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अकीदत के साथ अदा की गई अलविदा जुमा की नमाज

Fri, 29 Apr 2022 11:42 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Fri, 29 Apr 2022 11:42 PM IST
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Goodbye Juma prayer performed with aqeedat
आजमगढ़। माहे रमजान का आखिरी जुमा,अलविदा जुमा की नमाज शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों की मस्जिदों में कड़ी सुरक्षा के बीच बड़ी ही अकीदत के साथ अदा की गई। सभी मस्जिदें नमाजियों से लबरेज रही। शहर की जामा मस्जिद में स्थान पाने के लिए अलविदा जुमा की नमाज शुरु होने से पहले ही लोग मस्जिद में पहुंच गए। इसी प्रकार शहर की दलालघाट, जमातुर्रशाद की मस्जिद, बागमीरपेटू की मस्जिद, टेढिय़ा मस्जिद, कटरा की मस्जिद सभी मस्जिदों में नमाज शुरु होने से पहले ही लोग पहुंच गए थे। इस दौरान नगर क्षेत्र उन सभी मस्जिदों पर सुरक्षा क ी कड़ी व्यवस्था थी जहां जुमा की नमाज अदा होती है। लोगों ने खूतबा सुना और बड़ी ही अकीदत के साथ अलविदा जुमा की नमाज अदा की।
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महराजगंज संवाददाता के अनुसार अलविदा जुमा की नमाज मित्रपुर, चांदपुर,सिकंदरपुर आईमा, महराजगंज में बड़ी ही अकीदत के साथ अदा की गई। इस दौरान मस्जिदों पर कड़ी सुरक्षा के इंतेजाम थे। सरायमीर संवाददाता के अनुसार कस्बा स्थित एक मीनारा मस्जिद, फारुकिया जमा मस्जिद, कदीम जामा मस्जिद, बेलाल जामा मस्जिद, खरेवा मोड़ जामा मस्जिद, बैतूल उलूम जामा मस्जिद, फैजुल उलूम जामा मस्जिद,इस्लाह जामा मस्जिद सहित क्षेत्र की सभी गांवों की जामा मस्जिदों में अकीदत के साथ अदा की गई। ईद की नमाज सरायमीर ईदगाह में सुबह 7.15 बजे एवं शेरवां ईदगाह में प्रात: सात बजे अदा की जाएगी।
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मेजवां संवाददाता के अनुसार फूलपुर तहसील क्षेत्र के चमावां गांव में शुक्रवार को शिया समुदाय के लोगो ने आखिरी जुमा की नमाज अकीदत के साथ अदा की। इस दौरान शिया समुदाय के लोगों ने अलविदा जुमा को क़ुद्स के रूप में मनाया। बैतुल मुक्द्दस की बहाली और मजलूम फिलीस्तीनियों के हक़ के लिए आवाज बुलन्द की जाती थी। इसी क्रम में शिया मस्जिद चमावां में मौलाना सैयद आरजू रिजवी ने खुतबा में कहा कि फिलीस्तीनी मुसलमानों के हक की आवाज को बुलंद करना दुनिया के तमाम हक पसंद इंसानों की जिम्मेदारी है।
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सड़क पर ईद की न पढ़े नमाज: शहर इमाम
आजमगढ़। अलविदा जुमा की नमाज होने से पहले जामा मस्जिद में शहर इमाम मौलाना इंतेखाब आलम कासमी ने नमाजियों से कहा कि शासन और प्रशासन का निर्देश है कि ईद की नमाज ईदगाहों या मस्जिदों में पढ़े,कोई पर भी व्यक्ति सड़क पर नमाज न पढ़े। हम सभी को इस आदेश का पालन करना चाहिए। आप सभी लोग ईद के दिन ईद की नमाज बदरका स्थित ईदगाह में ही पढ़ेंगे। कोई भी व्यक्ति ईदगाह की सड़क पर नमाज अदा नहीं करेगा।
ईद की नमाज के समय की हुई घोषणा
आजमगढ़। अलविदा जुमा की नमाज होने से पहले शहर इमाम मौलाना इंतेखाब आलम कासमी ने ईदगाह और अन्य मस्जिदों में होने वाली ईद की नमाज के समय की घोषणा किया। उन्होंने कहा कि ईद का चांद रविवार एक मई 29वें रोजा को अगर होता है तो त्योहार सोमवार दो मई को मनाया जाएगा। यह भी कहा कि जो भी व्यक्ति अगर चांद देखता है तो उसे आकर गवाही देनी होगी। अगर चांद तीस रमजान सोमवार दो मई को होता है तो ईद का त्योहार तीन मई को मनाया जाएगा। बताया कि ईदगाह में ईद की नमाज प्रात: 7.00 बजे होगी। दलालघाट स्थित मस्जिद में प्रात: 6.45 बजे और मदरसा जामियर्तुरशाद की मस्जिद में प्रात: 6.30 बजे से होगी।
