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अनाधिकृत रूप से ट्राली और फावड़ा देने के मामले में बैठी जांच
ब्यूरो,अमर उजाला,आजमगढ़
Updated Wed, 07 Feb 2018 12:15 AM IST
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- फोटो : amar ujala
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बिना किसी शासनादेश प्रति सफाईकर्मी ट्राली और फावड़ा आदि उपलब्ध के नाम पर दो हजार की कीमत का सामान प्रधानों पर 15हजार में थोपने और इसका भुगतान कराने के मामले में मुख्य विकास अधिकारी की ओर से जांच बिठा दी गई है।
तीन सदस्यीय कमेटी को इस फर्जीवाड़े में अधिकारियों और कर्मचारियों की संलिप्तता की जांच कर सात दिन के अंदर रिपोर्ट देने के आदेश दिए गए हैं। बिना किसी शासनादेश उपलब्ध कराए गए सामानों की पीडब्ल्यूडी के रेट से आंकलन करने को कहा गया है। प्रारंभिक जांच में जिला पंचायती राज अधिकारी के आदेश से ये फर्जीवाड़ा होना सामने आया है, जिसके बारे में जिलाधिकारी और अन्य अधिकारियों को कोई जानकारी नहीं दी गई थी।
पिछले दिनों पवई और फूलपुर ब्लाक की ग्राम पंचायतों में अंबेडकरनगर की एक प्राइवेट फर्म की ओर से प्रति सफाईकर्मी 15 हजार रुपये लेकर मात्र दो हजार की ट्राली और फांवड़ा बांटे जाने और ग्राम पंचायतों की ओर से इसका भुगतान करने का मामले सामने आने के बाद मुख्य विकास अधिकारी ने इस पर रोक लगा दी थी।
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मामले की जांच शुरू करते हुए भुगतान की रिकवरी संबंधित प्रधान और सचिव से कराने की बात कही थी। फूलपुर के सभी 89 ग्राम पंचायतों में इसकी पेमेंट प्रधानों की ओर से की जा चुकी थी। पवई ब्लाक में अभी सबी ने पेमेंट नहीं की थी।
प्रधानों का कहना था कि ब्लाक के अधिकारियों प्रधानों से इस सामान के लिए 15 हजार के चेक कटवाए थे। 30 किलो वजन की ट्राली और एक फावड़ा की कुल कीमत दो हजार से ज्यादा नहीं बताई जा रही थी।
प्रारंभिक जांच में इस संबंध में जिला पंचायती राज अधिकारी जितेंद्र नाथ मिश्रा की ओर से नौ जून 2017 के एक आदेश से ये फर्जीवाड़ा होना सामने आया है। मुख्य विकास अधिकारी ने मामले की गंभीरता को देखते हुए अनाधिकृत रूप से एक फर्म की ओर से इन सामानों की आपूर्ति कर लाखों का चूना लगाने के मामले में अधिकारियों और कर्मचारियों संलिप्तता की जांच के लिए ती सदस्यीय कमेटी का गठन कर दिया है।
इसमें डीएमओ साहित्या निकस सिंह को अध्यक्ष बनाते हुए उपायुक्त उद्योग को सदस्य और सहायक अभियंता डीआरडीए एनबी सिंह को तकनीकि सदस्य बनाया गया है। कमेटी को उपलब्ध कराए गए सामानों की पीडब्ल्यूडी के रेट के अनुसार आंकलन भी करने को कहा गया है। सात दिन के भीतर रिपोर्ट देने के निर्देश दिए गए हैं।
सीडीओ और डीएम को नहीं थी आदेश की जानकारी
आजमगढ़। मुख्य विकास अधिकारी अभिषेक सिंह ने बताया कि प्रारंभिक जांच में पता चला है कि डीपीआरओ की ओर से नौ जून 2017 को एक आदेश सभी एडीओ पंचायत को संबोधित करते हुए जारी किया था।
इस अप्रत्याशित तरीके से सफाई कर्मचारी संगठन के ब्लाक अध्यक्ष और जिलाध्यक्ष को भी भेजा गया था। आदेश में राज्य वित्त एवं 14वें वित्त की कार्ययोजना में बजट का प्रावधान कर सफाई किट उपलब्ध कराने के आदेश दिए गए थे।
मजे की बात है कि आदेश की कापी जिलाधिकारी और सीडीओ को भी करने की बात कही गई थी, लेकिन सीडीओ और डीएम कार्यालय तक ये आदेश पहुंचा ही नहीं था। अमर उजाला ने पांच फरवरी के अंक में जिला पंचायती राज कार्यालय से ये आदेश जारी होने का खुलासा कर दिया था। आदेश के बारे में डीएम और सीडीओ को जानकारी नहीं होने से मामले में डीपीआरओ की गर्दन फंसती नजर आ रही है।
प्रत्येक प्रधानों का होगा अलग-अलग बयान
आजमगढ़। मुख्य विकास अधिकारी ने जांच टीम को पवई और फूलपुर ब्लाक के सभी प्रधानों का ब्लाक मुख्यालय पर अलग-अलग बयान लेने के आदेश दिए हैं। इसमें इस बात की जांच की जाएगी कि इन सामानों को लेने और भुगतान करने के लिए किस अधिकारी और कर्मचारी की ओर से दबाव बनाया गया था। जांच टीम को एक हफ्ते के भीतर रिपोर्ट देने के निर्देश दिए गए हैं।
