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मनरेगा से सुधरेगी कयाड़ नदी की हालत
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बिलरियागंज ब्लाक के मानपुर में कयाड़ नदी की खुदाई करते मनरेगा मजदूर।
- फोटो : AZAMGARH
आजमगढ़। लॉकडाउन की वजह से जनपद में 1.70 लाख श्रमिक विस्थापित होकर गांव पहुंच गए हैं। ऐसे में प्रदेश सरकार उनको गांवों पर ही रोजगार मुहैया कराने का प्रयास कर रही है। इसलिए मनरेगा के प्रोजेक्ट तैयार किए जा रहे हैं। जनपद के बिलरियागंज में कयाड़ नदी के पुनरोद्धार के लिए भी प्रोजेक्ट तैयार किया गया है। इसके तहत 12 गांवों में नदी की खुदाई कराई जाएगी। तीन गांवों में तो खुदाई का कार्य शुरू भी कर दिया गया है। अन्य गांवों के लिए इस्टीमेट तैयार किया जा रहा है।
कयाड़ नदी सगड़ी तहसील क्षेत्र के होकर गुजरती है। वर्तमान में विलुप्त होने के कगार पर है। छोटी नदियों के विलुप्त होने से जहां जलस्तर नीचे जा रहा है। वहीं, सिंचाई और पेयजल को लेकर भी संकट खड़ा होने लगा है। ऐसे में कयाड़ नदी के पुनरोद्धार से क्षेत्र के जलस्तर में वृद्धि होगी। नदी में पानी होने से लोगों के लिए सिंचाई का संसाधन भी बन सकता है। नदी की खुदाई के साथ ही इसके किनारों पर पौधरोपण कराने की योजना बनाई गई है। पौधरोपण से पर्यावरण संरक्षण को भी बल मिलेगा।
बाढ़ खंड ने 12 गांवों में दी अनुमति
कयाड़ नदी की खुदाई के लिए ब्लाक प्रशासन की ओर से बाढ़ खंड विभाग से अनुमति मांगी गई थी। इसमें बाढ़ खंड की ओर से भलुआई (सुरजीपुर), मल्लूपुर कोहड़ी, जयराजपुर, बिंदवल, गौरी नरायनपुर, पांडेयचतवर, भैसौड़ा सेठारी, भवारायपुरपट्टी टंडन राय, अशरफपुर, बनकट, बगहीडाड और नूरूद्दीनपुर में कयाड़ ट्रंक ड्रेन की खुदाई मनरेगा से कराने की अनुमति दी गई है।
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तीन गांवों में शुरू हुआ काम, आठ हजार को रोजगार
कयाड़ नदी की खुदाई बिलरियागंज ब्लाक के मानपुर, भैसौड़ सेठारी और तोफापुर में शुरू कर दिया गया है। अभी तक कुल आठ हजार लोगों को काम भी मिला है। एपीओ सुनील चौधरी और टीए संजय सिंह ने बताया कि अन्य गांवों में कार्य के लिए इस्टीमेट तैयार किया जा रहा है। जल्द ही वहां भी कार्य शुरू करा दिया जाएगा।
जनपद में दो नदियों को कयाड़ और छोटी सरयू की खुदाई के लिए प्रस्ताव तैयार किया गया है। इससे जहां मनरेगा मजदूरों को काम मिलेगा वहीं, जलस्तर में भी सुधार होगा। - बीबी सिंह, डीसी मनरेगा
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कयाड़ नदी सगड़ी तहसील क्षेत्र के होकर गुजरती है। वर्तमान में विलुप्त होने के कगार पर है। छोटी नदियों के विलुप्त होने से जहां जलस्तर नीचे जा रहा है। वहीं, सिंचाई और पेयजल को लेकर भी संकट खड़ा होने लगा है। ऐसे में कयाड़ नदी के पुनरोद्धार से क्षेत्र के जलस्तर में वृद्धि होगी। नदी में पानी होने से लोगों के लिए सिंचाई का संसाधन भी बन सकता है। नदी की खुदाई के साथ ही इसके किनारों पर पौधरोपण कराने की योजना बनाई गई है। पौधरोपण से पर्यावरण संरक्षण को भी बल मिलेगा।
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बाढ़ खंड ने 12 गांवों में दी अनुमति
कयाड़ नदी की खुदाई के लिए ब्लाक प्रशासन की ओर से बाढ़ खंड विभाग से अनुमति मांगी गई थी। इसमें बाढ़ खंड की ओर से भलुआई (सुरजीपुर), मल्लूपुर कोहड़ी, जयराजपुर, बिंदवल, गौरी नरायनपुर, पांडेयचतवर, भैसौड़ा सेठारी, भवारायपुरपट्टी टंडन राय, अशरफपुर, बनकट, बगहीडाड और नूरूद्दीनपुर में कयाड़ ट्रंक ड्रेन की खुदाई मनरेगा से कराने की अनुमति दी गई है।
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तीन गांवों में शुरू हुआ काम, आठ हजार को रोजगार
कयाड़ नदी की खुदाई बिलरियागंज ब्लाक के मानपुर, भैसौड़ सेठारी और तोफापुर में शुरू कर दिया गया है। अभी तक कुल आठ हजार लोगों को काम भी मिला है। एपीओ सुनील चौधरी और टीए संजय सिंह ने बताया कि अन्य गांवों में कार्य के लिए इस्टीमेट तैयार किया जा रहा है। जल्द ही वहां भी कार्य शुरू करा दिया जाएगा।
जनपद में दो नदियों को कयाड़ और छोटी सरयू की खुदाई के लिए प्रस्ताव तैयार किया गया है। इससे जहां मनरेगा मजदूरों को काम मिलेगा वहीं, जलस्तर में भी सुधार होगा। - बीबी सिंह, डीसी मनरेगा