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एचएफएल तय हो तब तो टूटेंगे तमसा के डूब क्षेत्र के अवैध निर्माण
तमसा नदी के किनारे स्थित मकान। फाइल फोटो
- फोटो : AZAMGARH
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आजमगढ़। तमसा नदी केडूब में घुस कर अनियोजित ढंग से किए गए निर्माणों पर बुल्डोजर चलना अभी दूर की कौड़ी है। वजह कि तमसा का एचएफएल (हाई फ्लड लेवल) ही तय नहीं हो पाया है। फिर कार्रवाई कैसे होगी। एनजीटी की फटकार केबाद आजमगढ़ विकास प्राधिकरण यहां-वहां से मदद मांग रहा है पर एचएफएल निर्धारण में सफलता नहीं मिल रही है। हाल ही में वाराणसी विकास प्राधिकरण ने भी यह कहते हुए मदद से इंकार कर दिया है कि अपने यहां भी वरुणा नदी के एचएफएल का निर्धारण उसने नहीं किया है। पिछले साल एनजीटी की अनुश्रवण समिति के पदाधिकारियों ने शहर का दौरा किया था। इस दौरान तमसा नदी के डूब क्षेत्र तक में घुस कर निर्माण किए जाने पर गहरी नाराजगी जताई थी। यहां से जाने के बाद अनुश्रवण समिति ने कई अस्पतालों के साथ ही आजमगढ़ विकास प्राधिकरण और नगर पालिका पर लाखों का जुर्माना प्रस्तावित कर दिया था। साथ ही तमसा नदी के किनारे से 75 मीटर के दायरे में बनाए गए मकानों के धवस्तीकरण का निर्देश विकास प्राधिकरण को दिया था। एनजीटी के निर्देश पर प्राधिकरण के कर्मचारियों ने तमसा के किनारे लगभग आठ सौ मकानों को चिह्नित कर लाल निशान लगा दिया। इससे वहां के लोगों में हड़कंप मच गया। बाद में आदेश को संशोधित करते हुए तमसा के एचएफएल से 50 मीटर के दायरे में आने वाले निर्माणों के ध्वस्तीकरण का आदेश जारी किया गया। लेकिन एचएफएल ही तय नहीं होने से एडीए के लिए परेशानी खड़ी हो गई। आजमगढ़ विकास प्राधिकरण ने इस संबंध में बलिया सिंचाई विभाग केएसई से सहयोग मांगा लेकिन उन्होंने असमर्थता जता दी। इसके बाद एडीए केअधिकारियों ने वाराणसी विकास प्राधिकरण से यह सोच कर मदद मांगी कि यह गंगा और वरुणा नदी के किनारे है लिहाजा एचएफएल तय करने में उसकी विशेषज्ञता का लाभ मिल सकता है लेकिन वीडीए ने यह कहते हुए हाथ उठा दिया कि वरुणा का एचएफएल का निर्धारण उन्होंने नहीं किया है। साथ ही इस संबंध में किसी निजी संस्था का सहयोग लेने की सलाह दी। अब एडीए की ओर से बोर्ड बैठक में किसी निजी संस्था का सहयोग लेने के लिए प्रस्ताव रखा जाएगा एडीए के सचिव बैजनाथ ने बताया कि बहुत कोशिशों के बाद भी अभी तक तमसा नदी के एचएफएल का निर्धारण नहीं हो पाया है। वीडीए ने भी मदद से इंकार कर दिया है। अब इसके निर्धारण के लिए निजी संस्था की मदद ली जाएगी। इसके लिए बोर्ड की बैठक में प्रस्ताव रख कर अनुमति ली जाएगी।
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