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सफाई पर लाखों खर्च, फिर भी गंदगी जस की तस

Sat, 12 Nov 2022 11:24 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Sat, 12 Nov 2022 11:24 PM IST
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Lakhs spent on cleaning, yet the dirt remains as it is
आजमगढ़। वर्तमान में संक्रामक रोगों का खतरा बढ़ा है। संदिग्ध बुखार की चपेट में नगर क्षेत्र ही नहीं पूरा जिला है। डेंगू के केस भी कई मिल चुके हैं। वजह साफ-सफाई का अभाव व मच्छरों का बढ़ा प्रकोप है। इसके बाद भी नपा प्रशासन की साफ-सफाई व्यवस्था दिन बन दिन गड़बड़ ही होती जा रही है। प्रति माह नपा प्रशासन सफाई व्यवस्था के नाम पर 75 से 80 लाख रुपये खर्च कर रही है, इसके बाद भी सड़कों पर गंदगी का अंबार व नालियां जाम है। नगर पालिका परिषद आजमगढ़ में सफाई व्यवस्था का इन दिनों काफी बुरा हाल हो गया है। नाले-नालियां कचरे से पटी हैं और उससे दुर्गंध उठ रही है जबकि सफाई व्यवस्था के लिए 226 कर्मचारी हैं। इसमें स्थाई कर्मचारियों की संख्या 80, संविदा कर्मचारियों की संख्या 56 व ठेकेदारी व्यवस्था वाले कर्मचारियों की संख्या 90 है। इसके बाद भी जन सुविधाओं के नाम पर नपा प्रशासन सिर्फ कोरम पूरा कर रही है। शहर के कुल 25 वार्डों में सफाई व्यवस्था का बुरा हाल है। मुख्य मार्गो पर सफाई व्यवस्था को दुरुस्त रख कर नपा प्रशासन पूरे शहर की व्यवस्था दरुस्त होने का दावा करती है, वहीं गलियों की बात की जाए तो व्यवस्था बदहाल ही है। शहर के बदरका तिराहा, जिला महिला अस्पताल के पूर्वी गेट, डॉ. बनर्जी के सामने, दलालघाट, सिधारी पूर्वी वार्ड, समेत दर्जन भर से अधिक स्थानों पर प्राय: कूड़े का ढेर देखने को मिलता है। छुट्टा घूम रहे मवेशी कूड़े को बीच सड़क तक फैला देते है। इससे राहगीरों का सड़क पर चलना भी दूभर हो जाता है। नगर पालिका परिषद आजमगढ़ के एकाउंटेंट जावेद की माने तो शहर में साफ-सफाई के नाम पर लगभग 75 से 80 लाख रुपये प्रति माह का खर्च है। इसमें एक मुश्त 45 लाख रुपये तो सिर्फ स्थाई कर्मचारियों के वेतन पर खर्च होता है। संविदा कर्मचारियों के मानदेय के नाम पर 12 से 15 लाख का खर्च है। वहीं ठेकेदारी व्यवस्था के कर्मचारियों के वेतन के नाम पर भी 12 से 13 लाख का भुगतान होता। इसके बाद कूड़ा उठाने के लिए प्रयोग होने वाले वाहनों के डीजल व मेंटेनेंस के नाम पर प्रति माह 12 से 14 लाख रुपये खर्च होता है। बरसात के पूर्व ही नपा प्रशासन ने बाहर से टीम बुला कर लाखों रुपये खर्च कर शहर के नालों की सफाई करवाई थी। युद्ध स्तर पर अभियान चला कर सभी नाले-नालियों की सफाई हुई थी लेकिन वर्तमान में सभी कचरे से पट चुके हैं। नपा क्षेत्र में तीन बड़े नाले, 24 मझोले नाले व 22 छोटे नाले हैं। जिलाधिकारी विशाल भारद्वाज ने शुक्रवार की सुबह नगर क्षेत्र के कई इलाकों में चक्रमण किया था। इस दौरान जिलाधिकारी को भी शहर की साफ-सफाई व्यवस्था में कई जगहों पर कमियां देखने को मिलीं थीं। इस पर जिलाधिकारी ने ईओ से स्पष्टीकरण तलब करने का निर्देश संबंधित को दिया था। सफाई इंस्पेक्टर केके यादव ने बताया कि शहर से प्रतिदिन लगभग 55 एमटी कूड़ा निकलता है। साफ-सफाई व्यवस्था को दुरूस्त करने की हर कवायद नपा कर रही है। प्रतिदिन सड़कों से कूड़ा उठाया जा रहा है। यदि कहीं भी दोपहर बाद कूड़ा रह जाता है तो वहां लोगों द्वार कूड़ा उठान के बाद फेका जाता है। ऐसे लोगों को चिन्हित करने की कवायद चल रही है। जिन्हें नोटिस भेजा जाएगा। इसके बाद भी न सुधरने पर जुर्माना लगाया जाएगा।
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