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दास्तां बयां करते नम हो उठी आखें
ब्यूरो अाजमगढ़ र अमर उजाला
Updated Fri, 07 Aug 2015 01:21 AM IST
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मध्यप्रदेश के हरदा में हुए ट्रेन हादसे के गवाह छह युवक गुरुवार के सकुशल घर वापस लौटे। बेटों को सही सलामत देख परिवार के लोग खुशी से झूम उठे।
हादसे से सुरक्षित घर पहुंचे नितिन, अनिल, विमल, अजीत, प्रभात और राजेंद्र ने बताया कि घटना के वक्त वह लोग सीट आराम कर रहे थे। अनिल विमल और नितिन जाग रहे थे। रात लगभग 11 बजे तेज आवाज के साथ सभी लो बर्थ से नीचे गिर पड़े। जब कुछ समझते तब तक कमर तक पानी भर गया। जब समझ में आया तो वहां से बाहर निकलने का रास्ता ढूूढ़ने लगे। रास्ता मिलने पर सभी साथी एक साथ बोगी से बाहर आए और पानी में डूब रहे दो बच्चों और दो महिलाओं को भी बाहर निकाला। बगल में ही जनता एक्सप्रेस भी खड़ी थी।
वहां से बाहर निकलने के बाद वह लोग पांच किमी पैदल चलकर इटारसी स्टेशन पहुंचे। वहां पर उन लोगों को नि:शुल्क जलपान कराया गया। उसके बाद जब दूसरी ट्रेन की व्यवस्था हुई तो वह लोग उसे पकड़कर वाराणसी पहुंचे। वहां के हालात पर चर्चा करते हुए सभी युवकों की आंखें नम थी। खुद के बचने पर उन्होंने अपने माता-पिता के पुण्य प्रताप को इसका कारण बताया।
इनके वापस लौटने पर श्रीराम जानकी मंदिर परिसर में परिवार के लोगों ने पूजन-अर्चन कर भगवान का शुक्रिया अदा किया।
वहीं राहुल राय, भानू प्रताप सिंह, हरिराम, मनवेंद्र आदि ने ऐसा स्वागत किया जैसे लगा कि कोई जंग जीतकर लौटे हों। वहीं उनके माता-पिता की खुशी का तो ठिकाना ही नहीं था।
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हादसे से सुरक्षित घर पहुंचे नितिन, अनिल, विमल, अजीत, प्रभात और राजेंद्र ने बताया कि घटना के वक्त वह लोग सीट आराम कर रहे थे। अनिल विमल और नितिन जाग रहे थे। रात लगभग 11 बजे तेज आवाज के साथ सभी लो बर्थ से नीचे गिर पड़े। जब कुछ समझते तब तक कमर तक पानी भर गया। जब समझ में आया तो वहां से बाहर निकलने का रास्ता ढूूढ़ने लगे। रास्ता मिलने पर सभी साथी एक साथ बोगी से बाहर आए और पानी में डूब रहे दो बच्चों और दो महिलाओं को भी बाहर निकाला। बगल में ही जनता एक्सप्रेस भी खड़ी थी।
वहां से बाहर निकलने के बाद वह लोग पांच किमी पैदल चलकर इटारसी स्टेशन पहुंचे। वहां पर उन लोगों को नि:शुल्क जलपान कराया गया। उसके बाद जब दूसरी ट्रेन की व्यवस्था हुई तो वह लोग उसे पकड़कर वाराणसी पहुंचे। वहां के हालात पर चर्चा करते हुए सभी युवकों की आंखें नम थी। खुद के बचने पर उन्होंने अपने माता-पिता के पुण्य प्रताप को इसका कारण बताया।
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इनके वापस लौटने पर श्रीराम जानकी मंदिर परिसर में परिवार के लोगों ने पूजन-अर्चन कर भगवान का शुक्रिया अदा किया।
वहीं राहुल राय, भानू प्रताप सिंह, हरिराम, मनवेंद्र आदि ने ऐसा स्वागत किया जैसे लगा कि कोई जंग जीतकर लौटे हों। वहीं उनके माता-पिता की खुशी का तो ठिकाना ही नहीं था।
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