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सूडान से लौटे भारतीयों की आपबीती: 'डर से नहीं आती थी नींद, घर की आती थी याद, देवदूत के रूप में आई देश नौसेना'
Fri, 28 Apr 2023 01:48 PM IST
किरन रौतेला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आजमगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आजमगढ़
Published by: किरन रौतेला
Updated Fri, 28 Apr 2023 01:48 PM IST
सार
सूडान की स्थिति हो गई थी काफी भयावहआजमगढ़। मुबारकपुर के मोईनाबाद के मनजीत ने बताया कि वह 21 सितंबर को स्टील प्लांट में काम करने के गए थे। बताया कि सूडान में दंगा होने लगा। स्थिति काफी भयावह हो गई थी।
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सूडान से लौटे भारतीयों की आपबीती
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
एक सप्ताह तक नहीं सोए थे, सुबह- शाम भोजन मिल जाता था, लेकिन डर और भय का आलम ऐसा था कि रूह कांप उठती थी। जब देश की नौ सेना की जहाज में सवार हुए तो जान में जान आई। देश वापसी पर सरकार और प्रधानमंत्री का जितना तहे दिल से धन्यवाद किया जाए, कम है। यह कहना था सूडान से घर वापस लौटे लोगों का।
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सूडान की स्थिति हो गई थी काफी भयावहआजमगढ़। मुबारकपुर के मोईनाबाद के मनजीत ने बताया कि वह 21 सितंबर को स्टील प्लांट में काम करने के गए थे। बताया कि सूडान में दंगा होने लगा। स्थिति काफी भयावह हो गई थी। अब समझ में नहीं आ रहा था कि कैसे घर पहुंचा जाए। उन्होंने बताया कि 23 अप्रैल को सूडान सरकार और भारतीय दूतावास के सहयोग से सूडान पोर्ट पर लाया गया।
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घर पहुंचकर सरकार का जताया आभार
- फोटो : अमर उजाला
वहां पर एक रात पोर्ट के बाहर स्कूल में ठहराया गया। यहां से 25 अप्रैल को इंडियन नेवी समुद्री जहाज पर सवार होकर आइनस सुमेंदा सऊदी के जिद्दा एयर पोर्ट लाया गया। जिद्दा एयर पोर्ट पर सभी भारतीयों का स्वागत किया गया। यहां से हटकर एयर पोर्ट से कुछ दूरी पर इंडियन नेशनल स्कूल जिद्दान में सभी भारतीय को रोक कर रखा गया। जहां समय पर भोजन मिल जाया करता था। अगले दिन 26 अप्रैल को जिद्दा एयर पोर्ट से फ्लाइट हुई और वहां से भारत के इंदिरा एयर पोर्ट दिल्ली लाया गया।
सूडान में गृहयुद्ध
- फोटो : सोशल मीडिया
यहां पर यूपी बस से उत्तर प्रदेश भवन पर लाया गया। यहां भोजन करने के बाद बस से बनारस लाया गया। जहां से जिलाधिकारी ने सभी को चार पहिया वाहन से घर पहुंचाया। जीयनपुर के आसपुर घांघरा लाटघाट निवासी अजीत पटेल पुत्र विदेशी ने बताया कि वह बीते 23 मई को ओमेगा स्टील कंपनी में काम करने गए थे, लेकिन सूडान में गृह युद्ध की भयावहता को देख रूह कांप उठी। इस दृश्य को देख और सुनकर डर से बीते कई दिनों तक सोया ही नहीं था। अब बस घर पहुंचने की चिंता सता रही थी। जब नौसेना का जहाज आया तो वह दृश्य देवदूत से कम नहीं था, जिन्होंने वहां से निकालकर सुरक्षित आज घर पहुंचाया। इसके लिए अजीत की मां चंद्रकला देवी, पत्नी ओशीला व अन्य परिजनों ने सरकार का धन्यवाद दिया।