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Azamgarh News: जिले में 200 से ज्यादा कोचिंग सेंटर संचालित हो रहे, पंजीयन सिर्फ 70 का
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आजमगढ़। जिले के हर गली-मोहलले में बिना रजिस्ट्रेशन के धड़ल्ले से कोचिंग सेंटर संचालित हो रहे हैं। विभाग इन पर रोक लगाने के लिए गंभीर नहीं है। जिले में मात्र 70 कोचिंग सेंटर का ही डीआईओएस कार्यालय में पंजीकरण है। जबकि शहर से लेकर गांव तक 200 से अधिक कोचिंग सेंटर चल रहे हैं। वह भी बिना मानक के हैं। वहीं जिनका पंजीयन है उनमें कई बेसमेंट में संचालित रहे हैं।
कोचिंग संचालन के लिए शासन ने मानक तय किए हुए हैं। इसमें उनका पंजीकरण भी जरूरी है। इसके अलावा अग्निशमन विभाग से एनओसी, कोचिंग सेंटर पर अग्निशमन यंत्र, कुशल शिक्षक, बैठने की उचित व्यवस्था, शौचालय, पीने का पानी, बिजली, पंखा, लाइट, पार्किंग स्थल, फीस निर्धारण और उचित साफ-सफाई मानकों में शामिल है।
जिले में संचालित कोचिंग सेंटर की जांच के लिए न तो अग्निशमन विभाग के पास फुर्सत है और न ही डीआईओएस के पास। लिहाजा शहर से लेकर गांव तक हर तिराहे और चाराहों व बाजारों में कोचिंग सेंटर चल हैं। लेकिन पूरे जनपद में मात्र 70 कोचिंग सेंटर का ही डीआईओएस कार्यालय में पंजीकरण है। बाकी अवैध रूप से चल रहे हैं। वहीं, शहर के रैदोपुर, ब्रह्मस्थान व करतालपुर सहित अन्य जगहों पर बेसमेंट में ही कोचिंग का संचालन किया जा रहा है। ऐसे में यहां कभी भी हादसा हो सकता है।
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500 से एक हजार तक वसूले जा रहे रुपये : गणित, साइंस व अन्य महत्वपूर्ण विषयों को पढ़ाने के लिए संचालक 500 से एक हजार रुपये वसूल रहे हैं। शिक्षा विभाग के अधिकारी इस ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं। मनमाने तरीके से वसूली किए जाने के सवाल पर संचालक कोई भी बोलने से इन्कार कर रहे हैं।
कोचिंग खोलने के लिए ये मानक अनिवार्य :
- कोचिंग में उतने ही बच्चों को बैठाया जाए जितनी सीटें हों।
- हर कमरे में दो दरवाजे होने चाहिए और सीसीटीवी कैमरा।
- पार्किंग की सुचारु व्यवस्था होनी चाहिए।
- कोचिंग में लड़के एवं लड़कियों के लिए अलग वॉश रूम हो।
- इमरजेंसी अलार्म का होना जरूरी है।
- कोचिंग क्लास बेसमेंट में है तो वहां भी दो दरवाजे होने जरूरी हैं।
अभियान चलाकर कोचिंग सेंटर की जांच की जाएगी। जो बिना पंजीकरण होगा, उसके खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाएगी। विभाग में 70 से अधिक कोचिंग सेंटर का पंजीकरण हैं। - उपेंद्र कुमार, डीआईओएस।
बेसमेंट में कोचिंग का संचालन करना गलत है। जब हम जांच के लिए जाते हैं तो ताला बंद कर कोचिंग संचालक फरार होते हैं। ज्यादातर लोग बिना एनओसी के ही कोचिंग के संचालन कर रहे हैं। इनके खिलाफ कार्रवाई करने के लिए अभियान चलाया जाएगा।- बनारसी दास चौहान, प्रभारी मुख्य अग्निशमन अधिकारी।
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कोचिंग संचालन के लिए शासन ने मानक तय किए हुए हैं। इसमें उनका पंजीकरण भी जरूरी है। इसके अलावा अग्निशमन विभाग से एनओसी, कोचिंग सेंटर पर अग्निशमन यंत्र, कुशल शिक्षक, बैठने की उचित व्यवस्था, शौचालय, पीने का पानी, बिजली, पंखा, लाइट, पार्किंग स्थल, फीस निर्धारण और उचित साफ-सफाई मानकों में शामिल है।
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जिले में संचालित कोचिंग सेंटर की जांच के लिए न तो अग्निशमन विभाग के पास फुर्सत है और न ही डीआईओएस के पास। लिहाजा शहर से लेकर गांव तक हर तिराहे और चाराहों व बाजारों में कोचिंग सेंटर चल हैं। लेकिन पूरे जनपद में मात्र 70 कोचिंग सेंटर का ही डीआईओएस कार्यालय में पंजीकरण है। बाकी अवैध रूप से चल रहे हैं। वहीं, शहर के रैदोपुर, ब्रह्मस्थान व करतालपुर सहित अन्य जगहों पर बेसमेंट में ही कोचिंग का संचालन किया जा रहा है। ऐसे में यहां कभी भी हादसा हो सकता है।
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500 से एक हजार तक वसूले जा रहे रुपये : गणित, साइंस व अन्य महत्वपूर्ण विषयों को पढ़ाने के लिए संचालक 500 से एक हजार रुपये वसूल रहे हैं। शिक्षा विभाग के अधिकारी इस ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं। मनमाने तरीके से वसूली किए जाने के सवाल पर संचालक कोई भी बोलने से इन्कार कर रहे हैं।
कोचिंग खोलने के लिए ये मानक अनिवार्य :
- कोचिंग में उतने ही बच्चों को बैठाया जाए जितनी सीटें हों।
- हर कमरे में दो दरवाजे होने चाहिए और सीसीटीवी कैमरा।
- पार्किंग की सुचारु व्यवस्था होनी चाहिए।
- कोचिंग में लड़के एवं लड़कियों के लिए अलग वॉश रूम हो।
- इमरजेंसी अलार्म का होना जरूरी है।
- कोचिंग क्लास बेसमेंट में है तो वहां भी दो दरवाजे होने जरूरी हैं।
अभियान चलाकर कोचिंग सेंटर की जांच की जाएगी। जो बिना पंजीकरण होगा, उसके खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाएगी। विभाग में 70 से अधिक कोचिंग सेंटर का पंजीकरण हैं। - उपेंद्र कुमार, डीआईओएस।
बेसमेंट में कोचिंग का संचालन करना गलत है। जब हम जांच के लिए जाते हैं तो ताला बंद कर कोचिंग संचालक फरार होते हैं। ज्यादातर लोग बिना एनओसी के ही कोचिंग के संचालन कर रहे हैं। इनके खिलाफ कार्रवाई करने के लिए अभियान चलाया जाएगा।- बनारसी दास चौहान, प्रभारी मुख्य अग्निशमन अधिकारी।