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फोरलेन पर फर्राटा भरने की चाह में कमर और फेफड़ाें की फजीह

Sat, 17 Jul 2021 09:54 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Sat, 17 Jul 2021 09:54 PM IST
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In the desire to fill the forelane, the waist and lungs fuzzy
आजमगढ़। सपा सरकार में वाराणसी से लुंबिनी तक सफर आसान बनाने के लिए फोरलेन का निर्माण 2016 में शुरू हुआ। तीन साल पहले ही इस कार्य को पूरा होना था लेकिन आज तक इसका निर्माण पूरा नहीं हो सका। जिसका परिणाम है कि आज भी जनपद की जनता हिचकोले खाते हुए वाराणसी तक का सफर करने को विवश हैं।
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पर्यटन को ध्यान में रखते हुए सपा सरकार ने वाराणसी से लुंबिनी तक के मार्ग को फोरलेन बनाने का निर्णय लिया। इस निर्णय के तहत 2016 में इसके निर्माण की शुरूआत हुई। इस कार्य को 2018 में ही पूरा होना था। निर्धारित समयसीमा से लगभग तीन साल अधिक का समय बीत चुका है लेकिन अब तक कार्यदायी संस्था द्वारा इसके निर्माण को पूरा नहीं किया जा सका है। जिसका परिणाम है कि आज भी लोग इस मार्ग से हिचकोले खाते हुए सफर करने को विवश हैं। क्योंकि फोरलेन के चक्कर में पुराने मार्ग की मरम्मत नहीं की जा रही है। वाराणसी जाने और आने वाले मार्ग की हालत रानी की सराय तो काफी सुधर चुकी है लेकिन रानी की सराय के बाद इसे भवरनाथ तक जोड़ने का कार्य काफी धीमी गति से हो रहा है। अभी संपर्क मार्गों पर बनाए गए ओवरब्रिज को मिट्टी भराई कर जोड़ने का कार्य पूरा नहीं हो सका है। जिसके कारण जनपद में होने वाले कई कार्य बाधित है। जो इस मार्ग के बनने के बाद ही शुरू हो सकते हैं।
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नहीं शुरू हो सकी आरओबी की मरम्मत
आजमगढ़। नगर के बेलइसा में आरओबी की निर्माण जबसे हुआ तबसे इसकी मरम्मत का कार्य नहीं हुआ है। इसके गाटरों को बदला जाना बहुत जरूरी है। फोरलेन के जरिए शहर का बाईपास निकाला जा रहा है। पीडब्ल्यूडी इंतजार कर रहा है कि इसका निर्माण पूरा हो और वह मुख्य मार्ग को बंद कर गाड़ियों को बाईपास के रास्ते भवरनाथ पर निकालकर आरओबी की मरम्मत कर सके।
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आजमगढ़-वाराणसी मार्ग की हालत काफी खस्ता है। फोरलेन के चक्कर में पुराने मार्ग की मरम्मत नहीं की जा रही है।
- पीयूष।
पुराने मार्ग की हालत बाजारों में सबसे ज्यादा खराब है। बड़े-बड़े गड्ढे होने के कारण इन मार्गों पर चलना दूभर हो गया है।
- संजय सिंह।
जिन बाजारों के बाहर बाईपास बन चुका है वहां पर सफर आसान है लेकिन कई जगहों पर इसकी हालत बहुत खस्ता है।
- अजय सराफ।
अगर यही हालत रही तो इस मार्ग को पूरा होने में कई महीने लगेंगे। कंपनी द्वारा काफी धीमी गति से काम किया जा रहा है।
जयप्रकाश।
2016 में जमीन अर्जन के साथ इसका निर्माण शुरू हुआ लेकिन भूमि अधिग्रहण मुख्य मुद्दा रहा। कहीं जमीन कब्जे में आई तो किसान विरोध में उतर आए। जौनपुर में किसान कोर्ट चले गए हैं। जिसके कारण इस मार्ग को पूरा करने में देरी हो रही है। कुछ गांवों में चकबंदी चल रही थी, जिसके कारण भी कार्य प्रभावित हुआ। - ललित कुमार, टेक्नीकल मैनेजर, एनएचएआई।
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