{"_id":"59ad9a0c4f1c1b4b738b5043","slug":"lokayukta-probe-caught-stroke-rto-azamgarh","type":"story","status":"publish","title_hn":"लोकायुक्त जांच में फंसे आरटीओ आजमगढ़","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
लोकायुक्त जांच में फंसे आरटीओ आजमगढ़
आजमगढ़/ब्यूरो, अमर उजाला
Updated Mon, 04 Sep 2017 11:53 PM IST
विज्ञापन
जांच
- फोटो : demopic
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
आजमगढ़। अमर उजाला की ओर से उठाया गया अमरोहा जिले में मोटर ड्राइविंग ट्रेनिंग स्कूलों में बिना ट्रेनिंग प्रारूप-14 और प्रारूप पांच बेचकर परिवहन विभाग की मिलीभगत से कामर्शियल लाइसेंस जारी करने मामले को लेकर लोकायुक्त से शिकायत की गई है।
शिकायतकर्ता की ओर से स्कूल संचालकों से मिलकर तत्कालीन एआरटीओ दरोगा सिंह, आरआई और लाइसेंस लिपिक पर बिना ट्रेनिंग लाइसेंस जारी करने का आरोप लगाया गया है। लोकायुक्त की ओर से डीएम अमरोहा से मामले में जांच आख्या मांगी गई है। दरोगा सिंह वर्तमान में आजमगढ़ से आरटीओ हैं।
अमर उजाला ने अपने अमरोहा संस्करण में 14 अप्रैल के अंक में मोटर ड्राइविंग स्कूलों में बिना ट्रेनिंग के रुपये लेकर परिवहन विभाग की मिलीभगत से कामर्शियल लाइसेंस जारी करने के फर्जीवाड़े का खुलासा किया था। निरीक्षण में पाया गया था कि जिले की तीन मोटर ड्राइविंग स्कूलों में खड़े वाहन चलने की स्थिति में थे ही नहीं।
विज्ञापन
कोई प्रशिक्षक भी नहीं था। खबर के प्रकाशन के बाद इसी को आधार बनाकर मशकूर अहमद निवासी काजी गली, मोहल्ला काजीजादा अमरोहा ने लोकायुक्त न्यायालय में 26 अप्रैल 2014 को शिकायत की। बताया कि मोहम्मद मुर्सलीन अमरोहा के जोया स्थिति जनता मोटर ड्राइविंग ट्रेनिंग स्कूल संचालित करता है।
वो यहां पर कलर्क था। आरोप लगाया कि संचालक की ओर से कामर्शियल लाइसेंस बनने में जरूरी प्रारूप 14 और प्रारूप पांच को 2200 रुपये में आवेदकों को बेचा जाता था। आवोदकों को स्कूल में कोई ट्रेनिंग नहीं दी जाती थी। आरोप लगाया कि इसके बाद संचालक अमरोहा के तत्कालीन एआरटीओ दरोगा सिंह, आरआई सुशील कुमार मिश्रा और लाइसेंस लिपिक देवेंद्र सिंह की सहायता से लाइसेंस बनवा देता था।
स्कूल पर ट्रेनिंग के लिए खड़े वाहनों का फिटनेस, बीमा आदि भी नहीं था। अपने कार्यकाल के दौरान मैंने संचालक की ओर से जारी किए गए प्ररूपों के बारे में जानकारी के लिए आरटीआई डाली तो मुझे नौकरी से निकाल दिया गया। संचालक ने इसके बाद अपने ममेरे भाई नईम पुत्र अमीर मोहल्ला कोर्ट हौदड़िया को काम पर रख लिया।
वो भ्रष्टाचार में उसका सहयोग कर रहा है। इसके बाद मुझे धमकियां दी जा रही है कि कहीं शिकायत की जो जान से मरवा देंगे। अपनी ऊंची पहुंच का हवाला देकर मुझे जेल भिजवाने की धमकी दी जा रही है।
