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Azamgarh News: लगातार बढ़ रही घाघरा, लोगों को सता रहा बाढ़ का डर
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जनपद के सगड़ी तहसील के उत्तर बहने वाली घाघरा नदी से तबाह होने वाले गांव, ग्रामीण, पशु, फसल हर वर्ष बर्बादी का मंजर झेलते हैं। इस वर्ष भी घाघरा के जलस्तर में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। जिससे लोगों को अब बाढ़ का खतरा सताने लगा है। तटवर्ती गांवों के लोग कटान से भयभीत हैं।
सगड़ी तहसील के देवरांच से होकर गुजरने वाली घाघरा नदी का जलस्तर शुक्रवार की शाम चार बजे 69.78 मीटर दर्ज किया गया था। जिसमें शनिवार को 22 सेमी की बढ़ोतरी दर्ज की गई। शनिवार को नदी का जलस्तर 70.00 मीटर हो गया। बदरहुंआ नाले का न्यूनतम जलस्तर 70 .26 मीटर, खतरा बिंदु 71.68 मीटर और अधिकतम जलस्तर 73.52 मीटर है। जलस्तर में लगातार हो रहे बढ़ाव से ग्रामीण चिंतित हैं। उन्हें बाढ़ आने का डर सताने लगा है। बताते चलें कि सगड़ी तहसील के उत्तर बाढ़ से प्रभावित होने वाले कुल 134 गांव हैं। जिसमें आवाद गांव 84 हैं तो गैर आवाद राजस्व गांव 50 हैं। पिछली बार प्रभावित परिवारों की संख्या 11800 थी और प्रभावित जनसंख्या 92000 थी। जनपद में बाढ़ से निपटने के लिए 10 बाढ़ चौकियां, 10 राहत केंद्र और 14 आश्रय स्थल बनाए गए हैं। पिछली बार की बाढ़ में कुल 551 नावें चलाई गई थी। जिसमें 10 बड़ी नाव, 429 मझौली नाव और 112 छोटी नाव चलाई गई थी। बाढ़ से प्रभावित गांव की संख्या 67 थी और बाढ़ के दौरान एक जनहानि हुई थी। विगत वर्ष देवारा खास राजा में 48.44 हेक्टेयर, हिंदू राय में 26.23 हेक्टेयर, संगम दुबे में 53.33 हेक्टेयर, गंगा पुरवा में 20.32 हेक्टेयर, मलह पुरवा सेमरी में 25.21 हेक्टेयर, शइवंश में 32.35 हेक्टेयर, तिवारी पुरवा में 13.9 हेक्टेयर, गांगेपुर में 24.93 हेक्टेयर, सहबदिया में 20.3 हेक्टेयर भूमि घाघरा नदी के कटान में विलीन हो चुकी है। विगत वर्ष की बाढ़ में शरण स्थलों में कुल 1860 लोग रहे हैं। बाढ़ की तैयारी भले ही कर ली गई हो, तहसील प्रशासन चक्र मन कर रहा है। पर इसकी पोल तब खुलती है जब बाढ़ अपने चरम पर होती है और व्यवस्था चरमरा जाती है। बाढ़ खंड विभाग के सहायक अभियंता अरविंद कुमार का कहना है कि बाढ़ की तैयारी में महुला गढ़वल बांध की सुरक्षा के लिए जगह-जगह मिट्टी रख दी गई है, रेगुलेटर की मरम्मत हो गई है। बोरियों का स्टाक पूरा है। तो वहीं तहसील प्रशासन का कहना है कि सभी बाढ़ चौकियों को अलर्ट मोड में रखा गया है। बाढ़ चौकियों पर किट का वितरण किया गया है और सभी विभागों की तैनाती कर दी गई है। घाघरा नदी का जलस्तर जैसे-जैसे बढ़ता जा रहा है लोगों में बाढ़ का डर समाया जा रहा है। जिससे तटवर्ती गांव में कटान का भय बनता जा रहा है। वहीं सहबदिया सुल्तानपुर गांव के सामने प्रतिदिन खेती योग्य जमीन घाघरा में विलीन होती जा रही है। घाघरा नदी सहबदिया गांव के सामने कटान तेज कर दी है।
