फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Azamgarh News ›   If the matter turns out to be correct in the investigation, the neck of many will be trapped

जांच में मामला सही निकला तो फंसेगी कई की गर्दन

Sat, 16 Jul 2022 12:27 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Sat, 16 Jul 2022 12:27 AM IST
विज्ञापन
If the matter turns out to be correct in the investigation, the neck of many will be trapped
आजमगढ़। भाजपा के पूर्व महामंत्री रविशंकर द्वारा मंडलीय चिकित्सालय के अधिकारी और डॉक्टर पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए मंडलायुक्त को दिए गए शिकायती पत्र की जांच फिर शुरू हो गई है। जांच में भ्रष्टाचार का मामला अगर सही पाया गया तो कई पर इसकी तलवार लटक सकती है। मंडलायुक्त को संबोधित शिकायती पत्र में 15 बिंदुओं पर आरोप लगाया है। जिलाधिकारी ने जाँच के आदेश जारी किए, तीन सदस्यीय जाँच कमेटी गठित हुई लेकिन लोकसभा उप चुनाव के चलते जाँच लटक गई थी। जांच को फिर कमेटी को सक्रिय किया गया है। साक्ष्य सहित की गई शिकायत में अस्पताल को भ्रष्टाचार का अड्डा बताते हुए शासकीय धन की लूट किए जाने का आरोप लगाया गया है। शिकायत कर्ता का आरोप है कि कुछ कर्मचारी यहां ऐसे है जो कई वर्षों से यहां जमे हुए है। स्थानांतरण होने पर विकलांग प्रमाण पत्र तो कभी राजनीतिक दबाव के बल पर अपना स्थानांतरण रुकवा लेते है। अस्पताल में संविदा, आउटसोर्सिंग के 18 पदों पर नेत्ररोग विशेषज्ञ डॉ. चंद्रहास ने नियम विरुद्ध तरीके से नियुक्ति किया है। पूर्व एसआई डॉ. एसके सिंह ने शासन को पत्र लिख कर बताया था कि ई-हॉस्पिटल के संचालन के लिए कर्मचारी प्रशिक्षित हो चुके है। जिसके चलते संविदा पर कार्य कर रहे,12 आपरेटरों की सेवा समाप्त कर दी गई। इसके बाद नए एसआईसी ने फिर छह कंप्यूटर आपरेटरों को नियुक्त किया है। ई-हास्पिटल के लिए 2019 से प्रत्येक वर्ष कप्यूटर व लैपटॉप की खरीद एसआईसी, नेत्र रोग विशेषज्ञ व ब्लड बैंक एलटी सुबास पांडेय के फर्मो के माध्यम से बाजार से अधिक रेट पर किया जा रहा है। रविशंकर तिवारी ने आरोप लगाया कि अस्पताल की स्पेशल आडिट के दौरान आडिट टीम ने एक कर्मचारी पर 1 करोड़ से अधिक के गबन को प्रमाणित किया था लेकिन अब तक उक्त कर्मचारी पर कोई कार्रवाई अस्पताल प्रशासन ने नहीं की है। इतना ही नहीं 17.50 लाख खर्च कर 480 सीलिंग पंखा खरीदा गया है, जिसमें भी बड़ा घोटाला हुआ है। एडीएम प्रशासन व जांच कमेटी के सदस्य अनिल कुमार मिश्र ने बताया कि जांच की कार्यवाही शुरू कर दी गयी है। जांच पूरी होने होने पर आख्या उच्चाधिकारियों व शासन को प्रेषित कर दी जायेगी।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed