आजमगढ़। शहर में तेजी से बढ़ती आबादी और 50 से अधिक तंग गलियां आगजनी की घटनाओं के लिहाज से गंभीर खतरे का संकेत दे रही हैं। हालात यह हैं कि तंग गलियों में आग पर काबू पाने के लिए अग्निशमन विभाग के पास केवल दो फायर बुलेट हैं, जो जरूरत के मुकाबले बेहद अपर्याप्त मानी जा रही हैं। यदि एक साथ दो या उससे अधिक स्थानों पर आग लग जाए तो हालात पर काबू पाना विभाग के लिए मुश्किल हो सकता है। नगर पालिका आजमगढ़ की आबादी तीन लाख से अधिक है। कुल 25 वर्ड हैं। इन वार्डों में 50 से अधिक तंग गलियां हैं जहां पर चार पहिया तो दूर बाइक से भी चलना दूभर है। कुछ ऐसी भी गलियां हैं जहां पर बाइक भी नहीं जा पाती है। यहां की आबादी भी घनी है। इनकी सुरक्षा के लिए अग्निशमन विभाग के पास सिर्फ सात बड़ी गाड़ियां, पांच छोटी हाईप्रेशर और एक फायर क्विक रिस्पांस व्हीकल (क्यूआरवी) है। वहीं तंग गलियों में आग से निपटने के लिए मात्र दो फायर बुलेट हैं। ऐसे में यदि एक साथ दो या दो से अधिक स्थानों पर एक साथ आग लग जाए तो विभाग कुछ नहीं कर पाएगा। शहर के तकिया, चौक, पुरानी कोतवाली, मुकेरीगंज, सिधारी, कोटकिला, दलालघाट सहित अन्य घनी आबादी वाले इलाकों में दर्जनों संकरी गलियां हैं, जहां दमकल की बड़ी गाड़ियों का पहुंच पाना भी मुश्किल होता है। यदि इन इलाकों में किसी मकान या दुकान में आग लग जाए तो हालात तेजी से बेकाबू हो सकते हैं और भारी नुकसान की आशंका बनी रहती है। शहर के रहने वाले ओम अग्रवाल ने कहा कि पुराने और घनी आबादी वाले शहरों में मुख्य सड़कों और प्रमुख गलियों में फायर हाइड्रेंट लगाना अनिवार्य सुरक्षा व्यवस्था का हिस्सा होता है।
इससे आग लगने की स्थिति में दमकल कर्मी नजदीकी पाइपलाइन से सीधे पानी लेकर तुरंत राहत और बचाव कार्य शुरू कर सकते हैं। लेकिन आजमगढ़ शहर में इस दिशा में अब तक कोई ठोस पहल नहीं हो सकी है।

शहर के गुरुटोला मोहल्ला की गली।- फोटो : samvad

शहर के गुरुटोला मोहल्ला की गली।- फोटो : samvad