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उत्तर-पश्चिम की चली हवा तो टिड्डी दल का हमला आजमगढ़ में
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आजमगढ़। प्रयागराज में टिड्डी दल प्रवेश कर चुका है। वहां से प्रतापगढ़ और कौशांबी पहुंचने की आशंका है। जौनपुर को सक्रिय रहने के लिए निर्देश दिए गए है। जिला कृषि रक्षा अधिकारी डॉ. उमेश कुमार गुप्ता ने बताया कि आजमगढ़ में हवा उत्तर-पश्चिम की चलती है तो टिड्डी दल की आने की आशंका रहेगी।
उन्होंने कहा कि जनपद में कहीं कहीं गन्ने, मक्का, चरी और धान की नर्सरी के खेतों में ग्रास हॉपर कीट के प्रकोप से नुकसान पहुंच रहा है तो इसके उपाय करें। ये भी लगभग टिड्डी के समान होते हैं लेकिन इनका आकार छोटा होता है। इसके नियंत्रण के लिए किसान एजाडीरेक्टीन (नीम ऑयल) 1.50 से 2.00 लीटर या क्लारोपायरीफॉस 20 प्रतिशत ईसी को 1.25 लीटर मात्रा प्रति हेक्टेयर 600 से 700 लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करें। टिड्डी दल एक साथ लाखों की संख्या में गमन करते हैं। जिस क्षेत्र में इनका आक्रमण होता है वहां की हरियाली चट कर विरान कर देते हैं। टिड्डी दल प्राय: सूर्यास्त के समय किसी न किसी पेड़-पौधों पर सूर्योदय होने तक आश्रय लेते हैं और इसी समय नुकसान पहुंचाते हैं। एक मादा टिड्डी भूमि में 500 से 1500 अंडे देकर सुबह उड़ जाती है। इनके नियंत्रण के लिए रसायनों के छिड़काव का सबसे उपयुक्त समय रात 11 बजे से सुबह नौ बजे तक होता है।
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बजाएं थाली, ढोल-नगाड़े
आजमगढ़। उन्होंने बताया कि टिड्डी दल को खेतों के आस-पास दिखाई देते ही किसान टोलियॉंबनाकर शाम के समय थाली, ढोल, नगाड़े, घंटियां, डीजे और पटाखे आदि की तेज आवाज करके इनको भगा सकते है। प्रकाश प्रपंच का प्रयोग कर भी टिड्डियों को एकत्रित करके नष्ट किया जा सकता है। टिड्डी दल के आकाश में दिखाई देने पर घास-फूस जलाकर धुआं करें। आक्रमण के बाद कीटनाशक उपलब्ध न होने की दशा में ट्रैक्टर चालित पावर स्प्रेयर के से पानी की तेज बौछार से भी इन्हें भगाया जा सकता है।
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इसका भी करें प्रयोग
आजमगढ़। इसके नियंत्रण के लिए किसान एजाडीरेक्टीन (नीम ऑयल) 1.50 से 2.00 लीटरप्रति हेक्टेयर 600 से 700 लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करें। प्रकोप होने पर क्लोरपायरीफॉस 20 प्रतिशत ईसी 1200 मिली, लेम्डा साइहेलोथ्रीन 5 प्रतिशत ईसी 400 मिली या बेन्थियों कार्ब 80 प्रतिशत 125 ग्राम, 500 लीटर पानी में प्रति हेक्टेयर की दर से घोल बनाकर छिड़काव करें। फेनवेलरेट 0.4 प्रतिशत अथवा मैलाथियान 5 प्रतिशत धूल 20 से 25 किग्रा प्रति हेक्टेयर की दर से सुबह पत्तियों पर ओस देखकर बुरकाव करें। जिला कृषि रक्षा अधिकारी ने कृषि विभाग के प्राविधिक सहायकों को निर्देशित किया है कि टिड्डी दल की स्थिति पर निगरानी रखें।
इन नंबरों पर दे सूचना