शिकायत का संज्ञान लेते हुए लोकायुक्त कार्यालय से जिलाधिकारी अमरोहा के 14 अगस्त को भेजे गए पत्र में शिकायत के संबंध में जांच आख्या मांगी गई है। जिलाधिकारी की ओर से मामले की जांच 19 अगस्त को एडीएम अमरोहा को सौंपी गई है। जांच के संबंध में आरटीओ आजमगढ़ दरोगा सिंह को कभी भी अमरोहा बुलाया जा सकता है।
जांच मिली है। इस संबंध में परिवहन विभाग से रिपोर्ट मांगी गई है। रिपोर्ट के बाद जरूरी हुआ था तत्कालीन एआरटीओ को पूछताछ के लिए बुलाया जाएगा।-एमएम अंसारी, एडीएम अमरोहा।
विज्ञापन
शिकायतकर्ता की ओर से स्कूल संचालकों से मिलकर तत्कालीन एआरटीओ दरोगा सिंह, आरआई और लाइसेंस लिपिक पर बिना ट्रेनिंग लाइसेंस जारी करने का आरोप लगाया गया है। लोकायुक्त की ओर से डीएम अमरोहा से मामले में जांच आख्या मांगी गई है। दरोगा सिंह वर्तमान में आजमगढ़ से आरटीओ हैं।
विज्ञापन
अमर उजाला ने अपने अमरोहा संस्करण में 14 अप्रैल के अंक में मोटर ड्राइविंग स्कूलों में बिना ट्रेनिंग के रुपये लेकर परिवहन विभाग की मिलीभगत से कामर्शियल लाइसेंस जारी करने के फर्जीवाड़े का खुलासा किया था। निरीक्षण में पाया गया था कि जिले की तीन मोटर ड्राइविंग स्कूलों में खड़े वाहन चलने की स्थिति में थे ही नहीं।
विज्ञापन
कोई प्रशिक्षक भी नहीं था। खबर के प्रकाशन के बाद इसी को आधार बनाकर मशकूर अहमद निवासी काजी गली, मोहल्ला काजीजादा अमरोहा ने लोकायुक्त न्यायालय में 26 अप्रैल 2014 को शिकायत की। बताया कि मोहम्मद मुर्सलीन अमरोहा के जोया स्थिति जनता मोटर ड्राइविंग ट्रेनिंग स्कूल संचालित करता है।
वो यहां पर कलर्क था। आरोप लगाया कि संचालक की ओर से कामर्शियल लाइसेंस बनने में जरूरी प्रारूप 14 और प्रारूप पांच को 2200 रुपये में आवेदकों को बेचा जाता था। आवोदकों को स्कूल में कोई ट्रेनिंग नहीं दी जाती थी। आरोप लगाया कि इसके बाद संचालक अमरोहा के तत्कालीन एआरटीओ दरोगा सिंह, आरआई सुशील कुमार मिश्रा और लाइसेंस लिपिक देवेंद्र सिंह की सहायता से लाइसेंस बनवा देता था।
स्कूल पर ट्रेनिंग के लिए खड़े वाहनों का फिटनेस, बीमा आदि भी नहीं था। अपने कार्यकाल के दौरान मैंने संचालक की ओर से जारी किए गए प्ररूपों के बारे में जानकारी के लिए आरटीआई डाली तो मुझे नौकरी से निकाल दिया गया। संचालक ने इसके बाद अपने ममेरे भाई नईम पुत्र अमीर मोहल्ला कोर्ट हौदड़िया को काम पर रख लिया।
वो भ्रष्टाचार में उसका सहयोग कर रहा है। इसके बाद मुझे धमकियां दी जा रही है कि कहीं शिकायत की जो जान से मरवा देंगे। अपनी ऊंची पहुंच का हवाला देकर मुझे जेल भिजवाने की धमकी दी जा रही है।
शिकायत का संज्ञान लेते हुए लोकायुक्त कार्यालय से जिलाधिकारी अमरोहा के 14 अगस्त को भेजे गए पत्र में शिकायत के संबंध में जांच आख्या मांगी गई है। जिलाधिकारी की ओर से मामले की जांच 19 अगस्त को एडीएम अमरोहा को सौंपी गई है। जांच के संबंध में आरटीओ आजमगढ़ दरोगा सिंह को कभी भी अमरोहा बुलाया जा सकता है।
जांच मिली है। इस संबंध में परिवहन विभाग से रिपोर्ट मांगी गई है। रिपोर्ट के बाद जरूरी हुआ था तत्कालीन एआरटीओ को पूछताछ के लिए बुलाया जाएगा।-एमएम अंसारी, एडीएम अमरोहा।