बिना अनुमति और शासनादेश के सफाईकर्मियों को 15 हजार में ट्राली, फावड़े आदि की सप्लाई करने के मामले की प्रारंभिक जांच में डीपीआरओ की ओर से एक आदेश जारी होने का मामला सामने आया है। प्रकरण गंभीर है। डीएमओ की अध्यक्षता में इसकी जांच के लिए कमेटी का गठन कर दिया गया है। एक सप्ताह में रिपोर्ट देने के निर्देश दिए गए हैं। -अभिषेक सिंह, सीडीओ
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तीन सदस्यीय कमेटी को इस फर्जीवाड़े में अधिकारियों और कर्मचारियों की संलिप्तता की जांच कर सात दिन के अंदर रिपोर्ट देने के आदेश दिए गए हैं। बिना किसी शासनादेश उपलब्ध कराए गए सामानों की पीडब्ल्यूडी के रेट से आंकलन करने को कहा गया है। प्रारंभिक जांच में जिला पंचायती राज अधिकारी के आदेश से ये फर्जीवाड़ा होना सामने आया है, जिसके बारे में जिलाधिकारी और अन्य अधिकारियों को कोई जानकारी नहीं दी गई थी।
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पिछले दिनों पवई और फूलपुर ब्लाक की ग्राम पंचायतों में अंबेडकरनगर की एक प्राइवेट फर्म की ओर से प्रति सफाईकर्मी 15 हजार रुपये लेकर मात्र दो हजार की ट्राली और फांवड़ा बांटे जाने और ग्राम पंचायतों की ओर से इसका भुगतान करने का मामले सामने आने के बाद मुख्य विकास अधिकारी ने इस पर रोक लगा दी थी।
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मामले की जांच शुरू करते हुए भुगतान की रिकवरी संबंधित प्रधान और सचिव से कराने की बात कही थी। फूलपुर के सभी 89 ग्राम पंचायतों में इसकी पेमेंट प्रधानों की ओर से की जा चुकी थी। पवई ब्लाक में अभी सबी ने पेमेंट नहीं की थी।
प्रधानों का कहना था कि ब्लाक के अधिकारियों प्रधानों से इस सामान के लिए 15 हजार के चेक कटवाए थे। 30 किलो वजन की ट्राली और एक फावड़ा की कुल कीमत दो हजार से ज्यादा नहीं बताई जा रही थी।
प्रारंभिक जांच में इस संबंध में जिला पंचायती राज अधिकारी जितेंद्र नाथ मिश्रा की ओर से नौ जून 2017 के एक आदेश से ये फर्जीवाड़ा होना सामने आया है। मुख्य विकास अधिकारी ने मामले की गंभीरता को देखते हुए अनाधिकृत रूप से एक फर्म की ओर से इन सामानों की आपूर्ति कर लाखों का चूना लगाने के मामले में अधिकारियों और कर्मचारियों संलिप्तता की जांच के लिए ती सदस्यीय कमेटी का गठन कर दिया है।
इसमें डीएमओ साहित्या निकस सिंह को अध्यक्ष बनाते हुए उपायुक्त उद्योग को सदस्य और सहायक अभियंता डीआरडीए एनबी सिंह को तकनीकि सदस्य बनाया गया है। कमेटी को उपलब्ध कराए गए सामानों की पीडब्ल्यूडी के रेट के अनुसार आंकलन भी करने को कहा गया है। सात दिन के भीतर रिपोर्ट देने के निर्देश दिए गए हैं।
सीडीओ और डीएम को नहीं थी आदेश की जानकारी
आजमगढ़। मुख्य विकास अधिकारी अभिषेक सिंह ने बताया कि प्रारंभिक जांच में पता चला है कि डीपीआरओ की ओर से नौ जून 2017 को एक आदेश सभी एडीओ पंचायत को संबोधित करते हुए जारी किया था।
इस अप्रत्याशित तरीके से सफाई कर्मचारी संगठन के ब्लाक अध्यक्ष और जिलाध्यक्ष को भी भेजा गया था। आदेश में राज्य वित्त एवं 14वें वित्त की कार्ययोजना में बजट का प्रावधान कर सफाई किट उपलब्ध कराने के आदेश दिए गए थे।
मजे की बात है कि आदेश की कापी जिलाधिकारी और सीडीओ को भी करने की बात कही गई थी, लेकिन सीडीओ और डीएम कार्यालय तक ये आदेश पहुंचा ही नहीं था। अमर उजाला ने पांच फरवरी के अंक में जिला पंचायती राज कार्यालय से ये आदेश जारी होने का खुलासा कर दिया था। आदेश के बारे में डीएम और सीडीओ को जानकारी नहीं होने से मामले में डीपीआरओ की गर्दन फंसती नजर आ रही है।
प्रत्येक प्रधानों का होगा अलग-अलग बयान
आजमगढ़। मुख्य विकास अधिकारी ने जांच टीम को पवई और फूलपुर ब्लाक के सभी प्रधानों का ब्लाक मुख्यालय पर अलग-अलग बयान लेने के आदेश दिए हैं। इसमें इस बात की जांच की जाएगी कि इन सामानों को लेने और भुगतान करने के लिए किस अधिकारी और कर्मचारी की ओर से दबाव बनाया गया था। जांच टीम को एक हफ्ते के भीतर रिपोर्ट देने के निर्देश दिए गए हैं।
बिना अनुमति और शासनादेश के सफाईकर्मियों को 15 हजार में ट्राली, फावड़े आदि की सप्लाई करने के मामले की प्रारंभिक जांच में डीपीआरओ की ओर से एक आदेश जारी होने का मामला सामने आया है। प्रकरण गंभीर है। डीएमओ की अध्यक्षता में इसकी जांच के लिए कमेटी का गठन कर दिया गया है। एक सप्ताह में रिपोर्ट देने के निर्देश दिए गए हैं। -अभिषेक सिंह, सीडीओ