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सिंचाई विभाग ने किए झूठे दावे, नहर की कहानी किसानों की जुबानी

Wed, 21 Mar 2018 11:22 PM IST
ब्यूरो,अमर उजाला,आजमगढ़
ब्यूरो,अमर उजाला,आजमगढ़ Updated Wed, 21 Mar 2018 11:22 PM IST
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Irrigation Department has false claims for canal
आजमगढ़ में सूखी पड़ी नहर - फोटो : अमर उजाला
प्रदेश सरकार किसानों के हित के लिए अनेक योजनाओं का संचालन कर रही है। लेकिन उसके ही अधिकारी और कर्मचारी उसकी मंशा पर पानी फेरने में जुटे हुए हैं। सिंचाई विभाग द्वारा नहरों में भरपूर पानी देने का दावा किया जा रहा है लेकिन किसान अधिकारियों के दावों को झूठा बता रहे हैं।
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विभाग का दावा है कि पूरे सीजन किसानों को समय पर पानी उपलब्ध कराया गया है। वर्तमान में पानी की जरूरत नहीं है इसलिए पानी को दो दिन पूर्व बंद कराया गया है। लेकिन अभी भी नहरों में पानी है। वहीं किसानों का कहना है कि दिसंबर माह से गायब हुआ नहरों का पानी मार्च महीने में आया।
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जब पानी की सबसे ज्यादा जरूरत थी तो नहरों में पानी नहीं आया। जिसके कारण हमें दूसरे साधनों से फसलों की सिचाई करनी पड़ी। इतना ही नहीं विभाग के अधिकारी शिकायत का निस्तारण भी गलत तरीके से करके भ्रमित करने का कार्य कर हे हैँ।
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अहरौला क्षेत्र के किसानों ने नहर में पानी न होने की शिकायत मुख्यमंत्री और सिंचाई मंत्री को रजिस्टर्ड पत्र भेजकर की। इस पर भाजपा सूचना प्रकोष्ठ के जिला प्रभारी डा. रामसिंह पालीवाल ने वताया कि किसानों की शिकायत पर हमने 15 फरवरी को पानी के लिए अधीक्षण अभियंता से फोन पर और प्रमुख सचिव से आन लाईन और लिखित शिकायत की।


इस पर इन लोगों ने शिकायत का समाधान किया जाना बताया लेकिन हुआ कुछ नहीं। दोबारा हमने मुख्यमंत्री और सिचाई मंत्री से गलत सूचना और चार माह से नहरों में पानी न होने की शिकायत की। जिस पर मुख्यमंत्री कार्यालय से दोषियों के खिलाफ कार्रवाई कर 24 मार्च तक अवगत कराने का निर्देश दिया गया।

भकुही के किसान प्रदीप सिंह ने बताया कि जब अधिकारियों से बात करने पर पता चला कि पानी आने में देर है। तो 10 हजार रूपये खर्च कर आठ बीघा गेहूंकी सिचाई पंपिग सेट किया। गन्ने की पेड़ी में पानी की जरूरत है, सूर्यमुखी की वुवाई हुई है नहर में पानी नहीं। नहरों मे पानी न होने से सारे काम प्रभावित है। समाज सेवी लक्ष्मी चौबे, जयरामसिंह पालीवाल, राकेश सिंह, ओमकार पांडेय, गोरख चौबे, विनोद सिंह आदि ने बताया कि नहर में पानी न होने से किसानी के काम प्रभावित हो रहे है।


शारदा सहायक खंड-32 की कुल 184 टेल जिले में हैं। जिनसे लगभग 73000 हेक्टेअर खेतों में सिंचाई के लिए किसान निर्भर हैं। फरवरी में 15 दिन के लिए नहर बंद थी बाकी पूरे समय नहर में पानी छोड़ा गया है। वर्तमान में पानी की जरूरत नहीं है जिसके कारण दो दिन पहले पानी को बंद किया गया है। 10 मई से यह दोबारा पानी नहरों में आना शुरू हो जाएगा। हमें किसी शिकायत की जानकारी नहीं हैं हो सकता है यह टांडा डिविजन का मामला हो। क्योंकि अतरौलिया टांडा डिविजन में आता है। -आरके पांडेय, अधिशासी अभियंता, शारदा सहायक खंड-32।
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