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अब काम-धाम खत्म, खूब दौड़े कयासों के घोड़े
ब्यूरो,अमर उजाला,आजमगढ़
Updated Thu, 23 Nov 2017 11:19 PM IST
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चुनावी समीक्षा करते भाजपा प्रत्याशी अजय सिंह
- फोटो : अमर उजाला
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आजमगढ़। जिले के 13 निकायों में मतदान बुधवार को संपन्न हो गया। प्रत्याशियों ने पिछले एक पखवाड़े से चल रही भाग-दौड़ की थकान घर पर बैठ कर उतारी। घरों पर रणनीतिकार सुबह से ही जुटे रहे।
किस क्षेत्र में कितना मत मिला इसकी गुणा-गणित चलती रही। फिलहाल तो सभी प्रत्याशी जीत रहे हैं। लेकिन वास्तविकता ये हैं कि सभी निकायों में निर्दलीय प्रत्याशियों ने राजनीतिक दलों के प्रत्याशियों की नींद उड़ा रखी है।
चुनाव संपन्न होने के बाद गुरुवार को जगह-जगह लोग हार जीत की चर्चा करते नजर आ रहे थे। कई स्थानों पर तो लोग कापी-कलम लेकर जोड़ घटाने में लगे हुए थे कि कौन प्रत्याशी जीतेगा और कौन प्रत्याशी हारेगा।
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प्रत्याशियों के समझ में कुछ नहीं आ रहा है कि आखिरी जीत किसकी होगी। मतदाताओं ने भी अबकी बार प्रत्याशियों को खूब छकाया है। अंत तक अपनी चुप्पी नहीं तोड़ी। मतदाता हर प्रत्याशी को वोट देने के लिए हां करते नजर आए।
प्रत्याशी भी असमंजस में पड़े हुए हैं कि आखिर किसको किसका मिला। प्रत्याशियों के घरों पर उनके रणनीतिकार और समर्थक हिसाब किताव लेकर उलझे रहे। बहरहाल अब इसके फैसला एक दिसंबर को मतगणना के बाद ही होगा।
लेकिन एक बात तय कि निर्दल प्रत्याशी कइयों की गुणा-गणित फेल कर सकते हैं। हर निकाय में ये लोगों में चर्चा का विषय बना हुआ है।
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किस क्षेत्र में कितना मत मिला इसकी गुणा-गणित चलती रही। फिलहाल तो सभी प्रत्याशी जीत रहे हैं। लेकिन वास्तविकता ये हैं कि सभी निकायों में निर्दलीय प्रत्याशियों ने राजनीतिक दलों के प्रत्याशियों की नींद उड़ा रखी है।
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चुनाव संपन्न होने के बाद गुरुवार को जगह-जगह लोग हार जीत की चर्चा करते नजर आ रहे थे। कई स्थानों पर तो लोग कापी-कलम लेकर जोड़ घटाने में लगे हुए थे कि कौन प्रत्याशी जीतेगा और कौन प्रत्याशी हारेगा।
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प्रत्याशियों के समझ में कुछ नहीं आ रहा है कि आखिरी जीत किसकी होगी। मतदाताओं ने भी अबकी बार प्रत्याशियों को खूब छकाया है। अंत तक अपनी चुप्पी नहीं तोड़ी। मतदाता हर प्रत्याशी को वोट देने के लिए हां करते नजर आए।
प्रत्याशी भी असमंजस में पड़े हुए हैं कि आखिर किसको किसका मिला। प्रत्याशियों के घरों पर उनके रणनीतिकार और समर्थक हिसाब किताव लेकर उलझे रहे। बहरहाल अब इसके फैसला एक दिसंबर को मतगणना के बाद ही होगा।
लेकिन एक बात तय कि निर्दल प्रत्याशी कइयों की गुणा-गणित फेल कर सकते हैं। हर निकाय में ये लोगों में चर्चा का विषय बना हुआ है।