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जेल अधीक्षक, डिप्टी जेलर और 15 बंदी रक्षक दोषी

Thu, 09 Jul 2015 11:34 PM IST
पुष्कर पांडे, आजमगढ़
पुष्कर पांडे, आजमगढ़ Updated Thu, 09 Jul 2015 11:34 PM IST
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Jail superintendent , deputy jailor and 15 prisoners convicted defender
मंडलीय जेल में 25 मई की रात चलाए गए तलाशी अभियान के दौरान मिले 54 मोबाइल फोन के मामले में जेल अधीक्षक, डिप्टी जेलर और 15 बंदी रक्षकों को जिम्मेदार ठहराया गया है। यह जानकारी डीआईजी जेल आरपी सिंह ने ‘अमर उजाला’ से बातचीत में दी।
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उन्होंने बताया कि जांच रिपोर्ट तैयार हो गई है। इसे जल्द ही उच्चाधिकारियों के पास भेज दिया जाएगा। रिपोर्ट में उन्होंने लिखा है कि यदि जेल के जिम्मेदार अफसरों ने नियमित रूप से बैरकों और मुलाकात बंदियों की तलाशी कराई होती तो इतनी बड़ी चूक न होती।
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प्रदेश की जेलों में मोबाइल, नशीले पदार्थ सहित अन्य आपत्तिजनक वस्तुओं की बरामदगी आम बात हो गई है, मगर कारागार मंत्री बलराम यादव के गृह जिले में स्थित जेल में मोबाइल का जखीरा पकड़े जाने से अपराधियों के आगे जेल कर्मियों की लाचारी सामने आ गई थी। मंडलीय जेल में 25 मई की शाम बंदियों के दो गुटों में भिड़ंत हो गई थी। स्थिति संभालने के लिए एसएसपी आकाश कुलहरि फोर्स के साथ जेल में पहुंचे।
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कुछ बंदी रक्षकों की शिकायत पर जब उन्होंने रात से लेकर चार बजे भोर तक कई बैरकों की तलाशी कराई तो जगह-जगह छुपाकर रखे गए एक-एक करके 54 मोबाइल फोन बरामद हुए। इस मामले में शासन ने जेलर सीपी त्रिपाठी और पांच बंदी रक्षकों को निलंबित कर दिया था। साथ ही जांच डीआईजी जेल आरपी सिंह को सौंपी थी। उन्होंने दूसरे ही दिन जेल पहुंचकर बंदियों और जेल कर्मियों के बयान दर्ज किए।


बकौल डीआईजी, जांच में पता चला कि जेल प्रशासन ने तलाशी की प्रक्रिया प्रतिदिन नहीं अपर्नाई। परिसर और बंदियों के बैरकों की 24 घंटे में चार बार तलाशी होनी चाहिए। अदालत से आते-जाते, मुलाकात घर से लौटते और शाम को बंद होने के बाद एक-एक बैरकों को खंगालने का नियम है, मगर अधिकारी और जेलकर्मी ड्यूटी के प्रति लापरवाह रहे। जेल अधीक्षक और बाकी जिम्मेदार अफसर यदि नियमित रूप से बैरकों और मुलाकात बंदियों की तलाशी कराते तो इतनी बड़ी चूक न होती।
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