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Azamgarh News: सरयू के ढोंढ़ से महाकुंभ में बने मड़हों में कल्पवासी करेंगे विश्राम

Mon, 13 Jan 2025 11:43 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Mon, 13 Jan 2025 11:43 PM IST
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Kalpavasi will rest in the ponds built in Mahakumbh by the drum of Saryu.

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लाटघाट। प्रयागराज में महाकुंभ के दौरान संगम तट पर आजमगढ़ भी अपनी सशक्त उपस्थिति दर्ज करा रहा है। एक तरफ जहां साधु संतों को टेराकोटा से बनी पानी की बोतल में गंगा जल प्रदान किया जाएगा। वहीं सगड़ी तहसील से गुजरने वाली सरयू के ढोंढ़ से बने मड़हे में लोग विश्राम करेंगे।

सगड़ी तहसील के देवरांचल से होकर गुजरने वाली सरयू नदी बरसात के मौसम में लोगों का सबकुछ अपने साथ बहा ले जाती है, लेकिन अपने पीछे वह ढोंढ़ को छोड़ जाती है। जो क्षेत्र के लोगों की आर्थिक कमाई का जरिया बनता है। इस ढोंढ़ से तैयार मड़हे सालों तक सुरक्षित रहते हैं। इस बार महाकुंभ में पंडाल और मड़हे को बनाने में इस ढोंढ़ का इस्तेमाल किया गया है। इसके लिए सगड़ी से तीन ट्रकों में लगभग 20 हजार बोझ से अधिक ढोंढ़ भेजा गया गया है। बोझ के रेट से देखें तो प्रति बोझ 35 से 40 रुपये किसानों को मिले हैं। इस आमदनी से क्षेत्र के किसानों में हर्ष व्याप्त है। जनपद के सगड़ी तहसील क्षेत्र के महुला, गांगेपुर से लेकर हैदराबाद तक और दूसरी तरफ गोरखपुर जनपद के बड़हलगंज, कोईनहां, रजौली, गोपालपुर ,मकरवार आदि जगहों से यह ढोंढ़ गया है।
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अक्तूबर व नवंबर में होती है कटाई
ढोंढ़ की कटाई अक्तूबर और नवंबर में ही शुरू हो जाती है। इसे काटने के बाद किसान इसका ढेर लगाकर रखते हैं और लोग पहुंचकर इसकी खरीदारी करते हैं। इस बार महाकुंभ में काफी मात्रा ढोंढ़ भेजे जाने से किसानों को काफी फायदा पहुंचे। किसानों और इसके व्यापारियों की मानें तो मकर संक्रांति के बाद और भेजा जाना है।
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बोले किसान
इस संबंध में गांगेपुर गांव निवासी रामनिवास यादव, परसिया गांव निवासी रामलाल पटेल, भजुराम पटेल, सहबदिया गांव के श्रीराम पटेल, जोखन पटेल, विनोद पटेल, दाम महुला के अवधेश यादव, महुला गांव के प्रभुनाथ राय सहित दर्जनों किसान यह मानते हैं कि इलाहाबाद महाकुंभ में जो खर या ढोंढ़ गए हैं। इससे किसानों का भी लाभ हुआ है। उन्हें एक मुश्त धनराशि मिल गई है, जिससे वह कोई भी बड़ा काम कर सकते हैं। जबकि हर वर्ष उन्हें खरीदारों का इंतजार करना पड़ता है।
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