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वर्क कल्चर के अभाव में दम तोड़ रहे उद्योग-धंधे
ब्यूरो/अमर उजाला, आजमगढ़
Updated Thu, 17 Sep 2015 12:20 AM IST
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सपने हैं, योजनाएं हैं...और उत्साही उद्यमी हैं तो फिर आखिर क्या कमी है जो सूक्ष्म, लघु, मध्यम उद्योग का सेक्टर निराश-हताश है। रोज कोई न कोई इकाई बंद हो रही है या फिर कोई न कोई उद्यमी पलायन कर रहा है...जो तमाम तूफानों के बाद भी डटे हैं वो कराह रहे हैं। दूसरे प्रदेशों ने इनको उंगली पकड़ाई तो उड़ान के लिए आकाश भी कम पड़ गया। उत्पादन के इस सेक्टर ने प्रदेश में भी अपनी ताकत हर मंच पर साबित की है। भविष्य में यह प्रदेश की अर्थव्यवस्था मजबूत करने और बेरोजगारी मिटाने में सबसे अधिक योगदान दे सकता है, बशर्ते कोई उनका असली हमदर्द बने ...और फिर डटा रहे।
प्रदेश सरकार का ‘मेक इन यूपी’ का नारा ‘मेक इन इंडिया’ की तर्ज पर सुनने पर तो अच्छा लगता है लेकिन यह साकार तब होगा जब यूपी में उद्योगों से संबंधित विभागों में वर्क कल्चर हो। जब तक सिस्टम की कमियों और उद्यमियों के लिए एकल खिड़की, कम टैक्स, सस्ता लोन, तकनीकी सहायता समेत तमाम आवश्यक सुविधाओं की व्यवस्था नहीं की जाती तब तक इस बारे में बात करना भी बेमानी है।
बिजली की कमी तो उद्योगों को जिंदा दफन कर ही रही है। बात तभी बनेगी जब शासन-प्रशासन की ओर से सच्चे मन से प्रयास होंगे। अपनी समस्याओं, प्रदेश में अपने योगदान को भी साझा किया। आत्म विश्वास से भरे दोनों जिलों के प्रमुख उद्यमियों में सबसे अधिक संख्या युवाओं की रही। यह इस बात का संकेत है कि यहां इच्छाशक्ति की कमी किसी में नहीं है। हर कोई टैक्स और सरकारी मशीनरी से दुखी दिखा।
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सरकारी मशीनरी के कामकाज के तरीके पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि अब रिश्वतखोरी और विभागों के चक्कर लगाने से उन्हें मुक्ति चाहिए। अगर सरकार इस दिशा में कदम उठाती है तो वह भी अपने रोजगार को नया आयाम देने का प्रयास करेंगे। उद्यमियों ने कहा कि उद्योगों पर कई तरह का टैक्स देना पड़ता उसके स्थान पर एकल टैक्स की व्यवस्था करनी चाहिए।
उद्यमियों के लिए विभागों में अलग से एकल काउंटर बनाया जाए जहां पर उनकी समस्याओं का समाधान किया जाए। बिजली की पर्याप्त व्यवस्था के साथ सरकारी सुविधाओं को व्यवसाय जुड़े लोगों तक पहुंचाया जाए। व्यवसायियों को अपने तैयार माल बेचने के लिए बाजार की व्यवस्था की जाए।
साथ ही क्षेत्र में एक ऐसे टेक्निकल इंस्टीट्यूट की स्थापना की जाए ताकि प्रशिक्षित कर्मचारी उद्यमियों को मिल सकें और देश-दुनिया से प्र्रतिस्पर्धा कर सकें। प्रोत्साहन और पहचान दिलाने की योजनाओं को भी सक्रिय करना होगा ताकि अधिक से अधिक युवा नौकरी के बजाय इस ओर आएं। अगर कुछ ऐसा हो जाए तो उद्यमी अपने उद्योग को एक नई ऊंचाई प्रदान करने के लिए कृतसंकल्प हैं।
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प्रदेश सरकार का ‘मेक इन यूपी’ का नारा ‘मेक इन इंडिया’ की तर्ज पर सुनने पर तो अच्छा लगता है लेकिन यह साकार तब होगा जब यूपी में उद्योगों से संबंधित विभागों में वर्क कल्चर हो। जब तक सिस्टम की कमियों और उद्यमियों के लिए एकल खिड़की, कम टैक्स, सस्ता लोन, तकनीकी सहायता समेत तमाम आवश्यक सुविधाओं की व्यवस्था नहीं की जाती तब तक इस बारे में बात करना भी बेमानी है।
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बिजली की कमी तो उद्योगों को जिंदा दफन कर ही रही है। बात तभी बनेगी जब शासन-प्रशासन की ओर से सच्चे मन से प्रयास होंगे। अपनी समस्याओं, प्रदेश में अपने योगदान को भी साझा किया। आत्म विश्वास से भरे दोनों जिलों के प्रमुख उद्यमियों में सबसे अधिक संख्या युवाओं की रही। यह इस बात का संकेत है कि यहां इच्छाशक्ति की कमी किसी में नहीं है। हर कोई टैक्स और सरकारी मशीनरी से दुखी दिखा।
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सरकारी मशीनरी के कामकाज के तरीके पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि अब रिश्वतखोरी और विभागों के चक्कर लगाने से उन्हें मुक्ति चाहिए। अगर सरकार इस दिशा में कदम उठाती है तो वह भी अपने रोजगार को नया आयाम देने का प्रयास करेंगे। उद्यमियों ने कहा कि उद्योगों पर कई तरह का टैक्स देना पड़ता उसके स्थान पर एकल टैक्स की व्यवस्था करनी चाहिए।
उद्यमियों के लिए विभागों में अलग से एकल काउंटर बनाया जाए जहां पर उनकी समस्याओं का समाधान किया जाए। बिजली की पर्याप्त व्यवस्था के साथ सरकारी सुविधाओं को व्यवसाय जुड़े लोगों तक पहुंचाया जाए। व्यवसायियों को अपने तैयार माल बेचने के लिए बाजार की व्यवस्था की जाए।
साथ ही क्षेत्र में एक ऐसे टेक्निकल इंस्टीट्यूट की स्थापना की जाए ताकि प्रशिक्षित कर्मचारी उद्यमियों को मिल सकें और देश-दुनिया से प्र्रतिस्पर्धा कर सकें। प्रोत्साहन और पहचान दिलाने की योजनाओं को भी सक्रिय करना होगा ताकि अधिक से अधिक युवा नौकरी के बजाय इस ओर आएं। अगर कुछ ऐसा हो जाए तो उद्यमी अपने उद्योग को एक नई ऊंचाई प्रदान करने के लिए कृतसंकल्प हैं।