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UP: 41 साल पहले हत्या का केस, 37 साल पहले गैंगस्टर की कार्रवाई... नकदू ने कैसे हासिल की थी होमगार्ड की नौकरी
Thu, 09 Jan 2025 06:34 PM IST
प्रगति चंद
अमर उजाला नेटवर्क, आजमगढ़।
अमर उजाला नेटवर्क, आजमगढ़।
Published by: प्रगति चंद
Updated Thu, 09 Jan 2025 06:34 PM IST
सार
आजमगढ़ जिले में फर्जी अंक पत्र के सहारे नौकरी हासिल करने वाले गैंगस्टर की कहानी चौंकाने वाली है। उसके खिलाफ पहली बार 41 साल पहले हत्या का पहला केस दर्ज हुआ था।
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गैंगस्टर नंदलाल
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
नकदू के खिलाफ 37 साल पहले गैंगस्टर की कार्रवाई हुई थी। उसकी हिस्ट्रीशीट भी खोली गई थी डीआईजी ने मामले की जांच कराई। इससे पता चला कि रानी की सराय थाना क्षेत्र के चकवारा निवासी नकदू के खिलाफ 1984 में हत्या और साक्ष्य छुपाने का मुकदमा दर्ज हुआ था। नकदू ने पुरानी दुश्मनी में जहानागंज के रहने वाले मुन्ना यादव की गोली मारकर हत्या कर दी थी।
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1987 में नकदू पर डकैती का दूसरा मुकदमा दर्ज हुआ। उसके खिलाफ 1988 में गैंगस्टर की कार्रवाई की गई थी। हिस्ट्रीशीट भी खोली गई थी। पुलिस की जांच में सामने आया कि नकदू यादव ने कक्षा चार तक की पढ़ाई गांव के प्राइमरी स्कूल की है।
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इसके बावजूद आठवीं कक्षा पास होने का फर्जी अंक पत्र बनवा कर 1989 में होमगाई की नौकरी हासिल कर ली। इससे पहले तक उसकी पहचान नकदू यादव पुत्र लोकई यादव के रूप में होती थी, लेकिन नौकरी मिलने के बाद पहचान बदल । नाम बदल कर नौकरी करने लगा।
पुलिस को भी दिया चकमा
गैंगस्टर और हिस्ट्रीशीट ने नाम, पहचान वदल कर नौकरी हासिल कर ली, लेकिन किसी को भनक तक नहीं लगी। रानी की सराय थाने की पुलिस और लोकल इंटेलिजेंस ने नौकरी से संबं धित दस्तावेजों को सत्यापन भी कर दिया। चरित्र प्रमाण पत्र पर 1992 में हस्ताक्षर किए गए।
ये भी पढ़ें; UP : होमगार्ड निकला कुख्यात गैंगस्टर..., 35 साल से कर रहा था नौकरी, निलंबित; जानें कैसे बना नकदू से नंदलाल
गैंगस्टर और हिस्ट्रीशीट ने नाम, पहचान वदल कर नौकरी हासिल कर ली, लेकिन किसी को भनक तक नहीं लगी। रानी की सराय थाने की पुलिस और लोकल इंटेलिजेंस ने नौकरी से संबं धित दस्तावेजों को सत्यापन भी कर दिया। चरित्र प्रमाण पत्र पर 1992 में हस्ताक्षर किए गए।
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