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किसानों को कड़वी लग रही गन्ने की खेती
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आजमगढ़। जिले के किसानों को गन्ने की खेती कड़वी लगने लगी है। इस बार गन्ना बोआई क्षेत्रफल में तेजी से गिरावट आई है। विभागीय सर्वे में स्पष्ट हुआ कि गत वर्ष की तुलना में इस बार गन्ना क्षेत्रफल 1598.78 हेक्टेयर कम है। गन्ना क्षेत्र कम होना चीनी उद्योग के लिए खतरे की घंटी है।
प्रारम्भिक सर्वेक्षण के ताजा आंकडे़ चौंकाने वाले हैं क्योंकि गन्ने की खेती जिले में अधिक मात्रा में होती है। बावजूद इसके इस बार गन्ना क्षेत्रफल में 10 प्रतिशत की कमी आई है। जिले में किसानों को गन्ना बोना फायदे का सौदा नजर नहीं आ रहा है। जिले में गन्ना क्षेत्र घटा है। जिला गन्ना अधिकारी अशर्फी लाल ने बताया कि आजमगढ़ परिक्षेत्र में गन्ना सर्वेक्षण के आधार पर गन्ना क्षेत्रफल में विगत वर्ष के सापेक्ष जनपद आजमगढ़ के पौधा गन्ना क्षेत्रफल में 1862.77 हेक्टेयर की कमी तथा पेड़ी क्षेत्रफल में 461.548 हेक्टेयर की वृद्घि है। कुल गन्ना क्षेत्रफल में गत वर्ष के सापेक्ष 1598.78 हेक्टेयर की कमी पाई गई है। जबकि वर्ष 2020-21 में किए गए सर्वे के अनुसार गन्ना पेड़ी क्षेत्रफल 5489.329 हेक्टेयर दर्ज किया गया था। वर्ष 2021-22 में किए गए सर्वे के अनुसार गन्ना पेड़ी क्षेत्रफल 5950.877 दर्ज किया गया है जो कि गत वर्ष के सापेक्ष 461.548 हेक्टेयर अधिक है। जिला गन्ना अधिकारी अशर्फी लाल ने कृषकों से अनुरोध है कि गन्ने की खेती में अपना अधिक से अधिक रूझान प्रदर्शित करें और गन्ने की बुवाई अवश्य करें। वहीं किसानों का कहना है कि बकाया गन्ना मूल्य को लेकर हर वर्ष होने वाली किचकिच किसानों के मोह भंग को जिम्मेदार है।
जीपीएस से किया गया गन्ना सर्वे
आजमगढ़। गन्ना सर्वे में पेडी ज्यादा दिखाकर सीजन के शुरू में गन्ना आपूर्ति को कलेंडर में ज्यादा पर्ची लगवाकर गन्ना पहले बेचने वालों की मनमर्जी नहीं चलेगी। वजह, इस बार गन्ना सर्वे जीपीएस द्वारा किया गया है। सर्वेयर जीपीएस मशीन खेत पर ले जाकर जैसे ही आन किए, वैसे ही गन्ना खेत के सही मालिक का नाम व क्षेत्रफल और गन्ने की श्रेणी सभी डिटेल मशीन की स्क्रीन पर आ जाएंगी।
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आगामी गन्ना सीजन के लिए गन्ना विभाग ने अभी से ही तैयारी शुरू कर दी है। कोरोनाकाल के कारण गन्ना सर्वे का कार्य जल्दी कराया लिया गया है। इस बार गन्ना सर्वे में कई नियमों में बदलाव किया गया है। इस बार पेड़ी गन्ने का सर्वे नहीं किया जाएगा। सर्वेयर अर्थात सर्वे करने में लगे कर्मचारी सिर्फ किसानों के पौधे गन्ने के क्षेत्रफल का ही सर्वे करेंगे। सर्वेयर कर्मी गन्ना प्लाट पर पहुंचकर जीपीएस से यह देखेगा कि यह किसके नाम से अंकित था और इसमें कितना गन्ना क्षेत्रफल है। सही पाने पर उसे क्लिक कर फीड कर दिया गया। पहले किसान अन्य किसान के खेत को अपना दिखाकर क्षेत्रफल बढ़वा देते थे, ताकि उन्हें सीजन में गन्ना आपूर्ति को अच्छी पर्ची जल्दी मिल जाए। इस बार उक्त विधि से सभी को सामान रूप से पर्ची मिलेंगी और गन्ना सर्वे में कोई भी व्यक्ति हेराफेरी नहीं करा सकता है। जिला गन्ना अधिकारी अशर्फी लाल ने बताया कि 24 हजार किसानों का 2393 गन्ने के क्षेत्रफल का सर्वे किया जा चुका है। इसकी मैपिंग भी हो चुकी है। इससे किसानों को काफी राहत मिलेगी। सारी व्यवस्थाएं ऑनलाइन कर दी गई है। घोषणा पत्र भी ऑनलाइन ही भरा जा रहा है।
