{"_id":"09324be09077568f89c7f06fb3ac868e","slug":"history-is-based-on-facts-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"तथ्यों पर आधारित है इतिहास ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
तथ्यों पर आधारित है इतिहास
ब्यूरो, अमर उजाला, आजमगढ़
Updated Mon, 09 Feb 2015 12:09 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
सोसाइटी फार रिसर्च एंड एनालिसिस उत्तर प्रदेश लखनऊ और डीएवी पीजी कालेज के संयुक्त तत्वावधान में रविवार को ‘मौखिक इतिहास’ विषय पर कार्यशाला का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम का उद्घाटन लखनऊ विश्वविद्यालय के प्रोफेसर डा. पीके श्रीवास्तव ने किया।
बतौर विशिष्ठ अतिथि महाविद्यालय प्रबंध समिति के सचिव डा. श्रीनाथ सहाय ने कहा कि इतिहास लिखित और मौखिक दोनों ही रूपों में समान्तर और परोक्ष होता है।
मौखिक इतिहास भी पीढ़ी दर पीढ़ी उसी रूप में चलता है, जैसे लिखित इतिहास, उसकी प्रमाणिकता भी स्वंय सिद्ध है। महाविद्यालय की प्राचार्य डा. शुचिता श्रीवास्तव ने कहा कि इतिहास तथ्यों पर आधारित होता है।
जिसमें संवेदनाओं के साथ भावनाओं की भूमिका लगभग नगण्य होती है। लेकिन इतिहास का एक दूसरा पहलू भी है। जो दस्तावेजों से परे लोक गीतों, लोक कलाओं, लोक परंपराओं, लोक संस्कृति एवं प्रत्यक्षदर्शियों के अनुभवों पर आधारित होता है।
विज्ञापन
कार्यक्रम की अध्यक्षता मालटारी पीजी कालेज के पूर्व प्राचार्य डा. द्विजराम यादव ने किया।
कार्यक्रम में कालेज के शिक्षक डा. बद्रीनाथ, अजय कुमार मिश्रा, डा. सौम्यसेन गुप्ता के साथ छात्र-छात्राओं ने भी भाग लिया।
विज्ञापन
कार्यक्रम का उद्घाटन लखनऊ विश्वविद्यालय के प्रोफेसर डा. पीके श्रीवास्तव ने किया।
बतौर विशिष्ठ अतिथि महाविद्यालय प्रबंध समिति के सचिव डा. श्रीनाथ सहाय ने कहा कि इतिहास लिखित और मौखिक दोनों ही रूपों में समान्तर और परोक्ष होता है।
मौखिक इतिहास भी पीढ़ी दर पीढ़ी उसी रूप में चलता है, जैसे लिखित इतिहास, उसकी प्रमाणिकता भी स्वंय सिद्ध है। महाविद्यालय की प्राचार्य डा. शुचिता श्रीवास्तव ने कहा कि इतिहास तथ्यों पर आधारित होता है।
विज्ञापन
जिसमें संवेदनाओं के साथ भावनाओं की भूमिका लगभग नगण्य होती है। लेकिन इतिहास का एक दूसरा पहलू भी है। जो दस्तावेजों से परे लोक गीतों, लोक कलाओं, लोक परंपराओं, लोक संस्कृति एवं प्रत्यक्षदर्शियों के अनुभवों पर आधारित होता है।
विज्ञापन
कार्यक्रम की अध्यक्षता मालटारी पीजी कालेज के पूर्व प्राचार्य डा. द्विजराम यादव ने किया।
कार्यक्रम में कालेज के शिक्षक डा. बद्रीनाथ, अजय कुमार मिश्रा, डा. सौम्यसेन गुप्ता के साथ छात्र-छात्राओं ने भी भाग लिया।