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तीन करोड़ मुआवजे के लिए राजस्व रिकार्ड से गायब किया नाम

Tue, 27 Mar 2018 11:20 PM IST
ब्यूरो,अमर उजाला,आजमगढ़
ब्यूरो,अमर उजाला,आजमगढ़ Updated Tue, 27 Mar 2018 11:20 PM IST
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Missing name of revenue recorded for the million compensation
revenue
संदीप सौरभ सिंह
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तीन करोड़ के मुआवजे के लिए सगे पट्टीदारों ने अपने ही भाई को राजस्व अभिलेखों में मृतक साबित कर दिया। खुद को असली वारिस बताकर मुआवजा हड़पने की कोशिश की गई। वो तो कुछ जागरूक लोगों ने मामला अधिकारियों को अवगत कराया। इसके बाद जिलाधिकारी के सामने जमीन का मालिक भी उपस्थित हो गया।  मामला संज्ञान में आने पर सीआरओ ने तत्काल मुआवजा जारी करने की प्रक्रिया रोक दी।

मामला लालगंज तहसील के असाउर गांव से जुड़ा है। गांव निवासी बरखू वाराणसी में रिक्शा चलाता है। साल-दो साल पर कभी कभार ही घर आता था। उसका परिवार भी वाराणसी में साथ रहता था। इस दौरान उसके पट्टीदारों ने राजस्व अभिलेखों में उसे मृत घोषित करा दिया।
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साथ ही पट्टीदारों के नाम पर जमीन की वरासत भी हो गई। वो जमीन वाराणसी-लुंबिनी फोरलेन नेशनल हाईवे में आ गई। सूत्रों की माने तो जमीन की तीन करोड़ रुपये मुआवजा तय हुआ। अभिलेखों में वारिस बने लोगों ने मुआवजे के लिए क्लेम कर दिया।
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अभी मुआवजा जारी नहीं थी कि भाजपा के पूर्व सांसद दरोगा सरोज आदि तो मामले की जानकारी हो गई। उन्होंने बरखू और अधिकारियों को इसकी जानकारी दी। बरखू भी जिलाधिकारी के सामने पेश हुआ और जमीन को अपना बताया। मामले की जानकारी मुख्य राजस्व अधिकारी को हुई तो उन्होंने मुआवजा जारी करने की प्रक्रिया को तत्काल रोक दिया।

मामले की शिकायत मिली है। अभी जांच की जा रही है, कि जमीन का असली वारिस कौन है। जांच के बाद ही कुछ कहा जा सकता है।
वीके गुप्ता, एडीएम वित्त एव राजस्व

एक ही जमीन के दो मालिक सामने आने पर मुआवजा जारी करने की प्रक्रिया रोक दी गई है। फैसला होने के बाद ही आगे की कार्रवाई की जाएगी।
आलोक वर्मा, मुख्य राजस्व अधिकारी

बरखू काफी समय से वाराणसी में रिक्शा चलाता था। इसकी जमीन पर किसी और मुआवजा लेने की जानकारी होने पर अधिकारियों को प्रकरण से अवगत कराया गया था। अब फैसला अधिकारियों को करना है।
दरोगा प्रसाद सरोज, पूर्व एमपी

अब वारिस साबित करने की की चल रही लड़ाई
बताया जाता है कि जिलाधिकारी के सामने पेश होने के कुछ दिन बाद ही बरखू की मौत हो गई। अब उसके बेटे खुद को उसका वारिस बता राजस्व अभिलेखों में अपना नाम चढ़वाने की लड़ाई लड़ रहे हैं।


हड़पा जा चुका है 95 लाख का मुआवजा
बूढ़नपुर तहसील के भीलमपुर छपरा निवासी सुग्रीव के नाम पर फर्जी व्यक्ति को खड़ा कर 95 लाख का मुआवजा हड़पा जा चुका है। सुग्रीव भी 20 साल से लापता था। जमीन उसके भाई के नाम हो चुकी थी, लेकिन विभागीय कर्मचारियों की मिलीभगत से फर्जी सुग्रीव बन कर 95 लाख का मुआवजा हड़पा जा चुका है। मामले में दो लोग गिरफ्तार भी हो चुके हैं।
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