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जनपद के सेकपुरा गांव निवासी है बिहार के राज्यपाल
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आजमगढ़। केंद्र सरकार ने जिले के रहने वाले राजनेता फागू चौहान को बिहार का राज्यपाल बनाया है। मूल रूप से जिले के सेकपुरा गांव निवासी फागू चौहान का राजनीतिक करियर पड़ोसी जिले मऊ के घोसी विस सीट से शुरू हुआ, लेकिन विधायक व मंत्री के रूप में उन्होंने जिले के विकास में अपना योगदान दिया हुआ है। केंद्र सरकार द्वारा उन्हें बिहार प्रांत का राज्यपाल बनाए जाने पर जिले में खुशी का माहौल है।
प्रदेश सरकार में पूर्व मंत्री रहे फागू चौहान ने अपनी राजनीतिक पारी की शुरुआत 1985 में घोसी विस सीट से पहली बार डीएमकेपी के टिकट पर जीत दर्ज कर की। उस समय घोसी सीट भी आजमगढ़ जिले का ही हिस्सा थी। 1988 में मऊ जिला अस्तित्व में आया। इसके बाद 1991 के चुनाव में फागू ने जनता दल के टिकट पर जीत हासिल किया। 1996 में बीजेपी का दामन थामते हुए घोसी सीट पर भाजपा का परचम लहराया। 2002 के चुनाव में भी बीजेपी के टिकट पर जीत हासिल किया। 2007 में इनका भाजपा से मोह भंग हुआ और इन्होंने बीएसपी के टिकट पर चुनाव लड़ कर जीत दर्ज की। 2012 के चुनाव में इन्हें पराजय का सामना करना पड़ा। 2017 में एक बार फिर भाजपा का झंडा थाम कर इन्होंने घोसी सीट से चुनाव लड़ा और जीते। भाजपा व बसपा के शासन काल में फागू चौहान विभिन्न विभागों में मंत्री रहे। 1996 से 2002 के बीच भाजपा की सरकार रहीं। इसमें कल्याण सिंह, रामप्रकाश गुप्ता व राजनाथ सिंह तथा 2002 से 2007 तक मायावती के मुख्यमंत्रित्व काल में इन्हें लाल बत्ती मिली थी।
सात बच्चों के पिता व हाईस्कूल पास हैं फागू चौहान
आजमगढ़। बिहार के राज्यपाल बनाए गए फागू चौहान सात बच्चों के पिता है। इसमें तीन पुत्र व चार पुत्रियां है। 1965 में इन्होंने शिब्ली इंटर कॉलेज से हाईस्कूल की परीक्षा उत्तीर्ण की है। इसके आगे की पढ़ाई वे नहीं कर सके।
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बिहार के राज्यपाल बनाए गए फागू चौहान के पिता खरपत्तू चौहान राजगीर मिस्त्री थे। आज एक राजगीर मिस्त्री का पुत्र बिहार के सर्वोच्च पद पर आसीन हुआ है। इससे इनके पैतृक गांव सेकपुरा के साथ ही जिले में खुशी का माहौल है।
राज्यपाल पद तक पहुंचने वाले जिले के दूसरे राजनेता
आजमगढ़। फागू चौहान जिले के उन चुनिंदा नेताओं में शामिल है। जिन्हें राज्यपाल जैसा महत्वपूर्ण पद मिला है। फागू के पहले स्व. रामनरेश यादव मध्यप्रदेश के राज्यपाल पद पर आसीन होकर जिले का मान बढ़ा चुके है। रामनरेश यादव एक बार प्रदेश के मुख्यमंत्री भी रहे है।
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प्रदेश सरकार में पूर्व मंत्री रहे फागू चौहान ने अपनी राजनीतिक पारी की शुरुआत 1985 में घोसी विस सीट से पहली बार डीएमकेपी के टिकट पर जीत दर्ज कर की। उस समय घोसी सीट भी आजमगढ़ जिले का ही हिस्सा थी। 1988 में मऊ जिला अस्तित्व में आया। इसके बाद 1991 के चुनाव में फागू ने जनता दल के टिकट पर जीत हासिल किया। 1996 में बीजेपी का दामन थामते हुए घोसी सीट पर भाजपा का परचम लहराया। 2002 के चुनाव में भी बीजेपी के टिकट पर जीत हासिल किया। 2007 में इनका भाजपा से मोह भंग हुआ और इन्होंने बीएसपी के टिकट पर चुनाव लड़ कर जीत दर्ज की। 2012 के चुनाव में इन्हें पराजय का सामना करना पड़ा। 2017 में एक बार फिर भाजपा का झंडा थाम कर इन्होंने घोसी सीट से चुनाव लड़ा और जीते। भाजपा व बसपा के शासन काल में फागू चौहान विभिन्न विभागों में मंत्री रहे। 1996 से 2002 के बीच भाजपा की सरकार रहीं। इसमें कल्याण सिंह, रामप्रकाश गुप्ता व राजनाथ सिंह तथा 2002 से 2007 तक मायावती के मुख्यमंत्रित्व काल में इन्हें लाल बत्ती मिली थी।
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सात बच्चों के पिता व हाईस्कूल पास हैं फागू चौहान
आजमगढ़। बिहार के राज्यपाल बनाए गए फागू चौहान सात बच्चों के पिता है। इसमें तीन पुत्र व चार पुत्रियां है। 1965 में इन्होंने शिब्ली इंटर कॉलेज से हाईस्कूल की परीक्षा उत्तीर्ण की है। इसके आगे की पढ़ाई वे नहीं कर सके।
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बिहार के राज्यपाल बनाए गए फागू चौहान के पिता खरपत्तू चौहान राजगीर मिस्त्री थे। आज एक राजगीर मिस्त्री का पुत्र बिहार के सर्वोच्च पद पर आसीन हुआ है। इससे इनके पैतृक गांव सेकपुरा के साथ ही जिले में खुशी का माहौल है।
राज्यपाल पद तक पहुंचने वाले जिले के दूसरे राजनेता
आजमगढ़। फागू चौहान जिले के उन चुनिंदा नेताओं में शामिल है। जिन्हें राज्यपाल जैसा महत्वपूर्ण पद मिला है। फागू के पहले स्व. रामनरेश यादव मध्यप्रदेश के राज्यपाल पद पर आसीन होकर जिले का मान बढ़ा चुके है। रामनरेश यादव एक बार प्रदेश के मुख्यमंत्री भी रहे है।