्याओं का विधिवत पूजन करके भोजन कराया। माहुल नगर पंचायत के शिवाजी मेन चैक पर हवन-पूजन के साथ कन्याओं को भोजन कराया गया। भोजन के बाद लोगों ने बच्चियों की आरती उतारी। फिर सामर्थ्य के अनुसार नगदी, वस्त्र और अन्य उपहार के साथ विदा किया।
विज्ञापन
देवी भगवती का नौवां स्वरूप सिद्धिदात्री का है। मार्कंडेय पुराण के अनुसार आठ प्रकर की सिद्धियां कही गई हैं। जिस साधक ने इनको प्राप्त कर लिया, वह सुख समृद्धि का प्रतीक हो गया। अर्थ पाना कठिन नहीं है, अर्थ को सिद्ध करना बड़ा अर्थ रखता है। यह महालक्ष्मी जी का ही स्वरूप है। इनकी आराधना के साथ ही नवरात्र व्रत का परायण होता है। सिद्धिदात्री देवी पूजन के साथ कन्या भोग और यज्ञ का विशेष फल मिलता है। नवमी पर चौक स्थित दक्षिणमुखी देवी मंदिर पर पूजन-अर्चन करने वाले श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। दिन निकलते-निकलते पूरा मंदिर परिसर श्रद्धालुओं से भर गया। धूप, अगियारी व अगरबत्ती जलाकर लोगों ने मां की पूजा-अर्चना की तथा मत्था टेका। इसके अलावा निजामाबाद के मां शीतला धाम और पल्हना धाम स्थित मां पाल्हमेश्वरी देवी पर सुबह से ही हलुआ पूड़ी चढ़ाने का क्रम शुरू हुआ तो दिनभर चलता रहा।
विज्ञापन
आधी रात के बाद कलश स्थापित कर की बसियौरा पूजा
आजमगढ़। सर्व मंगल की कामना लिए महिलाओं ने रात भर जागकर पकवान बनाए और आधी रात के बाद कलश स्थापना के साथ बसियौरा पूजन किया। पुष्प माला के साथ नए अन्न से बने पकवान और चुनरी चढ़ाकर देवी मां से परिवार के मंगलमय जीवन की कामना की। बुधवार को दिन निकलने के साथ घर के बाहर महिलाओं ने बाट पूजन किया और उसके बाद देवी मंदिरों में पहुंचकर मां के पकवान चढ़ाए और शीश झुकाकर मन्नतें मांगीं। शहर के मुख्य चौक स्थित दक्षिणमुखी देवी, गौरीशंकर घाट स्थित शीतला माता मंदिर, निजामाबाद स्थित शीतला धाम, पल्हना स्थित पाल्हमेश्वरी धाम, टाड़ी स्थित परमज्योति, बड़ादेव स्थित दुर्गा मंदिर, कोलघाट स्थित दुर्गा, शिव, राधे-कृष्ण और साईं मंदिर, रैदोपुर स्थित काली मंदिर सहित जिले के कई देवी मंदिरों में भक्तों का सैलाब उमड़ पड़ा। भक्तों ने देवी मां को चुनरी, नारियल आदि चढ़ाया। घंटा-घड़ियाल की ध्वनि से पूरा क्षेत्र भक्तिमय हो गया था।
विज्ञापन
इनसेट...............
दुर्गा स्वरूप कन्याओं को कराया भोजन
आजमगढ़। बालक भगवान का रूप होते हैं, तो छोटी बच्चियों को देवी का रूप माना जाता है। पहले से चली आ रही परंपरा को नवरात्र के अंतिम दिन लोगों ने निभाया। श्रीरामनवमी को कई स्थानों पर दुर्गा स्वरूप कुंवारी कन्याओं को आमंत्रित किया गया। एक साथ बैठाकर सभी कन्याओं के माथे पर तिलक लगाने के बाद भोजन परोसा गया। अंबारी प्रतिनिधि के अनुसार नवरात्रि के अंतिम शक्ति स्वरूपा कन्या का पूजन करके भोजन कराया गया। फूलपुर के माहुल नगर सहित अंबारी, खंजहापुर, पलिया, पल्थी, दीदारगंज, पुष्पनगर आदि इलाकों में शक्ति स्वरूपा मां दुर्गा का पूजन-अर्चन एवं हवन किया गया। श्रद्धालु ने नौ कन्याओं का विधिवत पूजन करके भोजन कराया। माहुल नगर पंचायत के शिवाजी मेन चैक पर हवन-पूजन के साथ कन्याओं को भोजन कराया गया। भोजन के बाद लोगों ने बच्चियों की आरती उतारी। फिर सामर्थ्य के अनुसार नगदी, वस्त्र और अन्य उपहार के साथ विदा किया।