आजमगढ़। टिड्डी दल के आक्रमण होने की सूचना प्रधान, लेखपाल कृषि विभाग के प्राविधिक सहायकों एवं ग्राम पंचायत अधिकारी के माध्यम से कृषि विभाग अथवा जिला प्रशासन तक पहुंचाएं। कन्ट्रोल रुम 9919588753 और 9450809578 पर जानकारी उपलब्ध कराएं। क्षेत्रीय केन्द्रीय एकीकृत नाशीजीव प्रबन्धन केन्द्र, लखनऊ 0522-2732063 अथवा अपर निदेशक कृषि रक्षा लखनऊ को 0522-2205868 पर भी सूचित कर सकते है।
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उन्होंने कहा कि जनपद में कहीं कहीं गन्ने, मक्का, चरी और धान की नर्सरी के खेतों में ग्रास हॉपर कीट के प्रकोप से नुकसान पहुंच रहा है तो इसके उपाय करें। ये भी लगभग टिड्डी के समान होते हैं लेकिन इनका आकार छोटा होता है। इसके नियंत्रण के लिए किसान एजाडीरेक्टीन (नीम ऑयल) 1.50 से 2.00 लीटर या क्लारोपायरीफॉस 20 प्रतिशत ईसी को 1.25 लीटर मात्रा प्रति हेक्टेयर 600 से 700 लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करें। टिड्डी दल एक साथ लाखों की संख्या में गमन करते हैं। जिस क्षेत्र में इनका आक्रमण होता है वहां की हरियाली चट कर विरान कर देते हैं। टिड्डी दल प्राय: सूर्यास्त के समय किसी न किसी पेड़-पौधों पर सूर्योदय होने तक आश्रय लेते हैं और इसी समय नुकसान पहुंचाते हैं। एक मादा टिड्डी भूमि में 500 से 1500 अंडे देकर सुबह उड़ जाती है। इनके नियंत्रण के लिए रसायनों के छिड़काव का सबसे उपयुक्त समय रात 11 बजे से सुबह नौ बजे तक होता है।
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बजाएं थाली, ढोल-नगाड़े
आजमगढ़। उन्होंने बताया कि टिड्डी दल को खेतों के आस-पास दिखाई देते ही किसान टोलियॉंबनाकर शाम के समय थाली, ढोल, नगाड़े, घंटियां, डीजे और पटाखे आदि की तेज आवाज करके इनको भगा सकते है। प्रकाश प्रपंच का प्रयोग कर भी टिड्डियों को एकत्रित करके नष्ट किया जा सकता है। टिड्डी दल के आकाश में दिखाई देने पर घास-फूस जलाकर धुआं करें। आक्रमण के बाद कीटनाशक उपलब्ध न होने की दशा में ट्रैक्टर चालित पावर स्प्रेयर के से पानी की तेज बौछार से भी इन्हें भगाया जा सकता है।
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इसका भी करें प्रयोग
आजमगढ़। इसके नियंत्रण के लिए किसान एजाडीरेक्टीन (नीम ऑयल) 1.50 से 2.00 लीटरप्रति हेक्टेयर 600 से 700 लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करें। प्रकोप होने पर क्लोरपायरीफॉस 20 प्रतिशत ईसी 1200 मिली, लेम्डा साइहेलोथ्रीन 5 प्रतिशत ईसी 400 मिली या बेन्थियों कार्ब 80 प्रतिशत 125 ग्राम, 500 लीटर पानी में प्रति हेक्टेयर की दर से घोल बनाकर छिड़काव करें। फेनवेलरेट 0.4 प्रतिशत अथवा मैलाथियान 5 प्रतिशत धूल 20 से 25 किग्रा प्रति हेक्टेयर की दर से सुबह पत्तियों पर ओस देखकर बुरकाव करें। जिला कृषि रक्षा अधिकारी ने कृषि विभाग के प्राविधिक सहायकों को निर्देशित किया है कि टिड्डी दल की स्थिति पर निगरानी रखें।
इन नंबरों पर दे सूचना
आजमगढ़। टिड्डी दल के आक्रमण होने की सूचना प्रधान, लेखपाल कृषि विभाग के प्राविधिक सहायकों एवं ग्राम पंचायत अधिकारी के माध्यम से कृषि विभाग अथवा जिला प्रशासन तक पहुंचाएं। कन्ट्रोल रुम 9919588753 और 9450809578 पर जानकारी उपलब्ध कराएं। क्षेत्रीय केन्द्रीय एकीकृत नाशीजीव प्रबन्धन केन्द्र, लखनऊ 0522-2732063 अथवा अपर निदेशक कृषि रक्षा लखनऊ को 0522-2205868 पर भी सूचित कर सकते है।