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Azamgarh News: पुरातत्व विभाग की अनदेखी से दौलत खां मकबरे का अस्तित्व खतरे में

Sun, 24 Nov 2024 03:24 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Sun, 24 Nov 2024 03:24 AM IST
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Existence of Daulat Khan Tomb in danger due to negligence of Archeology Department
मेंहनगर। कस्बे के वार्ड-1 में स्थित इब्राहिम दौलत खां का ऐतिहासिक मकबरा पुरातत्व विभाग की अनदेखी से अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहा है। धरोहर को निवर्तमान कांग्रेस की सरकार में पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग द्वारा इसे संरक्षित किया गया था। 12 साल पहले इसकी मरम्मत की गई थी। इसके रख-रखाव और मरम्मत की जिम्मेदारी पुरातत्व विभाग की है, बावजूद विभागीय अधिकारियों की लापरवाही से यह आज बदहाली के आंसू रो रहा है। मकबरे को देखने से पता चलता है कि यह अपने पुराने स्वरूप को खो रहा है।
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मुगल शासक जहांगीर के शासन काल में अपने जांबाज सिपहसालार अभिमन्यु सिंह के साहस और सूझबूझ से प्रसन्न होकर जहांगीर ने बिहार प्रांत के बक्सर से लेकर जौनपुर तक का विस्तृत क्षेत्र अभिमन्यु सिंह को दे दिया था। बाद में अभिमन्यु सिंह ने राज्य के संचालन के लिए वर्तमान में स्थिति आजमगढ़ जिले के मेंहनगर को जो वर्तमान में नगर पंचायत और तहसील है को राजधानी बनाया। जहां एक भव्य किले का निर्माण किया गया।अभिमन्यु सिंह ने 44 वर्षों के शासन काल के बाद राज्य के संचालन की जिम्मेदारी अपने भाई चंद्रसेन सिंह के पुत्र हरिवंश को सौंपकर स्वयं इस्लाम धर्म कबूल कर लिया। जहां वह परिवर्तित नाम इब्राहिम दौलत खां ने नाम से जाने गए। मृत्यु के बाद इब्राहिम दौलत खां और उनके प्रिय घोड़े के साथ ही वफादार कुत्ते को मेंहनगर कस्बे के उत्तरी भाग में दफन किया गया। जो बाद में इब्राहिम दौलत खां के मकबरे के नाम से प्रसिद्ध हुआ। इसे पर्यटकों के लिए संरक्षित किया गया था। जहां आज भी दूरदराज से देखने के लिए सैलानी आते हैं। लेकिन कस्बे के एक तरफ होने के कारण किसी ने इस पर ध्यान नहीं दिया था।
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मूल समस्याएं

- रख-रखाव की कमी: मकबरे का आखिरी मरम्मत कार्य 2012 में हुआ था, इसके बाद इसे नजरअंदाज कर दिया गया। वर्तमान में इसकी संरचना कमजोर हो रही है और यह अपने मूल स्वरूप को खो रही है।
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- सफाई और सुरक्षा का अभाव: नगर पंचायत की ओर से सफाई न किए जाने से यह जगह गंदगी से भरी है। साथ ही, यह जुआरियों और अन्य असामाजिक तत्वों का अड्डा बन चुकी है, इससे इस ऐतिहासिक स्थल की गरिमा कम हो रही है।


- प्रशासनिक उदासीनता: पुरातत्व विभाग ने मकबरे के रखरखाव के लिए सरकार को बजट का प्रस्ताव भेजा है, लेकिन इसे मंजूरी मिलना बाकी है। यह धीमी प्रक्रिया धरोहर को और नुकसान पहुंचा रही है।

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निगरानी के बाद भी यहां कुछ लोग मनमानी से बाज नहीं आते हैं। इसके बारे में उच्चाधिकारियों को अवगत कराया जाता है। इसके बाद भी लोग नहीं मानते हैं।

राजू, चौकीदार।

बोले जिम्मेदार

इसकी मरम्मत कराने के लिए पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग द्वारा सरकार को प्रस्ताव भेजा गया है। बजट आते ही मरम्मत का कार्य कराया जाएगा।

जे. राजू, जूनियर कंजवेशन अधिकारी।
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