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Azamgarh News: सात लाख का 14 लाख दिया, फिर भी बना रहा कर्जदार
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आजमगढ़। रेलवे में चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारी ने सूद पर सात लाख रुपये कर्ज लिया था और दो गुना से अधिक अदा भी कर दिया फिर भी कर्जदार बना रहा। हद तो तब हो गई जब सूदखोर ने 14 लाख से अधिक रुपये वसूलने के बाद भी पैसे के लिए उसकी पिटाई कर दी और जान से मारने की धमकी दी। थाने पर सुनवाई न होने पर पीड़ित ने एसपी से गुहार लगाई। एसपी के निर्देश पर एक नामजद और दो अज्ञात के विरुद्ध् मुकदमा दर्ज कर पुलिस मामले की छानबीन में जुट गई है।
महराजगंज थाना क्षेत्र के रग्घूपुर गांव निवासी मुखराम नाई रेलवे में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी था। जनवरी 2013 में उसने गांव के ही बाबूराम पांडेय से सात लाख रुपये मकान बनवाने के लिए सूद पर लिया था। पांच प्रतिशत प्रतिमाह की दर से वह नौ माह तक 3.15 लाख बतौर सूद देता रहा। अक्टूबर 2013 में वह सेवानिवृत्त हुआ तो फिर एक मुश्त सात लाख रुपये अपने खाते से निकाल कर मूल भी चुकता कर दिया। आरोप है कि जनवरी 2019 में सूदखोर बाबूराम पांडेय ने उसे बुलाया और कहा कि अभी सूद कर चार लाख बाकी है, दे दो नहीं तो जान से मार कर दफन कर देंगे। सूदखोर के भय के चलते मुखराम नाई ने अपने उस मकान को भी बेच दिया, जिसे उसने सूद पर सात लाख रुपये लेकर बनवाया था। इसके बाद चार लाख रुपये पुत्र प्रदीप के साथ ले जाकर बाबूराम को दे दिया। फिर बाबूराम शांत हो गया। कुछ दिन बाद बाबूराम ने उसे फिर बुलाया और कहा कि सूद का अभी दो लाख रुपये बकाया है। 10-10 हजार रुपये दे दो। पीड़ित मुखराम नाई एक बार फिर 10-10 हजार रुपये का भुगतान बाबूराम को प्रतिमाह करने लगा। छह सितंबर को शाम चार बजे वह बाबूराम के घर गया और कहा कि वह सारा पैसा दे चुका है और अब उससे जबरन वसूली की जा रही है। इस बात पर बाबूराम भड़क गया और गालियां देते हुए मौके पर मौजूद दो अन्य अज्ञात लोगाें के साथ मिल कर उसकी पिटाई कर दी। स्थानीय लोगों ने हस्तक्षेप कर उसे बचाया। पीड़ित ने थाने पर शिकायत की लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। परेशान होकर उसने एसपी कार्यालय पर शिकायती पत्र दिया। एसपी के निर्देश पर 25 सितंबर को मुकदमा दर्ज पुलिस जांच पड़ताल की कवायद में जुट गई है।
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महराजगंज थाना क्षेत्र के रग्घूपुर गांव निवासी मुखराम नाई रेलवे में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी था। जनवरी 2013 में उसने गांव के ही बाबूराम पांडेय से सात लाख रुपये मकान बनवाने के लिए सूद पर लिया था। पांच प्रतिशत प्रतिमाह की दर से वह नौ माह तक 3.15 लाख बतौर सूद देता रहा। अक्टूबर 2013 में वह सेवानिवृत्त हुआ तो फिर एक मुश्त सात लाख रुपये अपने खाते से निकाल कर मूल भी चुकता कर दिया। आरोप है कि जनवरी 2019 में सूदखोर बाबूराम पांडेय ने उसे बुलाया और कहा कि अभी सूद कर चार लाख बाकी है, दे दो नहीं तो जान से मार कर दफन कर देंगे। सूदखोर के भय के चलते मुखराम नाई ने अपने उस मकान को भी बेच दिया, जिसे उसने सूद पर सात लाख रुपये लेकर बनवाया था। इसके बाद चार लाख रुपये पुत्र प्रदीप के साथ ले जाकर बाबूराम को दे दिया। फिर बाबूराम शांत हो गया। कुछ दिन बाद बाबूराम ने उसे फिर बुलाया और कहा कि सूद का अभी दो लाख रुपये बकाया है। 10-10 हजार रुपये दे दो। पीड़ित मुखराम नाई एक बार फिर 10-10 हजार रुपये का भुगतान बाबूराम को प्रतिमाह करने लगा। छह सितंबर को शाम चार बजे वह बाबूराम के घर गया और कहा कि वह सारा पैसा दे चुका है और अब उससे जबरन वसूली की जा रही है। इस बात पर बाबूराम भड़क गया और गालियां देते हुए मौके पर मौजूद दो अन्य अज्ञात लोगाें के साथ मिल कर उसकी पिटाई कर दी। स्थानीय लोगों ने हस्तक्षेप कर उसे बचाया। पीड़ित ने थाने पर शिकायत की लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। परेशान होकर उसने एसपी कार्यालय पर शिकायती पत्र दिया। एसपी के निर्देश पर 25 सितंबर को मुकदमा दर्ज पुलिस जांच पड़ताल की कवायद में जुट गई है।
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