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प्रवासी मजदूरों की निगरानी में हीलाहवाली, बिगाड़ देगी हालात
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आजमगढ़। जिले में प्रवासी मजदूरों के घर वापसी का क्रम जोरों पर चल रहा है। सभी प्रवासियों को जिला प्रशासन घर भेज कर होम क्वारंटीन करा रहा है। जबकि इन्हें शेल्टर रूम अथवा क्वारंटीन सेंटरों पर रखा जाना चाहिए था। भारी संख्या में जिले में मजदूरों की वापसी जिले के लिए भारी पड़ सकता है लेकिन शासन व प्रशासन की इस मजदूरों को होम क्वारंटीन किए जाने की रणनीति समझ से परे है।
कोरोना संक्रमण से फिलहाल जिले को मुक्त माना जा रहा है। ऐसा इसलिए कि जिले में मिले आठ कोरोना पॉजिटिव मरीज अब ठीक हो चुके है। यह अलग बात है कि दिल्ली से एक कोरोना पॉजिटिव जिले में आ चुका है, जिसे राजकीय मेडिकल कालेज के आइसोलेशन वार्ड में भर्ती कराया गया है। वहीं बीते दो दिनों में ही पंजाब व गुजरात प्रांत से तीन ट्रेन आई है। जिससे जिले में 3744 प्रवासी मजदूर पहुंचे है। इसके पूर्व बसों के माध्यम से भी काफी संख्या में छात्रों व प्रदेश के विभिन्न जिलों में फसे प्रवासी मजदूरों को लाया गया था। जिनकी संख्या भी तीन हजार से कम नहीं होगी। इन सभी को शासन-प्रशासन नई योजना के तहत सिर्फ थर्मल स्क्रीनिंग कराने के बाद घर भेज कर होम क्वारंटीन करा रहा है। शासन प्रशासन की यह योजना जिले के लिए कभी भी बड़ी परेशानी का कारण बन सकता है। क्योंकि 14 दिनों के होम क्वारंटीन में यदि किसी भी मजदूर में कोरोना के लक्षण सामने आए और जब तक उसके सैंपल की जांच होगी तब तक वह अपने परिवार के लोगों को भी इस संक्रमण की चपेट में ले चुका होगा। अभी जिले में 13 श्रमिक स्पेशल ट्रेन के आने की संभावना है और प्रत्येक ट्रेन से 11 से 12 सौ मजदूर आएंगे।
पूर्व की व्यवस्था थी कुछ बेहतर
आजमगढ़। पूर्व में बाहर से आने वाले लोगों को जिला प्रशासन शेल्टर होम व क्वारंटीन सेंटरों में 14 दिनों तक रखता था। जहां स्वास्थ्य विभाग की टीम उनकी देख रेख करती रहती थी। जिला प्रशासन के लोग भी उन पर नजर रखते थे। जिससे यदि किसी में लक्षण दिखाई देता तो उसे तत्काल हास्पिटल क्वारंटीन कर सैंपल जांच के लिए भेज दिया जाता था। इस व्यवस्था के चलते ही जिले में अब तक संक्रमण का फैलाव नहीं हो सका है, लेकिन जिला प्रशासन को सुरक्षा व्यवस्था के साथ ही भोजन पानी का भी इंतजाम करना पड़ता था। जिसके चलते ही शासन-प्रशासन ने अब बाहर से आने वालों को होम क्वारंटीन करा रहा है।
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ब्लाक स्तर पर बने क्वारंटीन सेंटर बंद करना पहुंचा सकता है नुकसान
आजमगढ़। कोरोना संक्रमण की शुरूआत में ही जिला प्रशासन ने ब्लाक स्तर पर क्वारंटीन सेंटर स्थापित करवाया था। इस सेंटरों को वर्तमान में बंद कर दिया गया है। जबकि वर्तमान में जिस रफ्तार से बाहर के प्रदेशों से श्रमिकों का आना हो रहा है, उसमें ऐसे सेंटरों की अत्यंत आवश्यकता थी। ताकि इन सेंटरों पर ही बाहर से आए मजदूरों को रोक कर गांव को सुरक्षित रखा जा सकता था। अब जो व्यवस्था है वह पूरे गांव को कोरोना संक्रमण की चपेट में ले सकता है।
सिर्फ तहसील स्तर पर बने हुए है आठ क्वारंटीन सेंटर
