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ऊपर का हिस्सा अवैध तो नीचे का वैध कैसे
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आजमगढ़। एडीए की कार्रवाई हमेशा विवादों के घेरे में रहती है। एक ऐसी ही कार्रवाई एडीए द्वारा सोमवार को सिधारी क्षेत्र स्थित जायका दरबार भी की गई। एडीए द्वारा एक बिल्डिंग के ऊपर बने जायका दरबार को ग्रीन लैंड में होने का हवाला देते हुए ढ़हा दिया गया। जबकि जिस बिल्डिंग के ऊपर वह बना था उस खरोंच तक नहीं आई। अब एडीए के अधिकारी इसे बाद में फोर्स मिलने पर गिराने की बात कह रहे हैं। ग्रीन लैंड, क्रीड़ा पार्क और कृषि क्षेत्र में निर्माण कराना अवैध है। लेकिन इसके बाद भी ग्रीन लैंड, क्रीड़ा पार्क और कृषि क्षेत्र में निर्माण का क्रम निरंतर जारी है। इसी क्रम में नगर के सिधारी थाने समीप ग्रीन लैंड में सड़क की ऊंचाई तक एक बिल्डिंग का निर्माण कराया गया है। इस बिल्डिंग के ऊपर हाल ही में जायका दरबार नाम से एक रेस्टोरेंट खुला था। मंगलवार को एडीए ने जायका दरबार को ग्रीन लैंड में होने का हवाला देते हुए बुलडोजर के जरिए ढ़हा दिया गया। इस कार्रवाई से जहां पूरा रेस्टोरेंट ध्वस्त हो गया वहीं जिस बिल्डिंग के ऊपर इस रेस्टोरेंट को बनाया गया था उसे खरोंच तक नहीं आई। एडीए की यह कार्रवाई सवालों के घेरे में आ गई है। क्योंकि जिस बिल्डिंग पर बनने के कारण रेस्टोरेंट ग्रीन लैंड में हो गया और उसे ढ़हा दिया गया। वहीं जिस बिल्डिंग पर वह बना था वह ग्रीन लैंड में कैसे नहीं थी। अगर थी तो उसे क्यों नहीं ढ़हाया गया? उसे क्यों छोड़ दिया गया? इस संबंध में विभाग द्वारा बाद में कार्रवाई की बात कही जा रही है। जबकि रेस्टोरेंट संचालक का कहना है कि उसके मामले की सुनवाई एडीए में चल रही थी 29 अप्रैल को सुनवाई थी लेकिन आनन फानन में यह कार्रवाई की गई है।
जायका दरबार के संचालक अंसार खान ने बताया कि नीचे की बिल्डिंग भी हमारी ही है। जिसका मानचित्र 1985 में स्वीकृत है। जब यहां एडीए का अस्तित्व ही नहीं था। हमारे द्वारा कहीं भी अतिक्रमण नहीं किया गया है। जब हम बना रहे थे इन लोगों द्वारा पक्का निर्माण करने से मना कर दिया गया तो टिनशेड से अपना ढ़ाबा बना लिया। इन्होंने हमको नोटिस दिया हमने इसके खिलाफ कमिश्नर के यहां अपील की जिसकी 29 अप्रैल को सुनवाई थी। लेकिन इसके पहले ही इन लोगों ने ढ़हा दिया। वहीं इस मामले में एडीएम के सचिव बैजनाथ ने कहा कि यह रेस्टोरेंट और बिल्डिंग ग्रीन लैंड में बने हैं। जिसके कारण इस रेस्टोरेंट को ढ़हाया गया। जिस बिल्डिंग पर रेस्टोरेंट बना था वह भी ग्रीन लैंड में है। लेकिन देर से कार्रवाई शुरू होने के कारण हम इसे नहीं तोड़ सके। अब जब हमें फोर्स उपलब्ध होगी तब हम इसको भी ढ़हाने का कार्य करेंगे।
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जायका दरबार के संचालक अंसार खान ने बताया कि नीचे की बिल्डिंग भी हमारी ही है। जिसका मानचित्र 1985 में स्वीकृत है। जब यहां एडीए का अस्तित्व ही नहीं था। हमारे द्वारा कहीं भी अतिक्रमण नहीं किया गया है। जब हम बना रहे थे इन लोगों द्वारा पक्का निर्माण करने से मना कर दिया गया तो टिनशेड से अपना ढ़ाबा बना लिया। इन्होंने हमको नोटिस दिया हमने इसके खिलाफ कमिश्नर के यहां अपील की जिसकी 29 अप्रैल को सुनवाई थी। लेकिन इसके पहले ही इन लोगों ने ढ़हा दिया। वहीं इस मामले में एडीएम के सचिव बैजनाथ ने कहा कि यह रेस्टोरेंट और बिल्डिंग ग्रीन लैंड में बने हैं। जिसके कारण इस रेस्टोरेंट को ढ़हाया गया। जिस बिल्डिंग पर रेस्टोरेंट बना था वह भी ग्रीन लैंड में है। लेकिन देर से कार्रवाई शुरू होने के कारण हम इसे नहीं तोड़ सके। अब जब हमें फोर्स उपलब्ध होगी तब हम इसको भी ढ़हाने का कार्य करेंगे।
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