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मानवाधिकार : अधिकतर को नहीं मिलता न्याय

Thu, 10 Dec 2015 12:36 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, आजमगढ़
ब्यूरो/अमर उजाला, आजमगढ़ Updated Thu, 10 Dec 2015 12:36 AM IST
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Human Rights : Most do not get justice
जागरूकता और जिम्मेदारों की चुप्पी के नाते अधिकतर लोग अपने अधिकारों की रक्षा नहीं कर पाते हैं। वर्तमान समय में मानवाधिकार का लाभ जरुरतमंदों को कम बल्कि अपराधिक छवि वालों को ज्यादा मिल रहा है।
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 जबकि आयोग के नियमों के तहत समाज के हर वर्ग को तराजू के एक पल्ले में रखा गया है। जागरुकता के लिए सरकार की तरफ से तमाम उपाय किए जाने के बाद भी ज्यादातर लोगों में जानकारी का अभाव है।
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सिधारी मुहल्ला निवासिनी गृहणि अनिता द्विवेदी कहती हैं कि मानवाधिकार की रक्षा के लिए बात तो जब आती है तो जिम्मेदार बगले झांकने लगते हैं।

घरेलू हिंसा और महिला हिंसा के बढ़ेत आंकड़े इस बात की गवाही देते हैं। शहर के कुर्मीटोला मुहल्ला निवासी डा. राजेंद्र अग्रवाल कहते हैं कि मानवाधिकार का अर्थ है  दूसरे की आजादी में किसी भी प्रकार का खलल न हो।
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लालगंज तहसील के वरिष्ठ अधिवक्ता विजय प्रकाश पांडेय कहते हैं कि राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग का गठन तो मानव अधिकारों की रक्षा के लिए बना है।

 लेकिन अभी भी गांव देहात के लोग इसके विषय में अनभिज्ञ हैं। इस विषय में और प्रचार प्रसार की आवश्यकता है।

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