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प्रारम्भिक सर्वेक्षण के ताजा आंकडे़ चौंकाने वाले हैं क्योंकि गन्ने की खेती जिले में अधिक मात्रा में होती है। बावजूद इसके इस बार गन्ना क्षेत्रफल में 10 प्रतिशत की कमी आई है। जिले में किसानों को गन्ना बोना फायदे का सौदा नजर नहीं आ रहा है। जिले में गन्ना क्षेत्र घटा है। जिला गन्ना अधिकारी अशर्फी लाल ने बताया कि आजमगढ़ परिक्षेत्र में गन्ना सर्वेक्षण के आधार पर गन्ना क्षेत्रफल में विगत वर्ष के सापेक्ष जनपद आजमगढ़ के पौधा गन्ना क्षेत्रफल में 1862.77 हेक्टेयर की कमी तथा पेड़ी क्षेत्रफल में 461.548 हेक्टेयर की वृद्घि है। कुल गन्ना क्षेत्रफल में गत वर्ष के सापेक्ष 1598.78 हेक्टेयर की कमी पाई गई है। जबकि वर्ष 2020-21 में किए गए सर्वे के अनुसार गन्ना पेड़ी क्षेत्रफल 5489.329 हेक्टेयर दर्ज किया गया था। वर्ष 2021-22 में किए गए सर्वे के अनुसार गन्ना पेड़ी क्षेत्रफल 5950.877 दर्ज किया गया है जो कि गत वर्ष के सापेक्ष 461.548 हेक्टेयर अधिक है। जिला गन्ना अधिकारी अशर्फी लाल ने कृषकों से अनुरोध है कि गन्ने की खेती में अपना अधिक से अधिक रूझान प्रदर्शित करें और गन्ने की बुवाई अवश्य करें। वहीं किसानों का कहना है कि बकाया गन्ना मूल्य को लेकर हर वर्ष होने वाली किचकिच किसानों के मोह भंग को जिम्मेदार है।
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जीपीएस से किया गया गन्ना सर्वे
आजमगढ़। गन्ना सर्वे में पेडी ज्यादा दिखाकर सीजन के शुरू में गन्ना आपूर्ति को कलेंडर में ज्यादा पर्ची लगवाकर गन्ना पहले बेचने वालों की मनमर्जी नहीं चलेगी। वजह, इस बार गन्ना सर्वे जीपीएस द्वारा किया गया है। सर्वेयर जीपीएस मशीन खेत पर ले जाकर जैसे ही आन किए, वैसे ही गन्ना खेत के सही मालिक का नाम व क्षेत्रफल और गन्ने की श्रेणी सभी डिटेल मशीन की स्क्रीन पर आ जाएंगी।
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आगामी गन्ना सीजन के लिए गन्ना विभाग ने अभी से ही तैयारी शुरू कर दी है। कोरोनाकाल के कारण गन्ना सर्वे का कार्य जल्दी कराया लिया गया है। इस बार गन्ना सर्वे में कई नियमों में बदलाव किया गया है। इस बार पेड़ी गन्ने का सर्वे नहीं किया जाएगा। सर्वेयर अर्थात सर्वे करने में लगे कर्मचारी सिर्फ किसानों के पौधे गन्ने के क्षेत्रफल का ही सर्वे करेंगे। सर्वेयर कर्मी गन्ना प्लाट पर पहुंचकर जीपीएस से यह देखेगा कि यह किसके नाम से अंकित था और इसमें कितना गन्ना क्षेत्रफल है। सही पाने पर उसे क्लिक कर फीड कर दिया गया। पहले किसान अन्य किसान के खेत को अपना दिखाकर क्षेत्रफल बढ़वा देते थे, ताकि उन्हें सीजन में गन्ना आपूर्ति को अच्छी पर्ची जल्दी मिल जाए। इस बार उक्त विधि से सभी को सामान रूप से पर्ची मिलेंगी और गन्ना सर्वे में कोई भी व्यक्ति हेराफेरी नहीं करा सकता है। जिला गन्ना अधिकारी अशर्फी लाल ने बताया कि 24 हजार किसानों का 2393 गन्ने के क्षेत्रफल का सर्वे किया जा चुका है। इसकी मैपिंग भी हो चुकी है। इससे किसानों को काफी राहत मिलेगी। सारी व्यवस्थाएं ऑनलाइन कर दी गई है। घोषणा पत्र भी ऑनलाइन ही भरा जा रहा है।