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हुसैन ने कर्बला के सफर में दिया अमन संदेश
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सरायमीर। चौथी मुहर्रम को शहीदाने करबला की याद में सरायमीर के इमामबाड़ा बारगाहे हुसैनी में मजलिस का आयोजन किया गया। इस मौके पर अजादारों ने नौहा ख्वानी और मातम किया।
मजलिस में मौलाना वसी मोहम्मद ने कहा कि मदीना से कर्बला तक के सफर में हजरत इमाम हुसैन ने अमन का संदेश दिया। उन्होंने बताया कि जंग में पहल नहीं करनी चाहिए। उसे टालने की कोशिश करनी चाहिए। उअगर पवित्र धार्मिक स्थलों में फसाद का अंदेशा हो तो उस जगह को छोड़ देना चाहिए। लेकिन उन्होंने कभी यह नहीं कहा कि हक व सच्चाई के रास्ते से हट जाना चाहिए बल्कि यह संदेश दिया है कि भले ही सर कट जाए मगर जालिम का समर्थन नहीं करना चाहिए। इमाम हुसैन का कर्बला के मैदान में यही पैगाम है कि अत्याचार के खिलाफ आवाज उठाने में जितनी देर करोगे उतना ज्यादा बलिदान देना पड़ेगा। मौलाना ने छह माह के शहीद जनाब अली असगर की शहादत का बयान किया तो आंखों से आंसू छलक पड़े। फरहान अब्बास, तौहीद हुसैन ने नौहाख्वानी की।
मजलिसों में अंजुमनों ने पेश किया नौहा मातम
मेजवां। फूलपुर और ग्रामीण इलाकों में शिया आबादी वाले इलाकों में शनिवार को चौथी मुहर्रम को कई मजलिसें आयोजित की गईं। इस दौरान अंजुमनों ने नौहा मातम पेश किया।
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मुहर्रम के मद्देनजर कोविड गाइड लाइन को लेकर जुलूस इमामबारगाह में ही सीमित रहा। अलम और जुल्जेनाह की शबीह को इमाम बारगाह के सामने लोगों ने जियारत कर मन्नते मांगी। दसमडा गांव के इमाम बारगाह में अंजुमन अब्बासिया, अंजुमन फत्तेपुर, अंजुमन जलालपुर ने तारीखी नौहा पेश किया। मौलाना सैय्यद मुहम्मद अब्बास मुनिस ने मजलिस को खेताब किया। चमावां गांव में मौलाना फ़रहत हुसैन, खपड़ा गांव में जाकिर सैय्यद हुसैन हैदर ने तकरीर पेश की। मौलाना ने जब कर्बला में शहीद इमाम का मसाएब पेश किया तो सभी लोग रो पडे़। वहीं ग्रामीण इलाकों के इमामबाड़ों में ख्वातीन ने अलग मजलिस आयोजित कर खिराज-ए-अकीदत पेश किया। महिलाओं ने ताबूत पर फूल माला चढ़ा कर मन्नत मांगी।
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मजलिस में मौलाना वसी मोहम्मद ने कहा कि मदीना से कर्बला तक के सफर में हजरत इमाम हुसैन ने अमन का संदेश दिया। उन्होंने बताया कि जंग में पहल नहीं करनी चाहिए। उसे टालने की कोशिश करनी चाहिए। उअगर पवित्र धार्मिक स्थलों में फसाद का अंदेशा हो तो उस जगह को छोड़ देना चाहिए। लेकिन उन्होंने कभी यह नहीं कहा कि हक व सच्चाई के रास्ते से हट जाना चाहिए बल्कि यह संदेश दिया है कि भले ही सर कट जाए मगर जालिम का समर्थन नहीं करना चाहिए। इमाम हुसैन का कर्बला के मैदान में यही पैगाम है कि अत्याचार के खिलाफ आवाज उठाने में जितनी देर करोगे उतना ज्यादा बलिदान देना पड़ेगा। मौलाना ने छह माह के शहीद जनाब अली असगर की शहादत का बयान किया तो आंखों से आंसू छलक पड़े। फरहान अब्बास, तौहीद हुसैन ने नौहाख्वानी की।
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मजलिसों में अंजुमनों ने पेश किया नौहा मातम
मेजवां। फूलपुर और ग्रामीण इलाकों में शिया आबादी वाले इलाकों में शनिवार को चौथी मुहर्रम को कई मजलिसें आयोजित की गईं। इस दौरान अंजुमनों ने नौहा मातम पेश किया।
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मुहर्रम के मद्देनजर कोविड गाइड लाइन को लेकर जुलूस इमामबारगाह में ही सीमित रहा। अलम और जुल्जेनाह की शबीह को इमाम बारगाह के सामने लोगों ने जियारत कर मन्नते मांगी। दसमडा गांव के इमाम बारगाह में अंजुमन अब्बासिया, अंजुमन फत्तेपुर, अंजुमन जलालपुर ने तारीखी नौहा पेश किया। मौलाना सैय्यद मुहम्मद अब्बास मुनिस ने मजलिस को खेताब किया। चमावां गांव में मौलाना फ़रहत हुसैन, खपड़ा गांव में जाकिर सैय्यद हुसैन हैदर ने तकरीर पेश की। मौलाना ने जब कर्बला में शहीद इमाम का मसाएब पेश किया तो सभी लोग रो पडे़। वहीं ग्रामीण इलाकों के इमामबाड़ों में ख्वातीन ने अलग मजलिस आयोजित कर खिराज-ए-अकीदत पेश किया। महिलाओं ने ताबूत पर फूल माला चढ़ा कर मन्नत मांगी।