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गांव का विकास करने के लिए मुंबई छोड़ कर लौटे थे कैफी साहब
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फूलपुर के मेजवा में कैफी अजमी की मूर्ति पर माल्यार्पण करते एसडीएम रावेंद्र सिंह।
- फोटो : AZAMGARH
मेजवां। मशहूर शायर कैफी आजमी की 102 वीं जयंती बृहस्पतिवार को उनके पैतृक गांव मेजवां स्थित फतेह मंजिल में मिजवां वेलफेयर सोसाइटी की ओर से मनाई गई। इस दौरान गांव के विकास के लिए कैफी साहब के योगदान की चर्चा की गई। छात्राओं ने कैफी आजमी के गीत को प्रस्तुत किया।
एसडीएम फूलपुर रावेंद्र सिंह और पूर्व विधायक श्याम बहादुर सिंह यादव ने कैफी आजमी की मूर्ति पर दीप प्रज्वलित कर किया। इसके बाद पीआर गौतम, रामाशीष बरनवाल, मोहम्मद सादिक, आशुतोष त्रिपाठी, हरिमंदिर पांडेय, संयोगिता, मनोज, राजेश यादव, गोपाल, निर्मला, आदित्य शर्मा, जैकी, सीताराम, मोहम्मद कासिम, कमला सिंह, उषा, नैयर रजा, लल्लन ने कैफी आजमी की मूर्ति पर माल्यार्पण कर उनके बताए रास्ते पर चलने का संकल्प लिया। फतेह मंजिल में कैफी आजमी की ओर से इस्तेमाल की गई वस्तुओं की प्रदर्शनी लगाई गई। मुख्य अतिथि एसडीएम रावेंद्र सिंह ने कहा कि कैफी साहब मुंबई को छोड़कर अपने गांव की तरक्की के बारे में सोचा। यह बहुत बड़ी बात है। हमें उनसे नसीहत लेनी चाहिए। पूर्व विधायक श्याम बहादुर सिंह यादव ने कहा कि कैफी आजमी रेल संघर्षों से जुड़े रहे। यही वजह रही है कि आज उनकी बदौलत शाहगंज-आजमगढ़ के रास्ते मऊ के बीच लंबी दूरी की ट्रेनों का परिचालन किया जा रहा है। हरिमंदिर पांडेय ने कहा कि कैफी साहब की शायरी में गरीबों और मजलूमों का दर्द झलकता है। वे गांव का विकास चाहते थे। कैफी कालेज की बालिकाओं ने कैफी के गीत ‘हम दिवाने हम परवाने अपने वतन के अपने चमन के, अजीब आदमी वो था, प्यार का जश्न नई तरह का से मनाना होगा, गम किसी दिल में सही गम को मिटाना होगा’ पेश किया। मिजवां सोसाइटी के प्रबंधक आशुतोष त्रिपाठी ने आभार जताया। संचालन जितेंद्रहरि पांडेय ने किया।
कैफी आजमी के जीवन पर बनी फिल्म प्रदर्शित
आजमगढ़। जिला एकीकरण समिति के सचिव व मुख्य विकास अधिकारी आनंद कुमार शुक्ला की अध्यक्षता में बृहस्पतिवार को विकास भवन के सभागार में शायर कैफी आजमी की जयंती पर गोष्ठी हुई। इस दौरान अधिकारियों और जन प्रतिनिधियों ने कैफी साहब को श्रद्धासुमन अर्पित किया।
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मुख्य विकास अधिकारी, जिला विकास अधिकारी, पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष हवलदार यादव सहित जिला एकीकरण समिति के सदस्यों ने कैफी के चित्र पर माल्यार्पण किया। शिब्ली कालेज के एमए के छात्र संदीप, महताब, कन्हैयालाल और शिब्ली कालेज के अलाउद्दीन ने कैफी आजमी के गीत, नज्म एवं बंद की प्रस्तुति की। इस दौरान शायर कैफी आजमी के जीवन पर आधारित लघु फिल्म का प्रदर्शन भी किया गया। शिब्ली एकेडमी के स्कालर उमैर सिद्दीकी, जिला विकास अधिकारी, डीपीआरओ, पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष हवलदार यादव ने अपने अपने विचार प्रकट किए। सीडीओ ने कहा कि कैफी आजमी ने आधुनिक उर्दू शायरी में अपना एक खास स्थान बनाया। उनकी नज्मों और गजलों के चार संग्रह हैं, जिसमें झंकार, आखिरे-शब, आवारा सिंजदे एवं इब्लीस की मजलिसे शुरा शामिल हैं। आजमी साहब शायर, गीतकार, नाटककार, फिल्मकार, कहानीकार के साथ-साथ मजदूर सभा ट्रेड यूनियन में कार्य करते हुए कम्युनिस्ट पार्टी के एक कुशल संगठनकर्ता थे। इस मौके पर डीडीओ रविशंकर, डीपीआरओ लालजी दुबे, पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष हवलदार यादव, कन्हैया लाल, उमैर सिद्दीकी उपस्थित थे।
