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Azamgarh News: पूजा पंडालों से गायब हुआ बुराई का प्रतीक महिषासुर
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नवयुवक रक्षा दल तकिया चकला पर स्थापित प्रतिमा। संवाद
- फोटो : Archive
दुर्गा पूजा भारतीय संस्कृति और सनातन परंपरा का प्रमुख पर्व है। यह मां दुर्गा की आराधना, शक्ति की उपासना और बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है। शारदीय नवरात्र में नौ दिनों तक मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा-अर्चना की जाती है।
मान्यता है कि मां दुर्गा ने महिषासुर का वध कर देवताओं और संसार को उसके अत्याचारों से मुक्ति दिलाई थी। दुर्गा पूजा हमें सिखाती है कि सत्य और धर्म की राह पर चलकर बड़ी से बड़ी बुराई पर विजय प्राप्त की जा सकती है। मां दुर्गा के विभिन्न स्वरूप नारी शक्ति, साहस, करुणा और ममता के प्रतीक हैं। यह पर्व समाज में महिलाओं के सम्मान, सुरक्षा और सशक्तीकरण का संदेश भी देता है।
दुर्गा पूजा को लेकर जिले में 1748 स्थानों पर दुर्गा प्रतिमाओं की स्थापना की गई है। सभी प्रतिमाएं एक से बढ़कर एक अलौकिक रूप में दमक रही हैं। लेकिन, सबसे बड़ी बात तो यह है कि इस बार पूजा पंडालों से महिषासुर गायब है, हालांकि कुछ दुर्गा पंडालों में महिषासुर की प्रतिमा भी स्थापित की गई है।
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दुर्गा पूजा बुराई पर अच्छाई की जीत के प्रतीक के रूप में मनाई जाती है। अच्छाई का प्रतीक तो पूजा पंडालों में देखने को मिल रहा है, लेकिन बुराई का प्रतीक गायब है। एक समय था, जब पूजा पंडालों में इलेक्ट्रिक व्यवस्था के जरिए मां दुर्गा को महिषासुर का वध करते हुए दिखाया जाता था। कई पूजा पंडालों ने मां दुर्गा के साथ भगवान भोलेनाथ की प्रतिमा भी सजाई है।
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जागरण की जगह डांडिया तेजी से बना रही जगह
नवरात्र के अवसर पर जागरण के कार्यक्रम आयोजित किए जाते थे। कलाकारों के देवी गीतों का श्रद्धालु देर रात तक आनंद उठाते थे। इस बार जागरण एक-दो जगहों पर ही देखने को मिला। जबकि डांडिया की इस समय धूम मची हुई है। लोग टिकट खरीदकर डांडिया में झूमने के लिए पहुंच रहे हैं।
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बोले समिति के लोग
- कलकत्ता में बिना महिषासुर के दुर्गा पूजा ही संपन्न नहीं होती है। हमने तो अपने पूजा पंडाल में महिषासुर को भी स्थापित किया है। लेकिन, आज लोग दिखावे पर विश्वास कर रहे हैं। इसके कारण ऐसा हो रहा है। -जय प्रकाश दुबे, अध्यक्ष, नवयुवक रक्षा समिति बदरका।
- मूर्ति बनाने वाले कलाकार आते हैं, वहीं मूर्ति को बनाते हैं। वह जो बना देते हैं, हम उसे ही स्थापित करते हैं। लेकिन, आगे से इस बात का ध्यान रखा जाएगा कि मां के साथ महिषासुर की प्रतिमा भी जरूर हो। -धीरज गुप्ता, मोनू, अध्यक्ष, जय मां दुर्गा सेवा समिति खत्री टोला।
- पहले नवरात्र के नौ दिन में 15 से 16 जागरण की बुकिंग मिल जाती थी। इसमें कई कार्यक्रम दिन में ही संपन्न हो जाते थे। लेकिन, इस बार मात्र एक बुकिंग मिली थी। -राजेश रंजन, जागरण कलाकार।
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मान्यता है कि मां दुर्गा ने महिषासुर का वध कर देवताओं और संसार को उसके अत्याचारों से मुक्ति दिलाई थी। दुर्गा पूजा हमें सिखाती है कि सत्य और धर्म की राह पर चलकर बड़ी से बड़ी बुराई पर विजय प्राप्त की जा सकती है। मां दुर्गा के विभिन्न स्वरूप नारी शक्ति, साहस, करुणा और ममता के प्रतीक हैं। यह पर्व समाज में महिलाओं के सम्मान, सुरक्षा और सशक्तीकरण का संदेश भी देता है।
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दुर्गा पूजा को लेकर जिले में 1748 स्थानों पर दुर्गा प्रतिमाओं की स्थापना की गई है। सभी प्रतिमाएं एक से बढ़कर एक अलौकिक रूप में दमक रही हैं। लेकिन, सबसे बड़ी बात तो यह है कि इस बार पूजा पंडालों से महिषासुर गायब है, हालांकि कुछ दुर्गा पंडालों में महिषासुर की प्रतिमा भी स्थापित की गई है।
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दुर्गा पूजा बुराई पर अच्छाई की जीत के प्रतीक के रूप में मनाई जाती है। अच्छाई का प्रतीक तो पूजा पंडालों में देखने को मिल रहा है, लेकिन बुराई का प्रतीक गायब है। एक समय था, जब पूजा पंडालों में इलेक्ट्रिक व्यवस्था के जरिए मां दुर्गा को महिषासुर का वध करते हुए दिखाया जाता था। कई पूजा पंडालों ने मां दुर्गा के साथ भगवान भोलेनाथ की प्रतिमा भी सजाई है।
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जागरण की जगह डांडिया तेजी से बना रही जगह
नवरात्र के अवसर पर जागरण के कार्यक्रम आयोजित किए जाते थे। कलाकारों के देवी गीतों का श्रद्धालु देर रात तक आनंद उठाते थे। इस बार जागरण एक-दो जगहों पर ही देखने को मिला। जबकि डांडिया की इस समय धूम मची हुई है। लोग टिकट खरीदकर डांडिया में झूमने के लिए पहुंच रहे हैं।
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बोले समिति के लोग
- कलकत्ता में बिना महिषासुर के दुर्गा पूजा ही संपन्न नहीं होती है। हमने तो अपने पूजा पंडाल में महिषासुर को भी स्थापित किया है। लेकिन, आज लोग दिखावे पर विश्वास कर रहे हैं। इसके कारण ऐसा हो रहा है। -जय प्रकाश दुबे, अध्यक्ष, नवयुवक रक्षा समिति बदरका।
- मूर्ति बनाने वाले कलाकार आते हैं, वहीं मूर्ति को बनाते हैं। वह जो बना देते हैं, हम उसे ही स्थापित करते हैं। लेकिन, आगे से इस बात का ध्यान रखा जाएगा कि मां के साथ महिषासुर की प्रतिमा भी जरूर हो। -धीरज गुप्ता, मोनू, अध्यक्ष, जय मां दुर्गा सेवा समिति खत्री टोला।
- पहले नवरात्र के नौ दिन में 15 से 16 जागरण की बुकिंग मिल जाती थी। इसमें कई कार्यक्रम दिन में ही संपन्न हो जाते थे। लेकिन, इस बार मात्र एक बुकिंग मिली थी। -राजेश रंजन, जागरण कलाकार।