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ट्रैफिक सिग्नल बनाने के लिए नहीं मिल रही कार्यदायी संस्था
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आजमगढ़। सड़क सुरक्षा को लेकर तमाम बात की जा रही हैं, मगर शहर के लिए प्रस्तावित ट्रैफिक सिग्नल की ओर किसी का भी ध्यान नहीं है। जबकि विकास प्राधिकरण के पास बजट भी उपलब्ध है। एडीएम ने पीडब्ल्यूडी व आवास विकास को इसके लिए इस्टीमेट भी बनाने के लिए कहा लेकिन दोनों विभागों ने अपने हाथ खड़े करते हुए इस्टीमेट बनाने से मना कर दिया। ऐसे में ट्रैफिक सिग्नल बनाने के लिए कोई कार्यदायी संस्था ही नहीं मिल रही है। जिसके कारण इस आधुनिक युग में भी हाथ के इशारे से यातायात नियंत्रित किया जा रहा है।
सड़क सुरक्षा अभियान हर साल चलाया जाता है, लेकिन प्रशासन बुनियादी सुविधाओं की ओर ध्यान नहीं देता। शहर में ट्रैफिक सिग्नल की जरूरत वाहनों की संख्या बढ़ने के साथ ही कई वर्ष से महसूस की जा रही है। शहर के प्रमुख चौराहों की यातायात व्यवस्था सिग्नल के सहारे संचालित करने की कवायद लंबे समय से चल रही है। फिर भी योजना का परिणाम सिफर ही रहा है। हर साल यातायात माह आता है और समाप्त हो जाता है, लेकिन शहर का ट्रैफिक सुधर नहीं रहा है। यातायात संचालन चौराहों पर तैनात होमगार्ड के हाथों के इशारे पर ही हो रहा है। जबकि बोर्ड की बैठक में इसे लेकर कई बार उच्चाधिकारियों ने निर्देश दिए थे। ताकि नरौली तिराहा, हैडिल चौराहा, अग्रसेन चौराहा, पांडेय बाजार चौराहा व जजी चौराहा पर सिग्नल लग सके लेकिन अभी तक यह प्रक्रिया फाइलों में ही अटकी पड़ी है। एडीए का कहना है कि कुछ माह पूर्व पुलिस अधीक्षक यातायात को पत्र जारी कर प्रमुख चौराहों की सूची मांगी थी जहां सिग्नल की आवश्यकता है। उनके द्वारा सूची भी उपलब्ध करा दी गई। लेकिन कार्यदायी संस्था न मिलने से यह योजना फाइलों में कैद होती दिख रही है। वहीं यातायात व्यवस्था भी रामभरोसे चल रहा है।
इस्टीमेट की पेंच में ट्रैफिक डिजिटल सिग्नल
आजमगढ़। बोर्ड की बैठक में एडीए को सख्त निर्देश दिए गए थे कि कार्यदायी संस्था को नामित कर सिग्नल लगवाया जाए। अब सवाल यह है कि सिग्नल लगाने की जिम्मेदारी किसको दी जाए यह स्पष्ट नहीं हो पा रहा है। एडीए सचिव बैजनाथ ने बताया कि पीडब्ल्यूडी व आवास विकास को जिम्मेदारी सौंपी गई थी लेकिन पीडब्ल्यूडी ने लिखित पत्र जारी कर असमर्थता जाहिर की है। जबकि आवास विकास ने दूरभाष पर ही असमर्थता जताया है। ऐसे में ट्रैफिक सिग्नल बनाने के लिए विभाग को कार्यदायी संस्था ही नहीं मिल रही है।
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सड़क सुरक्षा अभियान हर साल चलाया जाता है, लेकिन प्रशासन बुनियादी सुविधाओं की ओर ध्यान नहीं देता। शहर में ट्रैफिक सिग्नल की जरूरत वाहनों की संख्या बढ़ने के साथ ही कई वर्ष से महसूस की जा रही है। शहर के प्रमुख चौराहों की यातायात व्यवस्था सिग्नल के सहारे संचालित करने की कवायद लंबे समय से चल रही है। फिर भी योजना का परिणाम सिफर ही रहा है। हर साल यातायात माह आता है और समाप्त हो जाता है, लेकिन शहर का ट्रैफिक सुधर नहीं रहा है। यातायात संचालन चौराहों पर तैनात होमगार्ड के हाथों के इशारे पर ही हो रहा है। जबकि बोर्ड की बैठक में इसे लेकर कई बार उच्चाधिकारियों ने निर्देश दिए थे। ताकि नरौली तिराहा, हैडिल चौराहा, अग्रसेन चौराहा, पांडेय बाजार चौराहा व जजी चौराहा पर सिग्नल लग सके लेकिन अभी तक यह प्रक्रिया फाइलों में ही अटकी पड़ी है। एडीए का कहना है कि कुछ माह पूर्व पुलिस अधीक्षक यातायात को पत्र जारी कर प्रमुख चौराहों की सूची मांगी थी जहां सिग्नल की आवश्यकता है। उनके द्वारा सूची भी उपलब्ध करा दी गई। लेकिन कार्यदायी संस्था न मिलने से यह योजना फाइलों में कैद होती दिख रही है। वहीं यातायात व्यवस्था भी रामभरोसे चल रहा है।
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इस्टीमेट की पेंच में ट्रैफिक डिजिटल सिग्नल
आजमगढ़। बोर्ड की बैठक में एडीए को सख्त निर्देश दिए गए थे कि कार्यदायी संस्था को नामित कर सिग्नल लगवाया जाए। अब सवाल यह है कि सिग्नल लगाने की जिम्मेदारी किसको दी जाए यह स्पष्ट नहीं हो पा रहा है। एडीए सचिव बैजनाथ ने बताया कि पीडब्ल्यूडी व आवास विकास को जिम्मेदारी सौंपी गई थी लेकिन पीडब्ल्यूडी ने लिखित पत्र जारी कर असमर्थता जाहिर की है। जबकि आवास विकास ने दूरभाष पर ही असमर्थता जताया है। ऐसे में ट्रैफिक सिग्नल बनाने के लिए विभाग को कार्यदायी संस्था ही नहीं मिल रही है।
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