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वाकई रत्न हैं फ्रैंक इस्लाम, बोले-जिले गांव के लोग
ब्यूरो/अमर उजाला, आजमगढ़
Updated Thu, 10 Dec 2015 12:32 AM IST
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भारतीय मूल के अमेरिकी उद्यमी फ्रैंक इस्लाम को उत्तर प्रदेश रत्न अवार्ड से नवाजे जाने की सरकार की घोषणा से जिले के लोगों में खुशी की लहर दौड़ गई है। उनके गांव के लोग, सहपाठी और चाहने वाले उन्हें वाकई रत्न मानते हैं।
नंदाव गांव में फ्रैंक इस्लाम के पड़ोसी हफीजुल्लाह कहते कि गैर मुल्क में उन्होंने जो मुकाम हासिल किया है वह हौसला बढ़ानेवाला है।
वे भले ही अमेरिका में बस गए लेकिन गांव और देश से उनका जुड़ाव खत्म नहीं हुआ है। पड़ोसी सरफराज अहमद कहते हैं कि उन्होंने तरक्की का रास्ता दूसरों को दिखाया है।
उनके मन में यहां के लिए कुछ करने की चाहत भी है। अलीगढ़ यूनिवर्सिटी में फ्रैंक के सहपाठी रहे रैदोपुर मुहल्ला निवासी डा. अहमद शफी अंसारी बताते हैं कि यूनिवर्सिटी में एक बार मैथमेटिक्स पर एक सेमिनार हुआ था।
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फ्रैंक के वक्तव्य से बाहर से आए डेलीगेट काफी प्रभावित हुए। उन्हें यूनाइटेड स्टेट आने का न्यौता भी दिया। उन्होंने साबित किया कि वे इस सम्मान के हकदार हैं।
कक्षा पांच के उनके साथी मोहम्मद साफे कहते हैं कि इतनी तरक्की के बाद भी उनमें कोई अंतर नहीं आया है। पुराने मित्रों से आज भी वे खत या ईमेल के जरिये बातचीत करते रहते हैं।
वे वाकई इससे भी बड़े सम्मान के काबिल हैं। गांव के दानिश और रिजवान कहते हैं कि फ्रैंक ने इंजीनियरिंग कालेज बनवाने की घोषणा की है यह गांव में बने तो यहां के लोगों को इसका लाभ मिलेगा वे हम सब लोगों के आदर्श हैं।
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नंदाव गांव में फ्रैंक इस्लाम के पड़ोसी हफीजुल्लाह कहते कि गैर मुल्क में उन्होंने जो मुकाम हासिल किया है वह हौसला बढ़ानेवाला है।
वे भले ही अमेरिका में बस गए लेकिन गांव और देश से उनका जुड़ाव खत्म नहीं हुआ है। पड़ोसी सरफराज अहमद कहते हैं कि उन्होंने तरक्की का रास्ता दूसरों को दिखाया है।
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उनके मन में यहां के लिए कुछ करने की चाहत भी है। अलीगढ़ यूनिवर्सिटी में फ्रैंक के सहपाठी रहे रैदोपुर मुहल्ला निवासी डा. अहमद शफी अंसारी बताते हैं कि यूनिवर्सिटी में एक बार मैथमेटिक्स पर एक सेमिनार हुआ था।
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फ्रैंक के वक्तव्य से बाहर से आए डेलीगेट काफी प्रभावित हुए। उन्हें यूनाइटेड स्टेट आने का न्यौता भी दिया। उन्होंने साबित किया कि वे इस सम्मान के हकदार हैं।
कक्षा पांच के उनके साथी मोहम्मद साफे कहते हैं कि इतनी तरक्की के बाद भी उनमें कोई अंतर नहीं आया है। पुराने मित्रों से आज भी वे खत या ईमेल के जरिये बातचीत करते रहते हैं।
वे वाकई इससे भी बड़े सम्मान के काबिल हैं। गांव के दानिश और रिजवान कहते हैं कि फ्रैंक ने इंजीनियरिंग कालेज बनवाने की घोषणा की है यह गांव में बने तो यहां के लोगों को इसका लाभ मिलेगा वे हम सब लोगों के आदर्श हैं।