मां के कदमों में होती है जन्नत
आजमगढ़। रमजान के अलविदा जुमा(आखिरी जुमा) की नमाज के पहले जामा मस्जिद में शहर इमाम मौलान इंतेखाब आलम कासमी ने नमाजियों को खिताब करते हुए मुकद्दस रमजान की अहमियत के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने वालिद और वाल्दा (मां-बाप)का जिक्र करते हुए कहा कि आज के नौजवान अपने वालिद और वाल्दा की न तो इज्जत कर रहे है और न ही उनकी खिदमत करते है। जब कि कहा जाता है मां के कमदों में जन्नत होती है। उन्होंने कहा कि अगर आप के मां या बाप में से कोई बूढ़ा हो गया है या दोनों मौजूद है तो उनका विशेष ख्याल रखें। इनकी खिदमत करना भी किसी इबादत से कम नहीं है। कहा कि अगर रमजान के दौरान आप के घर में किसी की मौत हो जाती है। तो लोग न तो नए कपड़े बनवाते है न ही ईद का त्योहार मनाते है। जब कि हदीस में कहा गया है कि गम सिर्फ तीन दिन का होता है। लोग मौत के बाद त्योहार पर नए कपड़े न पहनने की बात कहते है तो यह गलत है, कही भी नीं कहा गया है कि ईद पर नए कपड़े ही पहने। यह जरुर कहा गया है कपड़े अच्छे साफ-सुथरे पहनकर त्योहार मना सकते है।
सरायमीर क्षेत्र में अकीदत के साथ अदा हुई अलविदा जुमे की नमाज
सरायमीर। माह-ए-रमजान के अंतिम जुमा ‘अलविदा जुमा’ की नमाज सरायमीर कस्बा स्थित मीनारा जामा मस्जिद, फरूकिया जामा मस्जिद, कदीम जामा मस्जिद, बेलाल जामा मस्जिद,खरेवां मोड़ जामा मस्जिद,बैतूल उलूम जामा मस्जिद, फैजुल उलूम जामा मस्जिद,इस्लाह जामा मस्जिद सहित क्षेत्र की सभी गावों की जामा मस्जिदों में अकीदत के साथ अदा की गई। जामा मस्जिदों में नमाजियों की काफी भीड़ रही। खरेवां मोड़ जामा मस्जिद में नमाज से पहले इमाम मौलाना पीर तरीकत इफ्तेखार अहमद नक्शबंदी मजदवी ने लोगों को खिताब करते हुए कहा कि सदकतुल फित्र की अदायगी ईदुल फित्र की नमाज से पहले हर मां बाप को अपने घर के सभी सदस्यों की ओर से फितरे की रकम निकाल देना चाहिए। फितरा की रकम जो लोग उसके मुस्तहक़ हैं उन्हीं लोगों को देना जरूरी है। मुल्क के अमन व अमान के लिए लोगों ने दुआएं मांगी। ईद की नमाज सरायमीर ईदगाह में सुबह 7:15 बजे एवं शेरवां ईदगाह में 7 बजे अदा की जाएगी। क्षेत्र के कौरा गहनी गांव स्थित जामा मस्जिद के इमाम मौलाना अबु होरैरा इस्लाही ने अलविदा जुमा की नमाज से पहले रमजान की फ़जीलत के बारे में विस्तारपूर्वक बताया।

ईद की खरीदारी को लेकर बढ़ी चहल-पहल
रानी की सराय। ईद नजदीक आते ही क्षेत्र के मुस्लिम बाहुल्य इलाके फरिहां, कोटिला आदि बाजारों में चहल-पहल बढ़ गई है। खरीदारी के लिए दुकानों में भीड़ उमड़ने लगी है। बाजार में सेवईं, लच्छा, फिरनी, शीर व खुरमा वगैरह की दुकानें सज गई हैं। साथ ही तमाम किस्म की टोपियां भी बिक रही हैं। बच्चे, महिलाएं, पुरुष व बुजुर्ग जरूरतों के मुताबिक कपड़ों से लेकर साज-सामान की तैयारियों में जुटे दिखे। देर शाम रोजा इफ्तार के बाद खरीदारी का सिलसिला शुरू हो जाता है। चूंकि ईद पर नए परिधान पहनकर ही नमाज अदा की जाती है, लिहाजा कपड़ों की दुकानों पर अच्छी खासी भीड़ देखने को मिल रही है। रेडीमेड कपड़ों की दुकान पर अधिक भीड़ देखी जा रही है। ऐसे में दुकानदारों की चांदी है। वे भी इस खास मौके को भुनाने में जुटे हैं। उधर बाजारों में जूते, चप्पल, आभूषण, तोहफे व खिलौनों आदि की भी बिक्री बढ़ी है। बाजारों में लोगों की भीड़ देखते हुए खाने पीने के स्टॉल भी गुलजार रहते हैं।
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