तटवर्ती गांवों में दहशत: आजमगढ़ में डिघिया गेज पर लाल निशान पार हुई घाघरा, बाढ़ की आशंका
पहाड़ों पर लगातार हो रही बारिश व बनबसा, शारदा बैराज से रिलीज किए जा रहे पानी से घाघरा नदी का जलस्तर रोजाना बढ़ रहा है। बृहस्पतिवार को नदी का जलस्तर डिघिया नाले पर खतरे के निशान से ऊपर पहुंच गया। इससे आसपास के गांवों के लोग चिंतित हैं।
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देवरांचल से होकर गुजरने वाली घाघरा नदी में शारदा बैराज से सात लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। इससे नदी का जलस्तर आजमगढ़ के डिघिया गेज पर लाल निशान के पार पहुंच गया है। जलस्तर में पिछले 24 घंटे के दौरान डिघिया पर 53 व बदरहुंआ में 52 सेमी की बढ़ोत्तरी दर्ज हुई है। जलस्तर बढ़ने से तटवर्ती गांवों के बाढ़ की चपेट में आने की आशंका पैदा हो गई है।
बुधवार की शाम आजमगढ़ के डिघिया गेज पर नदी का जलस्तर 70.07 मीटर दर्ज किया गया था, जो बृहस्पतिवार को बढ़कर 70.60 मीटर हो गया। बदरहुआ गेज पर बुधवार को नदी का जलस्तर 70.71 मीटर दर्ज किया गया था, जो बृहस्पतिवार को बढ़कर 71.23 मीटर हो गया। बाढ़ खंड कार्यालय के मुताबिक बुधवार को शारदा बैराज से साढ़े चार लाख क्यूसेक और बृहस्पतिवार को ढाई लाख क्यूसेक पानी डिस्चार्ज हुआ।
पहाड़ों पर लगातार हो रही बारिश व बनबसा, शारदा बैराज से रिलीज किए जा रहे पानी से घाघरा नदी का जलस्तर रोजाना बढ़ रहा है। बृहस्पतिवार को नदी का जलस्तर डिघिया नाले पर खतरे के निशान से ऊपर पहुंच गया। इससे आसपास के गांवों के लोग चिंतित हैं। नदी का जलस्तर बढ़ने से ग्रामीणों और पशुओं की परेशानी बढ़ गई है।
नदी किनारे गांगेपुर, परसिया गांव के पास महुला गढ़वल बंधे के पास भी पानी पहुंच गया और तेजी से गांव की ओर रुख करने लगा है। सबसे ज्यादा परेशानी औघड़ गंज, कुड़ही, अचल नगर, देवारा खास राजा, गांगेपुर, परसिया आदि गांवों के ग्रामीणों को हो रही हैं। गांगेपुर और परसिया क्षेत्र भी बाढ़ की चपेट में आ सकते हैं।
बलियाः गंगा के बढ़ते जलस्तर ने रोकी पुल निर्माण की रफ्तार
गंगा नदी पर शिवपुर-नौरंगा के सामने यूपी-बिहार को जोड़ने वाले पुल का निर्माण कार्य नदी के जलस्तर में वृद्धि के कारण सेतु निगम को रोकना पड़ा है। पांच माह पहले इस सेतु का निर्माण कार्य शुरू हुआ था और इस दौरान कुल सात पिलर बने हैं। सेतु में कुल 19 पिलर बनने हैं। पुल का निर्माण तीन साल में पूरा होना है।
बताया जाता है कि वर्ष 1995 में गांव के लोगों ने पूर्व पीएम चंद्रशेखर से पुल की मांग की थी। उसी वक्त उन्होंने यहां सेतु निर्माण के लिए लोगों को आश्वस्त किया था। उनकी घोषणा के बाद सर्वे शुरू हो गया लेकिन नदी के कटान की वजह से भौगोलिक परिस्थिति बदल गई और सेतु का मामला टल गया। फिर 2016 में सेतु का शिलान्यास किया गया लेकिन दो साल तक निर्माण नहीं शुरू हुआ।
मामला यूपी और बिहार सरकार की स्वीकृति में फंसा रहा। सभी मामले सुलझाने के बाद पांच माह पहले काम तो शुरू हुआ लेकिन वर्तमान में गंगा का जलस्तर बढ़ने के कारण कार्यदायी संस्था को काम रोकना पड़ा है।
वहीं, सरयू का जलस्तर खतरा निशान 64.01 से मात्र 32 सेमी नीचे है। हालांकि अभी नदियों का पानी पेटे से बाहर नहीं आया है, लेकिन तटवर्ती इलाके के लोग बाढ़ की स्थिति बनते देख सुरक्षा के उपाय करने लगे हैं। 24 घंटे में नदियों का जलस्तर लगभग 11 सेमी बढ़ा है।