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भूजल संरक्षण जन-आंदोलन बने, हर बूंद बचाने का लें संकल्प : कुलपति
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भूजल सप्ताह के तहत विवि में कार्यशाला के दौरान लोगों को शपथ दिलाते कुलपति। श्रोत-सूचना कार्यालय
आजमगढ़। भूजल सप्ताह के तहत मंगलवार को महाराजा सुहेलदेव विश्वविद्यालय में भूजल संरक्षण एवं जल प्रबंधन पर गोष्ठी एवं कार्यशाला में जल संरक्षण को जन-आंदोलन बनाने और वर्षा जल संचयन को हर घर तक पहुंचाने का आह्वान किया।
कुलपति ने सभी उपस्थित लोगों को जल संरक्षण की शपथ दिलाई। मुख्य अतिथि कुलपति प्रो. संजीव कुमार ने कहा कि जल संरक्षण केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक का नैतिक दायित्व है।
उन्होंने विद्यार्थियों से अपने घर, गांव और मोहल्ले में वर्षा जल संचयन अपनाकर दूसरों को भी प्रेरित करने की अपील की। मुख्य वक्ता एवं राज्य भूजल पुरस्कार से सम्मानित इंजीनियर कुलभूषण सिंह ने कहा कि इस वर्ष भूजल सप्ताह जल संरक्षण का करें संकल्प, इसका नहीं है कोई विकल्प थीम पर मनाया जा रहा है।
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उन्होंने बताया कि भारत के पास विश्व के केवल चार प्रतिशत मीठे जल संसाधन हैं, जबकि यहां 18 प्रतिशत आबादी निवास करती है।
वर्षा जल का मात्र आठ प्रतिशत ही भूगर्भ में रिचार्ज हो पाता है। यदि जल संरक्षण के प्रभावी उपाय नहीं अपनाए गए तो वर्ष 2030 तक जल संकट गंभीर रूप ले सकता है। बताया कि जिले में 13 नदियां और 144 ताल-तालाब हैं, जिनका संरक्षण जरूरी है।
उन्होंने प्लास्टिक मुक्त जल स्रोत, रूफटॉप रेन वाटर हार्वेस्टिंग, ईको-ब्रिक निर्माण और घरेलू स्तर पर जल बचत के व्यावहारिक उपाय भी साझा किए। कार्यक्रम में जल संरक्षण से जुड़े पोस्टर प्रदर्शित किए गए तथा भूजल बचाओ, जीवन संवारो और जल ही जीवन का आधार है जैसे संदेशों के माध्यम से लोगों को जागरूक किया।
संचालन डॉ. शशि प्रकाश शुक्ला ने किया। इस अवसर पर डॉ. हरेंद्र सिंह प्रजापति, डॉ. मनीषा सिंह, डॉ. रेनू तिवारी, डॉ. प्रियंका सिंह सहित विवि के शिक्षक, अधिकारी, कर्मचारी एवं छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।
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कुलपति ने सभी उपस्थित लोगों को जल संरक्षण की शपथ दिलाई। मुख्य अतिथि कुलपति प्रो. संजीव कुमार ने कहा कि जल संरक्षण केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक का नैतिक दायित्व है।
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उन्होंने विद्यार्थियों से अपने घर, गांव और मोहल्ले में वर्षा जल संचयन अपनाकर दूसरों को भी प्रेरित करने की अपील की। मुख्य वक्ता एवं राज्य भूजल पुरस्कार से सम्मानित इंजीनियर कुलभूषण सिंह ने कहा कि इस वर्ष भूजल सप्ताह जल संरक्षण का करें संकल्प, इसका नहीं है कोई विकल्प थीम पर मनाया जा रहा है।
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उन्होंने बताया कि भारत के पास विश्व के केवल चार प्रतिशत मीठे जल संसाधन हैं, जबकि यहां 18 प्रतिशत आबादी निवास करती है।
वर्षा जल का मात्र आठ प्रतिशत ही भूगर्भ में रिचार्ज हो पाता है। यदि जल संरक्षण के प्रभावी उपाय नहीं अपनाए गए तो वर्ष 2030 तक जल संकट गंभीर रूप ले सकता है। बताया कि जिले में 13 नदियां और 144 ताल-तालाब हैं, जिनका संरक्षण जरूरी है।
उन्होंने प्लास्टिक मुक्त जल स्रोत, रूफटॉप रेन वाटर हार्वेस्टिंग, ईको-ब्रिक निर्माण और घरेलू स्तर पर जल बचत के व्यावहारिक उपाय भी साझा किए। कार्यक्रम में जल संरक्षण से जुड़े पोस्टर प्रदर्शित किए गए तथा भूजल बचाओ, जीवन संवारो और जल ही जीवन का आधार है जैसे संदेशों के माध्यम से लोगों को जागरूक किया।
संचालन डॉ. शशि प्रकाश शुक्ला ने किया। इस अवसर पर डॉ. हरेंद्र सिंह प्रजापति, डॉ. मनीषा सिंह, डॉ. रेनू तिवारी, डॉ. प्रियंका सिंह सहित विवि के शिक्षक, अधिकारी, कर्मचारी एवं छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।