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सगड़ी तहसील के देवरांच से होकर गुजरने वाली घाघरा नदी का जलस्तर शुक्रवार की शाम चार बजे 69.78 मीटर दर्ज किया गया था। जिसमें शनिवार को 22 सेमी की बढ़ोतरी दर्ज की गई। शनिवार को नदी का जलस्तर 70.00 मीटर हो गया। बदरहुंआ नाले का न्यूनतम जलस्तर 70 .26 मीटर, खतरा बिंदु 71.68 मीटर और अधिकतम जलस्तर 73.52 मीटर है। जलस्तर में लगातार हो रहे बढ़ाव से ग्रामीण चिंतित हैं। उन्हें बाढ़ आने का डर सताने लगा है। बताते चलें कि सगड़ी तहसील के उत्तर बाढ़ से प्रभावित होने वाले कुल 134 गांव हैं। जिसमें आवाद गांव 84 हैं तो गैर आवाद राजस्व गांव 50 हैं। पिछली बार प्रभावित परिवारों की संख्या 11800 थी और प्रभावित जनसंख्या 92000 थी। जनपद में बाढ़ से निपटने के लिए 10 बाढ़ चौकियां, 10 राहत केंद्र और 14 आश्रय स्थल बनाए गए हैं। पिछली बार की बाढ़ में कुल 551 नावें चलाई गई थी। जिसमें 10 बड़ी नाव, 429 मझौली नाव और 112 छोटी नाव चलाई गई थी। बाढ़ से प्रभावित गांव की संख्या 67 थी और बाढ़ के दौरान एक जनहानि हुई थी। विगत वर्ष देवारा खास राजा में 48.44 हेक्टेयर, हिंदू राय में 26.23 हेक्टेयर, संगम दुबे में 53.33 हेक्टेयर, गंगा पुरवा में 20.32 हेक्टेयर, मलह पुरवा सेमरी में 25.21 हेक्टेयर, शइवंश में 32.35 हेक्टेयर, तिवारी पुरवा में 13.9 हेक्टेयर, गांगेपुर में 24.93 हेक्टेयर, सहबदिया में 20.3 हेक्टेयर भूमि घाघरा नदी के कटान में विलीन हो चुकी है। विगत वर्ष की बाढ़ में शरण स्थलों में कुल 1860 लोग रहे हैं। बाढ़ की तैयारी भले ही कर ली गई हो, तहसील प्रशासन चक्र मन कर रहा है। पर इसकी पोल तब खुलती है जब बाढ़ अपने चरम पर होती है और व्यवस्था चरमरा जाती है। बाढ़ खंड विभाग के सहायक अभियंता अरविंद कुमार का कहना है कि बाढ़ की तैयारी में महुला गढ़वल बांध की सुरक्षा के लिए जगह-जगह मिट्टी रख दी गई है, रेगुलेटर की मरम्मत हो गई है। बोरियों का स्टाक पूरा है। तो वहीं तहसील प्रशासन का कहना है कि सभी बाढ़ चौकियों को अलर्ट मोड में रखा गया है। बाढ़ चौकियों पर किट का वितरण किया गया है और सभी विभागों की तैनाती कर दी गई है। घाघरा नदी का जलस्तर जैसे-जैसे बढ़ता जा रहा है लोगों में बाढ़ का डर समाया जा रहा है। जिससे तटवर्ती गांव में कटान का भय बनता जा रहा है। वहीं सहबदिया सुल्तानपुर गांव के सामने प्रतिदिन खेती योग्य जमीन घाघरा में विलीन होती जा रही है। घाघरा नदी सहबदिया गांव के सामने कटान तेज कर दी है।
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