आजमगढ़। वर्तमान में जिला प्रशासन ने सभी तहसील मुख्यालयों पर एक-एक क्वारंटीन सेंटर बना रखा है। जिले में आठ तहसील है और हर तहसील में एक-एक क्वारंटीन सेंटर विभिन्न विद्यालयों में स्थापित है। वहीं शेल्टर होम व हास्पिटल क्वारंटीन की बात की जाए तो ऐसे सेंटरों की संख्या आधा दर्जन भर के लगभग होगी।
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कोरोना संक्रमण से फिलहाल जिले को मुक्त माना जा रहा है। ऐसा इसलिए कि जिले में मिले आठ कोरोना पॉजिटिव मरीज अब ठीक हो चुके है। यह अलग बात है कि दिल्ली से एक कोरोना पॉजिटिव जिले में आ चुका है, जिसे राजकीय मेडिकल कालेज के आइसोलेशन वार्ड में भर्ती कराया गया है। वहीं बीते दो दिनों में ही पंजाब व गुजरात प्रांत से तीन ट्रेन आई है। जिससे जिले में 3744 प्रवासी मजदूर पहुंचे है। इसके पूर्व बसों के माध्यम से भी काफी संख्या में छात्रों व प्रदेश के विभिन्न जिलों में फसे प्रवासी मजदूरों को लाया गया था। जिनकी संख्या भी तीन हजार से कम नहीं होगी। इन सभी को शासन-प्रशासन नई योजना के तहत सिर्फ थर्मल स्क्रीनिंग कराने के बाद घर भेज कर होम क्वारंटीन करा रहा है। शासन प्रशासन की यह योजना जिले के लिए कभी भी बड़ी परेशानी का कारण बन सकता है। क्योंकि 14 दिनों के होम क्वारंटीन में यदि किसी भी मजदूर में कोरोना के लक्षण सामने आए और जब तक उसके सैंपल की जांच होगी तब तक वह अपने परिवार के लोगों को भी इस संक्रमण की चपेट में ले चुका होगा। अभी जिले में 13 श्रमिक स्पेशल ट्रेन के आने की संभावना है और प्रत्येक ट्रेन से 11 से 12 सौ मजदूर आएंगे।
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पूर्व की व्यवस्था थी कुछ बेहतर
आजमगढ़। पूर्व में बाहर से आने वाले लोगों को जिला प्रशासन शेल्टर होम व क्वारंटीन सेंटरों में 14 दिनों तक रखता था। जहां स्वास्थ्य विभाग की टीम उनकी देख रेख करती रहती थी। जिला प्रशासन के लोग भी उन पर नजर रखते थे। जिससे यदि किसी में लक्षण दिखाई देता तो उसे तत्काल हास्पिटल क्वारंटीन कर सैंपल जांच के लिए भेज दिया जाता था। इस व्यवस्था के चलते ही जिले में अब तक संक्रमण का फैलाव नहीं हो सका है, लेकिन जिला प्रशासन को सुरक्षा व्यवस्था के साथ ही भोजन पानी का भी इंतजाम करना पड़ता था। जिसके चलते ही शासन-प्रशासन ने अब बाहर से आने वालों को होम क्वारंटीन करा रहा है।
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ब्लाक स्तर पर बने क्वारंटीन सेंटर बंद करना पहुंचा सकता है नुकसान
आजमगढ़। कोरोना संक्रमण की शुरूआत में ही जिला प्रशासन ने ब्लाक स्तर पर क्वारंटीन सेंटर स्थापित करवाया था। इस सेंटरों को वर्तमान में बंद कर दिया गया है। जबकि वर्तमान में जिस रफ्तार से बाहर के प्रदेशों से श्रमिकों का आना हो रहा है, उसमें ऐसे सेंटरों की अत्यंत आवश्यकता थी। ताकि इन सेंटरों पर ही बाहर से आए मजदूरों को रोक कर गांव को सुरक्षित रखा जा सकता था। अब जो व्यवस्था है वह पूरे गांव को कोरोना संक्रमण की चपेट में ले सकता है।
सिर्फ तहसील स्तर पर बने हुए है आठ क्वारंटीन सेंटर
आजमगढ़। वर्तमान में जिला प्रशासन ने सभी तहसील मुख्यालयों पर एक-एक क्वारंटीन सेंटर बना रखा है। जिले में आठ तहसील है और हर तहसील में एक-एक क्वारंटीन सेंटर विभिन्न विद्यालयों में स्थापित है। वहीं शेल्टर होम व हास्पिटल क्वारंटीन की बात की जाए तो ऐसे सेंटरों की संख्या आधा दर्जन भर के लगभग होगी।