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निजी भवनों में संचालित हो रहे दर्जन भर से अधिक विभाग

Wed, 15 Jun 2022 11:24 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Wed, 15 Jun 2022 11:24 PM IST
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More than a dozen departments operating in private buildings
आजमगढ़। जिले में दर्जन भर से अधिक सरकारी विभाग ऐसे हैं जिनको आज तक अपना खुद का भवन नसीब नहीं हो पाया है। आज भी वह निजी भवनों में संचालित हो रहे हैं और प्रतिवर्ष लाखों रुपये किराया दे रहे हैं। कई विभाग तो गली मुहल्लों में ऐसी जगहों पर संचालित हो रहे हैं जहां न अधिकारी का वाहन पहुंच सकता और न ही वहां पर कर्मचारियों व आमजन के बाइकों के खड़ा करने का स्थान है। इन विभाग के अधिकारियों की मानें तो वह कई बार कार्यालय के लिए जिला प्रशासन से सरकारी भवन की मांग कर चुके हैं लेकिन सरकारी भवन उपलब्ध नहीं हो सका। जिसके कारण इन कार्यालयों में आने वाले लोगों को कार्यालय को खोजने में काफी परेशानी होती है। जनपद में क्षेत्रीय आयुर्वेदिक एवं युनानी अधिकारी, जिला उद्यान अधिकारी, चकबंदी कार्यालय, जिला समाज कल्याण अधिकारी व जिला पिछड़ा वर्ग कल्याण अधिकारी का कार्यायल जिला पंचायत के भवन में चल रहा है। इसके अलावा ग्रामीण विकास बैक लिमिटेड, उप निदेशक उद्यान का कार्यालय पीसीएफ के भवन में संचालित हो रहा है। जल निगम का दोनों कार्यालय, जिला अल्पसंख्यक अधिकारी, एडी वेसिक, जेडी कार्यालय, उप श्रमायुक्त कार्यालय, गन्ना विकास कार्यालय व मत्स्य विभाग का कार्यालय निजी भवनों में संचालित हो रहे हैं। इसके अलावा जिला आपूर्ति कार्यालय, जिला खाद्य विपणन अधिकारी, बांट माप कार्यालय, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड व विद्युत विभाग के कई कार्यालय निजी भवनों में संचालित किए जा रहे है। इन कार्यालयों के निजी भवनों में संचालित होने से आमजन को खोजने में काफी परेशानी होती है क्योंकि एग्रीमेंट पूरा होने पर यह कार्यालय फिर दूसरे स्थानों पर निजी भवनों में शिफ्ट हो जाते हैं। फिर आमजन को खोजने में काफी परेशानी होती है। निजी भवनों में संचालित हो रहे कई विभागों में पाकिंग की व्यवस्था ही नहीं है। जिसके कारण अधिकारी के वाहन वहां खड़े नहीं हो पाते। एडी बेसिक और जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी का कार्यालय संकरी गली में है। अधिकारियों को सड़क पर उतर कर पैदल अपने कार्यालय तक जाना पड़ता है। निजी भवनों में संचालित हो रहे इन विभागों के कर्मचारियों को भी कार्य करने में परेशानी होती है क्योंकि मानक के अनुसार इनको जगह नहीं मिल पाता है। निजी भवनों में संचालित हो रहे यह विभाग प्रतिवर्ष लाखों रूपए किराया देते हैं। विभाग में तैनात कर्मचारियों की माने तो जब-जब एग्रीमेंट का समय पूरा होता है तो जिला प्रशासन से किराए के झाम से बचने के लिए सरकारी भवन की मांग की जाती है लेकिन जगह खाली न होने से भवन नहीं मिल पाता है।
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