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कई मंत्री देने वाली सीट पर कब्जे की होड़
azamgarah
Updated Fri, 10 Feb 2017 11:42 PM IST
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विधानसभा चुनाव में कई मंत्रियों को देने वाली मुबारकपुर सीट पर कब्जे की होड़ प्रमुख पार्टियों के प्रत्याशियों में लगी हुई है। इस विधान सभा को पूर्व केंद्रीय इस्पात एवं खनिज मंत्री, आबकारी मंत्री, लघु उद्योग मंत्री देने का गौरव प्राप्त है। कभी चंद्रजीत यादव, यशवंत सिंह जैसे दिग्गज नेता इस क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया करते थे। सपा, बसपा और भाजपा के रणनीतिकार मतदाताओं को साधने का काम कर रहे हैं। इन तीन दलों में भाजपा को छोड़ सपा और बसपा के पुराने नेताओं पर दांव लगाया है।
जिला मुख्यालय से 18 किलोमीटर दूर स्थित मुबारकपुर क्षेत्र रेशम उद्योग और इकलौते सठियांव चीनी मिल के लिए जाना जाता है। मऊ जिले की सीमा से लगा मुबारकपुर क्षेत्र के रेशम उद्योग की ख्याति दूर-दूर तक है। यहीं के रेशम से तैयार हुई साड़ियों को वाराणसी साड़ी के नाम से जाना जाता है लेकिन अब यह उद्योग मंदी के दौर से गुजर रहा है। बुनकरी से जुड़े लोग गर्दिश के दौर से गुजर रहे हैं। इनके विकास के लिए वादे बहुत किए गए लेकिन वह अभी तक धरातल पर नहीं उतर सका।
आजादी के बाद 1957 में हुए दूसरे चुनाव में मुबारकपुर का प्रतिनिधित्व भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी से चंद्रजीत यादव ने किया। वह इस क्षेत्र से 1962 का भी विधान सभा चुनाव जीते थे। बाद में वह केंद्रीय राजनीति में सक्रिय हो गए। अपनी राजनीतिक पकड़ का फायदा उठाते हुए चंद्रजीत यादव ने वर्ष 1974 में सठियांव चीनी मिल की स्थापना करवाई। इसके जरिए जिले के लोगों को जहां रोजगार मिला।
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वहीं किसानों को भी सहूलियत मिली। बाद में उपेक्षा के चलते चीनी मिल बंद हो गई थी जो सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव के प्रयास से चालू हुई। चर्चा इस बात की है कि क्षेत्र के विकास के लिए कुछ कुछ दिग्गजों को छोड़ किसी ने क्षेत्र के लिए कुछ खास नहीं किया। अब जब चुनाव का मौसम आया है तो क्षेत्र के चट्टी चौराहा, चाय पान की दूकानों पर चुनावी चर्चा चल पड़ी है। चुनावी चर्चा के बीच साड़ी उद्योग को बढ़ावा देने का मुद्दा उठ रहा है।
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जिला मुख्यालय से 18 किलोमीटर दूर स्थित मुबारकपुर क्षेत्र रेशम उद्योग और इकलौते सठियांव चीनी मिल के लिए जाना जाता है। मऊ जिले की सीमा से लगा मुबारकपुर क्षेत्र के रेशम उद्योग की ख्याति दूर-दूर तक है। यहीं के रेशम से तैयार हुई साड़ियों को वाराणसी साड़ी के नाम से जाना जाता है लेकिन अब यह उद्योग मंदी के दौर से गुजर रहा है। बुनकरी से जुड़े लोग गर्दिश के दौर से गुजर रहे हैं। इनके विकास के लिए वादे बहुत किए गए लेकिन वह अभी तक धरातल पर नहीं उतर सका।
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आजादी के बाद 1957 में हुए दूसरे चुनाव में मुबारकपुर का प्रतिनिधित्व भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी से चंद्रजीत यादव ने किया। वह इस क्षेत्र से 1962 का भी विधान सभा चुनाव जीते थे। बाद में वह केंद्रीय राजनीति में सक्रिय हो गए। अपनी राजनीतिक पकड़ का फायदा उठाते हुए चंद्रजीत यादव ने वर्ष 1974 में सठियांव चीनी मिल की स्थापना करवाई। इसके जरिए जिले के लोगों को जहां रोजगार मिला।
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वहीं किसानों को भी सहूलियत मिली। बाद में उपेक्षा के चलते चीनी मिल बंद हो गई थी जो सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव के प्रयास से चालू हुई। चर्चा इस बात की है कि क्षेत्र के विकास के लिए कुछ कुछ दिग्गजों को छोड़ किसी ने क्षेत्र के लिए कुछ खास नहीं किया। अब जब चुनाव का मौसम आया है तो क्षेत्र के चट्टी चौराहा, चाय पान की दूकानों पर चुनावी चर्चा चल पड़ी है। चुनावी चर्चा के बीच साड़ी उद्योग को बढ़ावा देने का मुद्दा उठ रहा है।