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Azamgarh News: सरयू नदी के पानी से 58 बीघा परवल की फसल बर्बाद, सात सेंटीमीटर घटा जलस्तर
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महाराजगंज के मलहपुरवा में बाढ़ के पानी से घिरा पूर्व माध्यमिक विद्यालय। संवाद
सगड़ी तहसील क्षेत्र में उत्तर दिशा में बहने वाली सरयू नदी का जलस्तर 24 घंटे में सात सेंटीमीटर कम हुआ है, लेकिन बाढ़ प्रभावित इलाकों में लोगों की दुश्वारियां कम नहीं हुई हैं। सबसे अधिक नुकसान परवल की खेती करने वाले किसानों को उठाना पड़ा है। सहबदिया गांव में करीब दो दर्जन किसानों की 58 बीघे खेत में लगी परवल की फसल बाढ़ की भेंट चढ़ गई। किसानों के अनुसार, इससे उन्हें 50 लाख रुपये से अधिक का नुकसान हुआ है।
हरैया विकास खंड के सहबदिया गांव निवासी बिंदुलाल, रामभवन, शेषनाग, ललसू, श्रीवल, हरिलाल, ठाकुर, प्रकाश, विनोद, रघु, सुनील, राम, गुल्लू, गया, जोखन, श्रीराम, रामानंद, रामबली, मदन, फूलबदन, सुभाष, मोती और रामाश्रय सहित अन्य किसानों ने परवल की खेती की थी।
इस बार किसानों को इससे बड़ी उम्मीदें थीं। कई किसानों ने एक से चार बीघे तक में परवल लगाया था। बाढ़ का पानी खेतों में भरने से पूरी फसल नष्ट हो गई। किसानों ने बताया कि एक बीघा परवल की खेती तैयार करने में करीब 50 हजार रुपये खर्च होते हैं।
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फसल तैयार होने के बाद एक बीघे से एक लाख रुपये से अधिक की आमदनी की उम्मीद थी। किसानों के मुताबिक, इस बार अच्छी पैदावार की संभावना थी, लेकिन घाघरा की बाढ़ ने उनकी पूरी मेहनत और पूंजी डुबो दी।
किसानों ने बताया कि परवल के पौधे गाजीपुर के कासिमाबाद क्षेत्र से लाकर यहां लगाए जाते हैं।
इसके बाद खाद, पानी और अन्य संसाधनों पर लगातार खर्च किया जाता है। किसान छोटई, बिंदुलाल, ललसू, शेषनाथ, बसंती, राजमति और उमा आदि ने बताया कि बाढ़ के कारण परवल की फसल पूरी तरह बर्बाद हो गई है। अब खेती की लागत निकालना भी मुश्किल हो गया है।
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हरैया विकास खंड के सहबदिया गांव निवासी बिंदुलाल, रामभवन, शेषनाग, ललसू, श्रीवल, हरिलाल, ठाकुर, प्रकाश, विनोद, रघु, सुनील, राम, गुल्लू, गया, जोखन, श्रीराम, रामानंद, रामबली, मदन, फूलबदन, सुभाष, मोती और रामाश्रय सहित अन्य किसानों ने परवल की खेती की थी।
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इस बार किसानों को इससे बड़ी उम्मीदें थीं। कई किसानों ने एक से चार बीघे तक में परवल लगाया था। बाढ़ का पानी खेतों में भरने से पूरी फसल नष्ट हो गई। किसानों ने बताया कि एक बीघा परवल की खेती तैयार करने में करीब 50 हजार रुपये खर्च होते हैं।
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फसल तैयार होने के बाद एक बीघे से एक लाख रुपये से अधिक की आमदनी की उम्मीद थी। किसानों के मुताबिक, इस बार अच्छी पैदावार की संभावना थी, लेकिन घाघरा की बाढ़ ने उनकी पूरी मेहनत और पूंजी डुबो दी।
किसानों ने बताया कि परवल के पौधे गाजीपुर के कासिमाबाद क्षेत्र से लाकर यहां लगाए जाते हैं।
इसके बाद खाद, पानी और अन्य संसाधनों पर लगातार खर्च किया जाता है। किसान छोटई, बिंदुलाल, ललसू, शेषनाथ, बसंती, राजमति और उमा आदि ने बताया कि बाढ़ के कारण परवल की फसल पूरी तरह बर्बाद हो गई है। अब खेती की लागत निकालना भी मुश्किल हो गया है।