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एसडीएम फूलपुर रावेंद्र सिंह और पूर्व विधायक श्याम बहादुर सिंह यादव ने कैफी आजमी की मूर्ति पर दीप प्रज्वलित कर किया। इसके बाद पीआर गौतम, रामाशीष बरनवाल, मोहम्मद सादिक, आशुतोष त्रिपाठी, हरिमंदिर पांडेय, संयोगिता, मनोज, राजेश यादव, गोपाल, निर्मला, आदित्य शर्मा, जैकी, सीताराम, मोहम्मद कासिम, कमला सिंह, उषा, नैयर रजा, लल्लन ने कैफी आजमी की मूर्ति पर माल्यार्पण कर उनके बताए रास्ते पर चलने का संकल्प लिया। फतेह मंजिल में कैफी आजमी की ओर से इस्तेमाल की गई वस्तुओं की प्रदर्शनी लगाई गई। मुख्य अतिथि एसडीएम रावेंद्र सिंह ने कहा कि कैफी साहब मुंबई को छोड़कर अपने गांव की तरक्की के बारे में सोचा। यह बहुत बड़ी बात है। हमें उनसे नसीहत लेनी चाहिए। पूर्व विधायक श्याम बहादुर सिंह यादव ने कहा कि कैफी आजमी रेल संघर्षों से जुड़े रहे। यही वजह रही है कि आज उनकी बदौलत शाहगंज-आजमगढ़ के रास्ते मऊ के बीच लंबी दूरी की ट्रेनों का परिचालन किया जा रहा है। हरिमंदिर पांडेय ने कहा कि कैफी साहब की शायरी में गरीबों और मजलूमों का दर्द झलकता है। वे गांव का विकास चाहते थे। कैफी कालेज की बालिकाओं ने कैफी के गीत ‘हम दिवाने हम परवाने अपने वतन के अपने चमन के, अजीब आदमी वो था, प्यार का जश्न नई तरह का से मनाना होगा, गम किसी दिल में सही गम को मिटाना होगा’ पेश किया। मिजवां सोसाइटी के प्रबंधक आशुतोष त्रिपाठी ने आभार जताया। संचालन जितेंद्रहरि पांडेय ने किया।
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कैफी आजमी के जीवन पर बनी फिल्म प्रदर्शित
आजमगढ़। जिला एकीकरण समिति के सचिव व मुख्य विकास अधिकारी आनंद कुमार शुक्ला की अध्यक्षता में बृहस्पतिवार को विकास भवन के सभागार में शायर कैफी आजमी की जयंती पर गोष्ठी हुई। इस दौरान अधिकारियों और जन प्रतिनिधियों ने कैफी साहब को श्रद्धासुमन अर्पित किया।
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मुख्य विकास अधिकारी, जिला विकास अधिकारी, पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष हवलदार यादव सहित जिला एकीकरण समिति के सदस्यों ने कैफी के चित्र पर माल्यार्पण किया। शिब्ली कालेज के एमए के छात्र संदीप, महताब, कन्हैयालाल और शिब्ली कालेज के अलाउद्दीन ने कैफी आजमी के गीत, नज्म एवं बंद की प्रस्तुति की। इस दौरान शायर कैफी आजमी के जीवन पर आधारित लघु फिल्म का प्रदर्शन भी किया गया। शिब्ली एकेडमी के स्कालर उमैर सिद्दीकी, जिला विकास अधिकारी, डीपीआरओ, पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष हवलदार यादव ने अपने अपने विचार प्रकट किए। सीडीओ ने कहा कि कैफी आजमी ने आधुनिक उर्दू शायरी में अपना एक खास स्थान बनाया। उनकी नज्मों और गजलों के चार संग्रह हैं, जिसमें झंकार, आखिरे-शब, आवारा सिंजदे एवं इब्लीस की मजलिसे शुरा शामिल हैं। आजमी साहब शायर, गीतकार, नाटककार, फिल्मकार, कहानीकार के साथ-साथ मजदूर सभा ट्रेड यूनियन में कार्य करते हुए कम्युनिस्ट पार्टी के एक कुशल संगठनकर्ता थे। इस मौके पर डीडीओ रविशंकर, डीपीआरओ लालजी दुबे, पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष हवलदार यादव, कन्हैया लाल, उमैर सिद्दीकी उपस्थित थे।